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US Election: कोर्ट में शपथ, आईपैड से पंच कार्ड-वोटिंग मशीन तक; अमेरिका में क्यों बदलते रहे मतदान के तरीके?

Tue, 05 Nov 2024 05:04 PM IST
शिवेंद्र तिवारी स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Tue, 05 Nov 2024 05:04 PM IST
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सार
US Election: अमेरिका में राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति पद के लिए मंगलवार को चुनाव हो रहे हैं। देश के 50 राज्यों के लोग मतदान के जरिए अगले चार साल का भविष्य चुनेंगे। अमेरिका में पिछले 200 से अधिक वर्षों में मतदान की प्रक्रिया 'वॉयस वोट' से लेकर टच स्क्रीन डिजिटल कंसोल तक विकसित हुई है।
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History of voting techniques in US Presidential Election news in hindi
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव। - फोटो : AMAR UJALA

विस्तार

विश्व का सबसे पुराना लोकतंत्र अमेरिका में आज राष्ट्रीय चुनाव हैं। अमेरिका के कई स्थानों में सुबह छब बजे (स्थानीय समयानुसार) से मतदान शुरू है। अमेरिकी लोग मतदान के जरिए को अपना चार साल का भविष्य चुनेंगे। इस चुनाव में मुख्य मुकाबला उपराष्ट्रपति कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच है। चुनाव के दिन से पहले ही करोड़ों मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग कर चुके थे। यह मतदान डाक और अन्य माध्यमों से किया गया। हालांकि, अमेरिका में मतदान के तरीके का एक लंबा, कभी-कभी उतार-चढ़ाव भरा इतिहास रहा है। उम्मीदवारों के नाम पुकारने से लेकर इलेक्ट्रॉनिक स्कैनिंग तक जैसे कई माध्यमों से लोगों ने अपने मताधिकार का इस्तेमाल किया है।


आइये जानते हैं कि अमेरिकी चुनावों में मतदान कैसे होता रहा है? इसमें क्या-क्या तरीके अपनाए गए? नई व्यवस्था कब से लागू है? इस चुनाव में लोग कैसे मतदान कर रहे हैं? 

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव 2024 - फोटो : AMAR UJALA
पहले जानते हैं अमेरिका में चुनाव कब है?
मंगलवार 5 नवंबर 2024 को अमेरिका में राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव है। देश के 50 राज्यों के मतदाता मतदान के जरिए अगले चार साल के लिए राष्ट्रपति चुनेंगे। 5 नवंबर को होने वाले चुनाव में मतदाता अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के सदस्यों के लिए भी मतदान करेंगे। ये कांग्रेस सदस्य कानूनों को पारित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। अमेरिकी चुनाव में मुख्य मुकाबला मौजूदा उपराष्ट्रपति और डेमोक्रेटिक पार्टी की उम्मीदवार कमला हैरिस और पूर्व राष्ट्रपति और रिपब्लिकन पार्टी के प्रत्याशी डोनाल्ड ट्रंप के बीच है।

इस चुनाव में जीतने वाला व्यक्ति व्हाइट हाउस से देश का नेतृत्व करेगा। राष्ट्रपति का कार्यकाल जनवरी 2025 से शुरू होकर चार साल चलेगा। राष्ट्रपति के पास कुछ कानून स्वयं पारित करने की शक्ति है, लेकिन अधिकांशतः उन्हें कानून पारित करने के लिए संसद (कांग्रेस) के साथ मिलकर काम करना पड़ता है।




 

अमेरिकी चुनावों में मतदान का इतिहास क्या है?
मतदान अमेरिकी लोकतंत्र की आधारशिला मानी जाती है, लेकिन अमेरिका का संविधान यह स्पष्ट रूप से नहीं बताता कि अमेरिकियों को चुनावों में अपने मत कैसे डालने चाहिए। अनुच्छेद 1 के खंड 4 में बस इतना कहा गया है कि प्रत्येक राज्य को चुनावों के समय, स्थान और तरीके का निर्धारण करना है। पिछले 200 से अधिक वर्षों में मतदान की प्रक्रिया खुले तौर पर 'वॉयस वोट' से लेकर टच स्क्रीन डिजिटल कंसोल तक विकसित हुई है।

ध्वनि मतदान से कैसे होता रहा मतदान?
हिस्ट्री चैनल की एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी चुनावों के पहले 50 वर्षों में ज्यादातर मतदान निजी तौर पर नहीं किया जाता था और मतदाता कागज के मतपत्र पर भी अपनी पसंद नहीं बताते थे। इसके बजाय, वोट देने का अधिकार रखने वाले (उस समय केवल श्वेत पुरुष) स्थानीय न्यायालय में जाते थे और सार्वजनिक रूप से अपना वोट 'बोलकर' डालते थे। इस तरह के मतदान को 'वाइवा वॉयस' या 'वॉयस वोटिंग' के नाम से जाना-जाता रहा है। सार्वजनिक मतदान का तरीका विशेष तौर पर 19वीं सदी की शुरुआत तक ज्यादातर राज्यों में कानून था। अमेरिका के पूर्वी दक्षिण-मध्य क्षेत्र राज्य कंटकी ने इसे 1891 तक जारी रखा। 

जैसे ही मतदाता न्यायालय में पहुंचते, एक जज उन्हें बाइबल पर शपथ दिलाते कि वे वही हैं जो उन्होंने नाम पुकारा था और उन्होंने पहले से मतदान नहीं किया है। शपथ लेने के बाद मतदाता क्लर्क को अपना नाम पुकारता और अपनी पसंद के उम्मीदवार की घोषणा करता।

कागजी मतपत्र के जरिए मतदान की शुरुआत
19वीं सदी की शुरुआत में पहली बार कागज के मतपत्र दिखाई देने लगे। हालांकि, लेकिन ये मतपत्र सरकारी चुनाव अधिकारियों द्वारा मुद्रित नहीं किए गए थे। शुरुआत में कागज के मतपत्र कागज के टुकड़ों से ज्यादा कुछ नहीं थे, जिस पर मतदाता अपने उम्मीदवारों के नाम लिखकर मतपेटी में डाल देता था। समाचार-पत्रों ने मतदान के लिए हर पद के शीर्षक के साथ खाली मतपत्र छापना शुरू कर दिया, जिसे पाठक फाड़कर अपने चुने हुए उम्मीदवारों के नाम भर सकते थे।

फिर राजनीतिक दलों ने इस व्यवस्था को बदलने में रूचि दिखाई। 19वीं सदी के मध्य तक, राज्यों में रिपब्लिकन या डेमोक्रेटिक पार्टी के लोग मतदाताओं को पहले से छपे हुए पर्चे वितरित करते थे, जिनमें केवल उनकी पार्टी के उम्मीदवारों की सूची होती थी। उन्हें रिपब्लिकन और डेमोक्रेटिक 'टिकट' कहा जाता था क्योंकि ये 19वीं सदी के ट्रेन टिकट जैसे दिखते थे। हर पार्टी के समर्थक कानूनी तौर पर पहले से छपे टिकट को बतौर असली मतपत्र इस्तेमाल कर सकते थे, जिससे सीधे मतदान करना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया।

ऑस्ट्रेलियाई पेपर बैलट की शुरुआत 
19वीं सदी के उत्तरार्ध में पेपर बैलेट का बोलबाला रहा, जिसमें मतदाताओं द्वारा धोखाधड़ी के लगातार आरोप लगाए गए और चुनाव सुधार की मांग की गई। इस समस्या का समाधान ऑस्ट्रेलिया से आया, जिसने 1858 में पहला मानकीकृत और सरकार द्वारा छापा गया पेपर बैलेट शुरू किया था। ऑस्ट्रेलियाई पेपर बैलेट पर सभी उम्मीदवारों के नाम छपे होते थे और मतदान स्थल पर मतदाताओं को सौंपे जाते थे। इसे पहली बार अमेरिका में न्यूयॉर्क और मैसाचुसेट्स राज्य द्वारा 1888 में अपनाया गया था।

जब सामने आईं वोटिंग मशीनें 
19वीं सदी के अंत में 'स्वचालित बूथ' वोटिंग मशीन की शुरुआत हुई। इस वोटिंग मशीन का आविष्कार जैकब एच. मायर्स ने किया था, जो उस वक्त एक इंजीनियरिंग चमत्कार था। इन वोटिंग मशीनों ने 1910 से 1980 तक अमेरिकी चुनावों पर अपना दबदबा कायम रखा।

पंच कार्ड और 'हैंगिंग चाड्स' का तरीका
मतदान के माध्यमों के बदलने का सिलसिला यूं ही चलता रहा। 1960 के दशक में पहली पंच कार्ड वोटिंग प्रणाली सामने आई। उस वक्त IBM जैसी कंपनियों ने पंच कार्ड को कंप्यूटर युग के भविष्य की तरह बनाया। पंच कार्ड का सबसे बड़ा आविष्कार यह था कि मतपत्रों की गिनती कंप्यूटर द्वारा की जा सकती थी। कंप्यूटर चुनाव की रात को तुरंत वोटों की गिनती कर सकते थे। लेकिन इसमें भी कमियां थीं, जो 2000 के राष्ट्रपति चुनाव में फ्लोरिडा में पुनर्मतगणना के दौरान स्पष्ट रूप से सामने आईं। यही वह समय था जब अमेरिकियों ने 'डिम्पल्ड चाड्स', 'प्रेग्नेंट चाड्स' और 'हैंगिंग चाड्स' जैसे नए शब्दों को सुना। दरअसल, चाड कागज का छोटा आयताकार टुकड़ा होता है जिसे मतदाता द्वारा अपना पसंदीदा उम्मीदवार चुनने पर पंच कार्ड से बाहर निकालाना होता है। 

आईपैड द्वारा मतदान
फ्लोरिडा में पुनर्मतगणना में सामने आई कमी के बाद अमेरिकी संसद (कांग्रेस) ने 2002 में हेल्प अमेरिका वोट एक्ट पारित किया। इस कानून के जरिए संघीय चुनावों में इस्तेमाल होने वाले मतदान उपकरणों के लिए उच्चतर मानकों को अनिवार्य किया गया। हेल्प अमेरिका वोट एक्ट ने यह मान लिया था कि टच स्क्रीन तकनीक मतदान का भविष्य बनने जा रही है। आखिरकार 2000 के दशक की शुरुआत में टच स्क्रीन वोटिंग मशीनों को अपनाने की शुरुआत हुई जिसका फिर एक बड़ा विरोध हुआ।

इस तकनीक में सॉफ्टवेयर की गड़बड़ियों के कारण मतदाताओं की गिनती में कुछ गंभीर त्रुटियां उत्पन्न हुईं। आरोप यहां तक लगाए गए कि 2016 के राष्ट्रपति चुनाव में 21 राज्यों में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों को रूसी हैकरों ने निशाना बनाया था। इसका नतीजा यह हुआ कि कई राज्यों ने अपनी महंगी टच स्क्रीन वोटिंग मशीनों को हटा दिया और फिर से कागज आधारित मतपत्रों का प्रयोग शुरू कर दिया।

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव।
अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव। - फोटो : ANI
ऑप्टिकल स्कैनिंग मशीन से मतदान  
1960 के दशक में पहली पंच कार्ड वोटिंग मशीन के बाजार में आने के तुरंत बाद इसके प्रतिस्पर्धा में ऑप्टिकल स्कैनिंग मशीन आई। ऑप्टिकल स्कैनिंग तकनीक अब अमेरिका में वोट डालने का सबसे लोकप्रिय तरीका है। इसके जरिए भरे जा सकने वाले पेपर बैलेट को आसानी से मतदाताओं को भेजा जा सकता है। जिससे मतदान केंद्र के स्वयंसेवकों की जरूरत कम हो जाती है और चुनाव के दिन से आगे मतदान के लिए समय सीमा काफी बढ़ जाती है। विशेषज्ञों का दवा है कि ऑप्टिकल स्कैनिंग तकनीक सस्ती है और इसमें कोई गड़बड़ नहीं है। 

अमेरिकी चुनाव के मुद्दे
अमेरिकी चुनाव के मुद्दे - फोटो : AMAR UJALA
इस बार मतदान के माध्यम क्या हैं?
फिलहाल अमेरिका में लोग मतपत्रों पर मतदान करते हैं और अधिकांश लोग अपने स्थानीय मतदान केंद्र पर पहुंचकर व्यक्तिगत रूप से मतदान करते हैं। मतदाता तीन तरीके से मतदान करते हैं। इसमें पहला तरीका हाथ से चिह्नित कागज के मतपत्र का है। ज्यादातर लोग अपने मतपत्र पर कलम से निशान लगाते हुए अपनी पसंद को चुनते हैं। 

दूसरा तरीका बैलेट मार्किंग डिवाइस का है। ये ऐसी मशीनें हैं जिसमें मतदाता इलेक्ट्रॉनिक रूप से अपना वोट करते हैं और कागज के रूप में यह रिकॉर्ड होता है। चुनाव से जुड़ी संस्था वेरिफाइड वोटिंग का कहना है कि लगभग एक चौथाई लोग इन मशीनों से मतदान करते हैं।

तीसरा तरीका इलेक्ट्रॉनिक मशीनों का है। लगभग 7% मतदाता ऐसे क्षेत्रों में रहते हैं, जहां डायरेक्ट रिकॉर्डिंग इलेक्ट्रॉनिक (डीआरई) मशीनों का इस्तेमाल होता है। डीआरई ऐसे कंप्यूटर होते हैं जो मतों को मेमोरी में सेव करते हैं, आमतौर पर किसी कागजी कार्रवाई की जरूरत नहीं होती।

अधिकांश राज्यों में डाक के जरिए मतदान की अनुमति है, या लोग अपने स्थानीय चुनाव कार्यालय में अपना मतपत्र पहले ही जमा करा सकते हैं। यह मुख्य रूप से उन लोगों के लिए है जिन्हें मतदान केंद्र तक पहुंचने में कठिनाई होती है या उन अमेरिकी नागरिकों के लिए है जो विदेश में हैं या सेना में सेवारत हैं।
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