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Hassan Nasrallah: किराना दुकानदार का बेटा कैसे बन गया हिजबुल्ला का प्रमुख, नसरल्ला की मौत के बाद अब आगे क्या?
Sat, 28 Sep 2024 02:18 PM IST
शिवेंद्र तिवारी
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिवेंद्र तिवारी
Updated Sat, 28 Sep 2024 02:18 PM IST
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हसन नसरल्ला
- फोटो :
AMAR UJALA
विस्तार
इस्राइल ने एलान किया है कि हिजबुल्ला के प्रमुख हसन नसरल्ला की मौत हो गई है। इस्राइली सेना आईडीएफ ने शनिवार को घोषणा की है कि नसरल्ला शुक्रवार को बेरूत में हुए हवाई हमले में मारा गया। बीते दिन इस्राइल ने लेबनान में मौजूद हिजबुल्ला के मुख्यालय पर बड़े पैमाने पर हमले किए। इस्राइली सेना ने मुख्यालय को निशाना बनाकर हिजबुल्ला के प्रमुख सैयद हसन नसरल्ला को मारने की कोशिश की थी और अब दावा है कि नसरल्ला की मौत हो गई है। हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्ला पिछले तीन दशकों से लेबनानी सशस्त्र समूह का नेतृत्व कर रहा था, जिसने इसे दक्षिण एशिया के सबसे शक्तिशाली अर्धसैनिक समूहों में से एक बना दिया है।यह हमला उस वक्त हुआ है जब संयुक्त राष्ट्र महासभा की बैठक में दुनिया भर के नेता जुटे हुए हैं। महासभा में इस्राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू हिजबुल्ला को नीचा दिखाने की चेतावनी दी और इसके बाद एक बड़े हमले की खबर आई। इस्राइली मीडिया ने कहा कि हमले में नसरल्ला ही निशाना था और हमले के वक्त वह मुख्यालय के इलाके में ही था।
आइए जानते हैं कि हसन नसरल्ला कौन था? वह हिजबुल्ला की सत्ता तक कैसे पहुंचा? नसरल्ला इस्राइल के निशाने पर क्यों रहा? अभी लेबनाल में क्या हुआ है?
हसन नसरल्ला कौन था?
64 वर्षीय नसरल्ला के नेतृत्व में हिजबुल्ला ने इस्राइल के खिलाफ कई युद्ध लड़े। इसके साथ ही नसरल्ला ने पड़ोसी सीरिया में संघर्ष में भाग लिया, जिससे राष्ट्रपति बशर अल-असद के पक्ष में शक्ति संतुलन बनाने में मदद मिली। कहा जाता है कि नसरल्ला ने हिजबुल्ला को इस्राइल को और कट्टर दुश्मन बना दिया और ईरान में शिया मजहबी नेताओं और हमास जैसे फलस्तीनी समूहों के साथ गठबंधन को मजबूत किया।
नसरल्ला अपने लेबनानी शिया अनुयायियों के बीच काफी मशहूर था। अरब और इस्लामी दुनिया के लाखों लोगों द्वारा सम्मानित नसरल्ला को सैय्यद की उपाधि दी गई। अमेरिका और पश्चिम के अधिकांश देश उसे एक उग्रवादी के रूप में देखते थे। अपनी ताकत के बावजूद नसरल्ला इस्राइली खतरों के डर से ज्यादातर समय छिपकर ही रहा।
64 वर्षीय नसरल्ला के नेतृत्व में हिजबुल्ला ने इस्राइल के खिलाफ कई युद्ध लड़े। इसके साथ ही नसरल्ला ने पड़ोसी सीरिया में संघर्ष में भाग लिया, जिससे राष्ट्रपति बशर अल-असद के पक्ष में शक्ति संतुलन बनाने में मदद मिली। कहा जाता है कि नसरल्ला ने हिजबुल्ला को इस्राइल को और कट्टर दुश्मन बना दिया और ईरान में शिया मजहबी नेताओं और हमास जैसे फलस्तीनी समूहों के साथ गठबंधन को मजबूत किया।
नसरल्ला अपने लेबनानी शिया अनुयायियों के बीच काफी मशहूर था। अरब और इस्लामी दुनिया के लाखों लोगों द्वारा सम्मानित नसरल्ला को सैय्यद की उपाधि दी गई। अमेरिका और पश्चिम के अधिकांश देश उसे एक उग्रवादी के रूप में देखते थे। अपनी ताकत के बावजूद नसरल्ला इस्राइली खतरों के डर से ज्यादातर समय छिपकर ही रहा।
हसन नसरल्ला
- फोटो :
एएनआई
वह सत्ता तक कैसे पहुंचा?
नसरल्ला का जन्म 1960 में बेरूत के उत्तरी उपनगर शारशाबूक में एक शिया परिवार में हुआ, उसके पिता किराना दुकानदार थे। नसरल्ला बाद में दक्षिणी लेबनान आ गया। उसने धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और अमल आंदोलन में शामिल हो गया। वह 15 साल की उम्र में कुछ समय के लिए अमल संगठन में शामिल हो गया जो हिजबुल्ला के बनने से पहले शिया राजनीतिक और अर्धसैनिक संगठन था। उसके बाद नसरल्ला इराक के नजफ में एक मदरसा में पढ़ने चला गया, जहां से उसे 1978 में सद्दाम हुसैन की सत्ता ने अन्य लेबनानी छात्रों के साथ निष्कासित कर दिया गया।
पहली बार इराक में नसरल्ला अपने गुरु प्रमुख मौलवी और हिजबुल्ला के सह-संस्थापक अब्बास अल-मुसावी से मिला। मुसावी के प्रभाव में आकर वे 1982 में लेबनान-इस्राइल संघर्ष के बाद हिजबुल्ला में शामिल हो गया, जब समूह अमल से अलग हो गया। हिजबुल्ला का गठन ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के सदस्यों द्वारा किया गया था जो 1982 में लेबनान में इस्राइली सेना के साथ युद्ध करने के लिए आए थे। यह पहला समूह था जिसे ईरान ने समर्थन दिया। धीरे-धीरे हिजबुल्ला ईरान समर्थित गुटों और सरकारों के समूह का हिस्सा बन गया, जिसे 'प्रतिरोध की धुरी' के रूप में जाना जाता है। इसी दौरान नसरल्ला ने भी अपना एक आधार बनाया।
फरवरी 1992 में दक्षिण लेबनान में इस्राइली हेलीकॉप्टर हमले में हिजबुल्ला के मुखिया 39 वर्षीय सैयद अब्बास मुसावी की मौत हो गई। घटना के दो दिन बाद हिजबुल्ला ने नसरल्ला को अपना महासचिव चुना। पांच साल बाद अमेरिका ने हिजबुल्ला को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। नसरल्ला की मुश्किलें यहीं कम नहीं हुईं और 1997 में नसरल्ला के सबसे बड़े बेटे हादी की इस्राइली सेना के खिलाफ लड़ाई में मौत हो गई।
नसरल्ला का जन्म 1960 में बेरूत के उत्तरी उपनगर शारशाबूक में एक शिया परिवार में हुआ, उसके पिता किराना दुकानदार थे। नसरल्ला बाद में दक्षिणी लेबनान आ गया। उसने धर्मशास्त्र की पढ़ाई की और अमल आंदोलन में शामिल हो गया। वह 15 साल की उम्र में कुछ समय के लिए अमल संगठन में शामिल हो गया जो हिजबुल्ला के बनने से पहले शिया राजनीतिक और अर्धसैनिक संगठन था। उसके बाद नसरल्ला इराक के नजफ में एक मदरसा में पढ़ने चला गया, जहां से उसे 1978 में सद्दाम हुसैन की सत्ता ने अन्य लेबनानी छात्रों के साथ निष्कासित कर दिया गया।
पहली बार इराक में नसरल्ला अपने गुरु प्रमुख मौलवी और हिजबुल्ला के सह-संस्थापक अब्बास अल-मुसावी से मिला। मुसावी के प्रभाव में आकर वे 1982 में लेबनान-इस्राइल संघर्ष के बाद हिजबुल्ला में शामिल हो गया, जब समूह अमल से अलग हो गया। हिजबुल्ला का गठन ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड के सदस्यों द्वारा किया गया था जो 1982 में लेबनान में इस्राइली सेना के साथ युद्ध करने के लिए आए थे। यह पहला समूह था जिसे ईरान ने समर्थन दिया। धीरे-धीरे हिजबुल्ला ईरान समर्थित गुटों और सरकारों के समूह का हिस्सा बन गया, जिसे 'प्रतिरोध की धुरी' के रूप में जाना जाता है। इसी दौरान नसरल्ला ने भी अपना एक आधार बनाया।
फरवरी 1992 में दक्षिण लेबनान में इस्राइली हेलीकॉप्टर हमले में हिजबुल्ला के मुखिया 39 वर्षीय सैयद अब्बास मुसावी की मौत हो गई। घटना के दो दिन बाद हिजबुल्ला ने नसरल्ला को अपना महासचिव चुना। पांच साल बाद अमेरिका ने हिजबुल्ला को एक आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया। नसरल्ला की मुश्किलें यहीं कम नहीं हुईं और 1997 में नसरल्ला के सबसे बड़े बेटे हादी की इस्राइली सेना के खिलाफ लड़ाई में मौत हो गई।
नसरल्ला ऐसे लेबनान और पूरे अरब जगत में चर्चित हुआ था
नसरल्ला के ही नेतृत्व में हिजबुल्ला ने 2000 में दक्षिणी लेबनान में इस्राइली सेना के साथ जंग लड़ी। इस लड़ाई के बाद 18 साल के कब्जे के बाद दक्षिणी लेबनान से इस्राइली सेना की वापसी हुई। दक्षिणी लेबनान से इस्राइली के हटने के बाद नसरल्ला लेबनान और पूरे अरब जगत में चर्चित हो गया। उसके संदेश हिजबुल्ला के अपने रेडियो और सैटेलाइट टीवी स्टेशन पर प्रसारित किए गए।
2006 में हिजबुल्ला ने इस्राइल के साथ 34 दिनों तक युद्ध लड़ा। इस जंग में 1,000 से अधिक लेबनानी और 150 इस्राइली मारे गए थे। जब 2011 में सीरिया में गृह युद्ध छिड़ा, तो हिजबुल्ला के लड़ाके असद की सेना के साथ आ गए।
नसरल्ला के ही नेतृत्व में हिजबुल्ला ने 2000 में दक्षिणी लेबनान में इस्राइली सेना के साथ जंग लड़ी। इस लड़ाई के बाद 18 साल के कब्जे के बाद दक्षिणी लेबनान से इस्राइली सेना की वापसी हुई। दक्षिणी लेबनान से इस्राइली के हटने के बाद नसरल्ला लेबनान और पूरे अरब जगत में चर्चित हो गया। उसके संदेश हिजबुल्ला के अपने रेडियो और सैटेलाइट टीवी स्टेशन पर प्रसारित किए गए।
2006 में हिजबुल्ला ने इस्राइल के साथ 34 दिनों तक युद्ध लड़ा। इस जंग में 1,000 से अधिक लेबनानी और 150 इस्राइली मारे गए थे। जब 2011 में सीरिया में गृह युद्ध छिड़ा, तो हिजबुल्ला के लड़ाके असद की सेना के साथ आ गए।
अभी इस्राइल के साथ संघर्ष में नसरल्ला की क्या भूमिका रही?
फलस्तीनी समूह हमास ने 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल में हमले किए थे, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे। इस हमले के बाद से गाजा में जंग छिड़ गई जो बाद में दक्षिण एशिया के कई देशों तक भी पहुंच गई। 7 अक्टूबर को इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के एक दिन बाद हिजबुल्ला ने सीमा पर इस्राइली सैन्य चौकियों पर हमला करना शुरू कर दिया।
हिजबुल्ला हमास के समर्थन में लगभग एक साल से उत्तरी इस्राइल में हवाई हमले कर रहा है। संघर्ष के दौरान नसरल्ला ने अपने भाषणों में दावा किया था कि हिजबुल्ला के सीमापार हमलों ने इस्राइली सेनाओं को पीछे खींच लिया है। नसरल्ला ने इस बात पर जोर दिया था कि हिजबुल्ला इस्राइल पर अपने हमले तब तक नहीं रोकेगा, जब तक गाजा में युद्ध विराम नहीं हो जाता।
हाल के दिनों में इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच तनाव बढ़ गया। इस्राइल ने युद्ध के एक नए चरण की घोषणा की जिसका उद्देश्य हिजबुल्ला को सीमा से पीछे धकेलना है, ताकि उत्तरी इस्राइली से विस्थापित हजारों लोग वापस लौट सकें।
फलस्तीनी समूह हमास ने 7 अक्तूबर 2023 को इस्राइल में हमले किए थे, जिसमें लगभग 1,200 लोग मारे गए थे। इस हमले के बाद से गाजा में जंग छिड़ गई जो बाद में दक्षिण एशिया के कई देशों तक भी पहुंच गई। 7 अक्टूबर को इस्राइल-हमास युद्ध शुरू होने के एक दिन बाद हिजबुल्ला ने सीमा पर इस्राइली सैन्य चौकियों पर हमला करना शुरू कर दिया।
हिजबुल्ला हमास के समर्थन में लगभग एक साल से उत्तरी इस्राइल में हवाई हमले कर रहा है। संघर्ष के दौरान नसरल्ला ने अपने भाषणों में दावा किया था कि हिजबुल्ला के सीमापार हमलों ने इस्राइली सेनाओं को पीछे खींच लिया है। नसरल्ला ने इस बात पर जोर दिया था कि हिजबुल्ला इस्राइल पर अपने हमले तब तक नहीं रोकेगा, जब तक गाजा में युद्ध विराम नहीं हो जाता।
हाल के दिनों में इस्राइल और हिजबुल्ला के बीच तनाव बढ़ गया। इस्राइल ने युद्ध के एक नए चरण की घोषणा की जिसका उद्देश्य हिजबुल्ला को सीमा से पीछे धकेलना है, ताकि उत्तरी इस्राइली से विस्थापित हजारों लोग वापस लौट सकें।
हसन नसरल्ला
- फोटो :
अमर उजाला
अब नसरल्ला कैसे मारा गया?
इस्राइली वायु सेना ने शुक्रवार शाम लेबनान की राजधानी बेरूत में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। सेना ने कहा कि इसने हिजबुल्ला के मुख्यालय पर हमला किया। हमलों के बाद आज आईडीएफ ने कहा कि हिजबुल्ला का प्रमुख हसन नसरल्ला कल बेरूत में हुए हवाई हमले में मारा गया। इससे पहले एक इस्राइली अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इस्राइल से पुष्टि की कि हमलों का निशाना हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्लाह था, जो उस समय कमांड सेंटर में मौजूद था। इस हमले ने लेबनान की राजधानी को हिलाकर रख दिया और शहर के ऊपर धुएं के घने बादल छा गए। कई हमलों में कई अन्य लोग भी हताहत हुए। इस्राइली हमलों में छह इमारतें ध्वस्त हो गईं। यह हिजबुल्ला और इस्राइली के बीच संघर्ष के लगभग एक साल में बेरूत में सबसे बड़ा हमला था। इस्राइली मीडिया ने बताया कि हमले में कुल दसियों टन विस्फोटक बम शामिल थे।
इस्राइली वायु सेना ने शुक्रवार शाम लेबनान की राजधानी बेरूत में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए। सेना ने कहा कि इसने हिजबुल्ला के मुख्यालय पर हमला किया। हमलों के बाद आज आईडीएफ ने कहा कि हिजबुल्ला का प्रमुख हसन नसरल्ला कल बेरूत में हुए हवाई हमले में मारा गया। इससे पहले एक इस्राइली अधिकारी ने टाइम्स ऑफ इस्राइल से पुष्टि की कि हमलों का निशाना हिजबुल्ला नेता हसन नसरल्लाह था, जो उस समय कमांड सेंटर में मौजूद था। इस हमले ने लेबनान की राजधानी को हिलाकर रख दिया और शहर के ऊपर धुएं के घने बादल छा गए। कई हमलों में कई अन्य लोग भी हताहत हुए। इस्राइली हमलों में छह इमारतें ध्वस्त हो गईं। यह हिजबुल्ला और इस्राइली के बीच संघर्ष के लगभग एक साल में बेरूत में सबसे बड़ा हमला था। इस्राइली मीडिया ने बताया कि हमले में कुल दसियों टन विस्फोटक बम शामिल थे।
नसरल्ला की मौत के बाद अब आगे क्या?
हिजबुल्ला प्रमुख हसन नसरल्ला की हत्या के बाद दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। ईरान ने इस्राइली हमलों के बाद प्रतिक्रिया दी है और वैश्विक संस्थाओं और नेताओं पर निशाना साधा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस्राइल पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने 'फलस्तीन और लेबनान में इस्राइल के भयानक और अभूतपूर्व अपराधों' का आरोप लगाते हुए सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय सभाओं, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 'निष्क्रियता' पर निशाना साधा है।
उन्होंने इस्राइल को 'सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक समर्थन' देने के लिए अमेरिका की भी आलोचना की। प्रवक्ता ने अंत में कहा कि इस्राइल के अपराधों के प्रति दुनिया की निष्क्रियता का धुआं निकट भविष्य में पूरी दुनिया को दिखाई देगा।
नसरल्ला की मौत के बाद इस्राइली सेना (आईडीएफ) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल हर्जई हलेवी ने बयान जारी किया है। चीफ ऑफ स्टाफ ने कहा कि इस्राइल उन सभी लोगों तक पहुंचेगा जो देश और उसके नागरिकों को धमकी देते हैं। हलेवी ने कहा, 'हमारे पास औजारों का कोई अंत नहीं है। संदेश स्पष्ट है, जो कोई भी इस्राइल के नागरिकों को धमकाता है, हम जानते हैं कि उन तक कैसे पहुंचा जाए।'
हिजबुल्ला प्रमुख हसन नसरल्ला की हत्या के बाद दक्षिण एशिया में तनाव बढ़ने की आशंका तेज हो गई है। ईरान ने इस्राइली हमलों के बाद प्रतिक्रिया दी है और वैश्विक संस्थाओं और नेताओं पर निशाना साधा है। ईरानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि इस्राइल पूरी दुनिया के लिए खतरा है। उन्होंने 'फलस्तीन और लेबनान में इस्राइल के भयानक और अभूतपूर्व अपराधों' का आरोप लगाते हुए सरकारों और अंतर्राष्ट्रीय सभाओं, विशेष रूप से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 'निष्क्रियता' पर निशाना साधा है।
उन्होंने इस्राइल को 'सैन्य, राजनीतिक और आर्थिक समर्थन' देने के लिए अमेरिका की भी आलोचना की। प्रवक्ता ने अंत में कहा कि इस्राइल के अपराधों के प्रति दुनिया की निष्क्रियता का धुआं निकट भविष्य में पूरी दुनिया को दिखाई देगा।
नसरल्ला की मौत के बाद इस्राइली सेना (आईडीएफ) के चीफ ऑफ स्टाफ लेफ्टिनेंट जनरल हर्जई हलेवी ने बयान जारी किया है। चीफ ऑफ स्टाफ ने कहा कि इस्राइल उन सभी लोगों तक पहुंचेगा जो देश और उसके नागरिकों को धमकी देते हैं। हलेवी ने कहा, 'हमारे पास औजारों का कोई अंत नहीं है। संदेश स्पष्ट है, जो कोई भी इस्राइल के नागरिकों को धमकाता है, हम जानते हैं कि उन तक कैसे पहुंचा जाए।'