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हांगकांग में प्रत्यर्पण विधेयक को लेकर भारी विरोध प्रदर्शन, जानिए क्या है पूरा मामला

Mon, 17 Jun 2019 10:55 AM IST
शिल्पा ठाकुर वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Mon, 17 Jun 2019 10:55 AM IST
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Hong Kong extradition bill: Know why People doing protest against govt and role of China
हांगकांग में विरोध प्रदर्शन - फोटो : PTI

हांगाकांग में लाखों लोग सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन विवादास्पद प्रत्यर्पण विधेयक के कारण हो रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि रविवार को हुई मार्च में बीस लाख लोग शामिल हुए हैं। जबकि बीते हफ्ते दस लाख 40 हजार लोग शामिल हुए थे। भयानक उमस भरी गर्मी के बीच प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान 'बुरे कानून को वापस लेने' के नारे लगाए। 


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हांगाकांग में लाखों लोग सड़क पर उतरकर सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। ये विरोध प्रदर्शन विवादास्पद प्रत्यर्पण विधेयक के कारण हो रहे हैं। आयोजकों का कहना है कि रविवार को हुई मार्च में बीस लाख लोग शामिल हुए हैं। जबकि बीते हफ्ते दस लाख 40 हजार लोग शामिल हुए थे। भयानक उमस भरी गर्मी के बीच प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान 'बुरे कानून को वापस लेने' के नारे लगाए। 

इस विधेयक को बीते हफ्ते तक पारित किया जाना था। लेकिन लोगों के भारी विरोध को देखते हुए बीजिंग समर्थक हांगकांग की नेता कैरी लाम ने शनिवार को कहा कि चीन को प्रत्यर्पण की अनुमति देने वाला ये विधेयक अब निलंबित रहेगा। उन्हें एक हफ्ते तक चले प्रदर्शन के बाद आखिरकार झुकना पड़ा।

यह भी पढ़ेंः हांगकांग और आजादी का भविष्य : लोग इतने भी मूर्ख नहीं हैं कि चीन की चालाकी न समझ पाएं


इस विधेयक को रोकने के लिए लाम पर उनके राजनीतिक सहयोगियों और सलाहकारों का भी दबाव पड़ रहा था। लेकिन लोग अब भी विरोध खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। उनका कहना है कि विधेयक को निलंबित नहीं बल्कि पूरी तरह से खत्म किया जाए। 

क्या है ये कानून?

इस कानून के अनुसार अगर कोई व्यक्ति अपराध करके हांगकांग आ जाता है को उसे जांच प्रक्रिया में शामिल होने के लिए चीन भेज दिया जाएगा। हांगकांग की सरकार इस मौजूदा कानून में संशोधन के लिए फरवीर में प्रस्ताव लाई थी। कानून में संशोधन का प्रस्ताव एक घटना के बाद लाया गया। जिसमें एक व्यक्ति ने ताइवान में अपनी प्रमिका की कथित तौर पर हत्या कर दी और हांगकांग वापस आ गया।

हांगकांग की अगर बात की जाए तो यह चीन का एक स्वायत्त द्वीप है। चीन इसे अपने संप्रभु राज्य का हिस्सा मानता है। वहीं हांगकांग की ताइवान के साथ कोई प्रत्यर्पण संधि नहीं है। जिसके कारण हत्या के मुकदमे के लिए उस व्यक्ति को ताइवान भेजना मुश्किल है।

अगर ये कानून पास हो जाता है तो इससे चीन को उन क्षेत्रों में संदिग्धों को प्रत्यर्पित करने की अनुमति मिल जाएगी, जिनके साथ हांगकांग के समझौते नहीं हैं। जैसे संबंधित अपराधी को ताइवान और मकाऊ भी प्रत्यर्पित किया जा सकेगा।

हांगकांग के लोग क्यों कर रहे हैं विरोध?

हांगकांग में विरोध प्रदर्शन
हांगकांग में विरोध प्रदर्शन - फोटो : PTI

हांगकांग के लोग इस कानून का जमकर विरोध कर रहे हैं। वो सरकार द्वारा कानून को निलंबित किए जाने के बाद भी नहीं थम रहे, उनका कहना है कि इसे पूरा तरह से खत्म कर दिया जाए। ऐसा इसलिए क्योंकि इन लोगों का मानना है कि अगर ये कानून कभी भी पास होता है तो हांगकांग के लोगों पर चीन का कानून लागू हो जाएगा। जिसके बाद चीन मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में ले लेगा और उन्हें यात्नाएं देगा।

लोगों को अब हांगकांग सरकार पर बिल्कुल भी भरोसा नहीं रहा है। बीते कुछ सालों से सरकार के लिए लोगों में अविश्वास काफी बढ़ गया है। ऐसा इसलिए क्योंकि वो बीजिंग के प्रभाव में आकर फैसले ले रही है। जिसके चलते लोग डरे हुए हैं कि बीजिंग गलत तरीके से इस कानून का लोगों के खिलाफ इस्तेमाल करेगा।

चीन से क्यों गुस्सा हैं हांगकांग वासी?

बात है साल 1997 की। तब हांगकांग को चीन के हवाले कर दिया गया था। उस वक्त बीजिंग ने 'एक देश-दो व्यवस्था' की अवधारणा के तहत कम से कम 2047 तक लोगों की स्वतंत्रता और अपनी कानूनी व्यवस्था को बनाए रखने की गारंटी दी थी। लेकिन ऐसा ज्यादा समय तक नहीं चला।

हांगकांग में 2014 में 79 दिनों तक चले 'अंब्रेला मूवमेंट' के बाद चीनी सरकार ने लोकतंत्र का समर्थन करने वाले लोगों पर जमकर कार्रवाई की। इस आंदोलन के समय चीन की सरकार से कोई सहमति नहीं बन पाई थी। विरोध प्रदर्शन करने वाले लोगों को जेल में डाल दिया गया था। आजादी का समर्थन करने वाली एक पार्टी पर प्रतिंबध लगा दिया गया था। 

क्या है सरकार का तर्क?

हांगकांग में विरोध प्रदर्शन
हांगकांग में विरोध प्रदर्शन - फोटो : social media

हांगकांग की सरकार ने इस कानून को प्रस्तावित करते हुए तर्क दिया है कि अगर इसे जल्द से जल्द पारित नहीं किया गया, तो हांगकांग के लोगों की सुरक्षा खतरे में पड़ जाएगी। ये जगह अपराधियों का अड्डा बनकर रह जाएगी। सरकारी अधिकारियों का कहना है कि ये नया कानून केवल गंभीर अपराध करने वालों पर ही लागू होगा। जिसमें कम से कम सात साल की सजा का प्रावधान है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रत्यर्पण की प्रक्रिया बोलने और प्रदर्शन करने की आजादी से जुड़े मामलों में नहीं अपनाई जाएगी। बिल का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारी काले कपड़े पहने हुए हैं और संसद की ओर मार्च कर रहे हैं।

कैरी लाम ने मांगी माफी

प्रदर्शन कर रहे लोगों ने कैरी लाम से इस्तीफा देने की मांग की है। अब इसी बीच लाम का भी बयान आया है। उन्होंने संघर्ष पैदा करने के लिए माफी तो मांग ली है लेकिन पद से हटने से साफ इनकार कर दिया है।

लाम के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया है, मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने स्वीकार किया है कि उनकी सरकार की कमियां हांगकांग में संघर्ष और विवाद की वजह बनीं और इससे कई नागरिकों को निराशा और परेशानी हुई।

बयान में कहा गया है कि मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने नागरिकों से माफी मांगी है और आलोचना को पूरी ईमानदारी और विनम्रता के साथ स्वीकार करने का वादा किया है। उनका यह बयान इस कानून को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित करने की उनकी घोषणा के एक दिन बाद आया है। 

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