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हांगकांग के ‘लोकतंत्र समर्थकों’ को अब भी ट्रंप से उम्मीद!

Fri, 13 Nov 2020 04:07 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांगकांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 13 Nov 2020 04:07 PM IST
सार

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वे करने वाली एजेंसी यू-गोव के पिछले महीने किए गए एक सर्वेक्षण से सामने आया था कि एशियाई देशों में ट्रंप सबसे ज्यादा लोकप्रिय हांगकांग और ताइवान में ही हैं...

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Hong Kong democracy supporters still have hope from Donald Trump
Student Protest in Hong Kong - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनाव में हारने के बावजूद अपनी हार ना स्वीकार करने से अमेरिका में चाहे जैसे भी हालात बन रहे हों, लेकिन हांगकांग में ‘लोकतंत्र समर्थकों’ का एक समूह अभी भी यही उम्मीद जोड़े बैठा है कि ट्रंप किसी तरह अपने पद पर बने रहने में कामयाब हो जाएंगे। हालांकि इस मुद्दे पर ‘लोकतंत्र समर्थक’ आंदोलन में फूट पड़ने के संकेत भी मिल रहे हैं। एक समूह ट्रंप की चीन विरोधी नीति के कारण उनका कट्टर समर्थक है। जबकि दूसरा गुट ये तर्क दे रहा है कि वे अमेरिका के लोकतांत्रिक जनादेश का विरोध करते हुए हांगकांग में लोकतंत्र की लड़ाई नहीं लड़ सकते। लेकिन ट्रंप समर्थक गुट आक्रामक मुद्रा में है।

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इस हफ्ते यहां के अखबार हांगकांग फ्री प्रेस ने एक लेख छापा, जिसका शीर्षक था- ‘राष्ट्रपति बाइडेन हांगकांग के पक्ष में खड़े होंगे- ट्रंप से भी ज्यादा प्रभावी ढंग से।’ इस पर ‘लोकतंत्र समर्थक’ आंदोलनकारियों का एक गुट भड़क गया। उसने इस अखबार के खिलाफ ही मुहिम छेड़ दी। अखबार को ऐसी चिट्ठियों की झड़ी लग गई, जिनमें इल्जाम लगाया गया था कि जो बाइडेन चीन की कम्युनिस्ट पार्टी की जेब में हैं। इस गुट का कहना है कि अमेरिका में चुनाव परिणाम अभी तय नहीं हुआ है और उसकी इच्छा है कि आखिरकार इसमें ट्रंप जीतें। हांगकांग फ्री प्रेस में छपे लेख के सह-लेखक साशा रमनी ने ब्रिटिश अखबार द गार्जियन से कहा कि उन्हें यह देखकर हैरत हुई कि अमेरिकी दक्षिणपंथी गुटों के प्रचार का हांगकांग में कितना व्यापक असर हो गया है।

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सर्वे करने वाली एजेंसी यू-गोव के पिछले महीने किए गए एक सर्वेक्षण से सामने आया था कि एशियाई देशों में ट्रंप सबसे ज्यादा लोकप्रिय हांगकांग और ताइवान में ही हैं। इसकी वजह ट्रंप प्रशासन की चीन के खिलाफ उग्र बयानबाजी है। अमेरिका के नव-निर्वाचित राष्ट्रपति जो बाइडेन ने टीन के खिलाफ अधिक सख्त रुख अपनाने की बात कही है। लेकिन हांगकांग के ‘लोकतंत्र समर्थकों’ में ये धारणा बनी हुई है कि बाइडेन चीन से संपर्क बना कर चलने की नीति अपनाएंगे।
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स्थानीय पत्रकारों का कहना है कि जब से अमेरिकी चुनाव का नतीजा आया है, उन्होंने यहां इन हलकों में भारी गुस्सा और निराशा के लक्षण देखे हैं। इन समूहों में बहुत से लोग मानते हैं कि बाइडेन धांधली करके चुनाव जीते हैं। ‘लोकतंत्र समर्थक’ आंदोलन से जुड़ी एक महिला ने एक पत्रकार से कहा कि अमेरिका में सिर्फ फॉक्स न्यूज ही विश्वसनीय मीडिया है। गौरतलब है कि फॉक्स न्यूज ट्रंप समर्थक है, लेकिन उसकी छवि सनसनीखेज पत्रकारिता करने वाले न्यूज चैनल की है।

यहां कई पत्रकारों और बुद्धिजीवियों को इसलिए सोशल मीडिया पर ट्रोलिंग का शिकार बनना पड़ा है, जिन्होंने अमेरिका के चुनाव नतीजों को सही ढंग से पेश करने की कोशिश की। जानकारों का कहना है कि अमेरिकी चुनाव प्रणाली की सही समझ ना होने के कारण वहां ट्रंप खेमे से लगाए गए चुनाव में धोखाधड़ी के आरोपों को यहां व्यापक स्वीकृति मिली है। लोकतंत्र समर्थक आंदोलन में एक धड़ा ऐसा जरूर है, जो यह मानता है कि ट्रंप की अस्थिर नीति के बजाय बाइडेन का सोचा-विचार रुख दीर्घकाल में हांगकांग के लिए ज्यादा लाभदायक होगा। ये खेमा अमेरिकी जनादेश के खिलाफ रुख लेकर अपनी नैतिक साख खोना नहीं चाहता।


लेकिन सोशल मीडिया के दौर में ज्यादा शोर मचाने वाले गुटों की बात ज्यादा दूर तक पहुंचती है। उसका असर यहां के समाज पर हुआ है। इससे यहां धारणा बनी है कि अगर ट्रंप हट गए, तो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यहां के आंदोलन का कोई मजबूत समर्थक नहीं बचेगा। इसीलिए किसी रूप में उनका राष्ट्रपति बने रहना यहां के लोकतंत्र समर्थक आंदोलन के लिए अस्तित्व का सवाल है।

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