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परदेस में अपनों को करीब लाती होली, स्वीडन में भी उड़ा गुलाल

Tue, 26 Mar 2019 02:33 PM IST
Priyamvada Sahai प्रियमवदा सहाय
Updated Tue, 26 Mar 2019 02:33 PM IST
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Holi celebrated in Sweden warmly

होली के दिन न सही लेकिन होली के नाम पर होने वाले समारोह ने स्वीडन में अपनों को एक दूसरे के करीब जरूर ला दिया। शनिवार को स्टॉकहोम हिंदू मंदिर में मनाई गई होली में आने वाले केवल धार्मिक, हिंदू या किसी राज्य विशेष के लोग नहीं थे। बल्कि वे सभी भारतीय थे और उनके साथ भारतीय सभ्यता संस्कृति में रुचि रखने वाले कुछ विदेशी और स्थानीय लोग थे।

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समारोह में कुछ गुलाल खेलने आए थे तो कुछ जान पहचान बढ़ाने के एजेंडे के साथ थे। इनके मोबाइल नंबर की अदला-बदली, व्हाट्सएप, फेसबुक और लिंक्डइन पर एक दूसरे को जोड़ने का काम गुलाल के साथ चलता रहा। वे यहां आए तो अकेले या अपने परिवार के साथ थे लेकिन जाने के समय तक उनका दायरा बड़ा हो चुका था।
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भले ही यहां अलग-अलग क्षेत्रों के धुरंधर भारतीय इकट्ठा हुए थे। गैर हिंदी भाषी राज्यों से ताल्लुक रखने वाले लोगों की संख्या भी कुछ कम नहीं थी लेकिन हिंदी उन्हें एक दूसरे से जोड़ रही थी। ज्यादातर लोग अपनी अंग्रेजियत से अलग होकर देसी तरीके से बात व्यवहार करना पसंद कर रहे थे, ताकि उनका आनंद दोगुना हो सके, मेलजोल बढ़ाना आसान हो और देश में न होने की कमी न खले।
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भारतीय संस्कृति की झलक यहां खूब देखने को मिली। होली मिलन पर मंदिर में होने वाले रंगारंग कार्यक्रमों में किसी एक भाषा का दबदबा नहीं था। कई राज्यों की झलकियां इनमें नजर आई। बंगाली महिलाएं मंगल ध्वनि निकाल रही थीं तो नृत्य संगीत में उत्तर-दक्षिण दोनों का मिश्रण था। सालों से यहां रह रहे भारतीयों के परिजन अपने बच्चों और दोस्तो को इनके मतलब समझाने और त्योहार का महत्व बताने में व्यस्त नजर आए। उनका कहना था कि अपनों को करीब लाने के लिए ऐसे कार्यक्रम होते रहने चाहिए। पिछले साल होली मिलन में शामिल हुए लोगों ने बताया कि इस बार आने वालों की तादाद ज्यादा थी। 



यहां उत्सव की शुरुआत होलिका दहन के साथ हुई। इसके लिए खुले मैदान में बने हवन मंडप का स्थान चुना गया था। इसके बाद भजन संगीत, आरती, कीर्तन जैसे रंगारंग कार्यक्रम हुए। प्रसाद के रूप में पकौड़े और चाय बंटे। मैंने पहली दफा प्रसाद में यह सब बंटते देखा। पता चला यह सबकुछ सात्विक है। इसलिए यह प्रसाद हो सकता है।


आरती लेने के साथ थाल में रूपए-पैसे रखने की परंपरा भी यहां पूरी तरह निभाई गई। थाल में स्वीडिश नोट व सिक्के रखने वाले खूब थे, जिसकी वजह से थाल देखने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ी हुई थी। दरअसल स्वीडन प्लास्टिक मनी पर चलने वाला देश है। यहां लोग नकदी का इस्तेमाल न कर सारा काम डेबिट या क्रेडिट कार्ड से करते हैं। इस कारण हाल फिलहाल में स्वीडन आए कुछ लोगों के बीच आरती की थाल स्वीडिश नोट-सिक्के देखने की थाल बन गई थी।

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