फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   World ›   heritage site Saint Hilarion Monastery in Palestine gets UNESCO tag

UNESCO List: गाजा पट्टी पर बने सेंट हिलारियन मठ को विश्व विरासत स्थल का मिला दर्जा, जानिए क्या है खासियत

Fri, 26 Jul 2024 01:29 PM IST
बशु जैन न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: बशु जैन Updated Fri, 26 Jul 2024 01:29 PM IST
सार

दिल्ली में चल रहे विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र में एलान किया गया कि फलस्तीन का सेंट हिलारियन मठ/टेल उम्म आमेर गाजा पट्टी पर हो रहे हमलों के चलते विलुप्त हो रहा है। जबकि यह विश्व विरासत है। युद्ध को देखते हुए इस मठ को खतरे में विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है।

विज्ञापन
heritage site Saint Hilarion Monastery in Palestine gets UNESCO tag
गाजा में स्थित सेंट हिलारियन मठ। - फोटो : यूनेस्को

विस्तार

गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष के बीच यूनेस्को ने फलस्तीन स्थित सेंट हिलारियन मठ को विश्व विरासत स्थल का दर्जा दिया है। इसे टेल उम्म आमेर के नाम से भी जाना जाता है। इस्राइल-हमास युद्ध के चलते मठ की हालत बेहद खराब हो गई है। इसके चलते यूनेस्को ने इसे खतरे की सूची में भी शामिल किया है। 

विज्ञापन


दिल्ली में चल रहे विश्व धरोहर समिति के 46वें सत्र में एलान किया गया कि फलस्तीन का सेंट हिलारियन मठ/टेल उम्म आमेर गाजा पट्टी पर हो रहे हमलों के चलते विलुप्त हो रहा है। जबकि यह विश्व विरासत है। युद्ध को देखते हुए इस मठ को खतरे में विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। यूनेस्को की इस पहल का लेबनान, तुर्किये, कजाकिस्तान ने यूनेस्को की पहल का स्वागत किया है। 
विज्ञापन


फादर हिलारियन ने की थी स्थापना
फलस्तीन में गाजा पट्टी पर बना सेंट हिलारियन मठ एक ईसाई मठ है। इसकी स्थापना 340 ईस्वी में गाजा के मूल निवासी फादर हिलारियन ने की थी। हिलारियन ने अलेक्जेंड्रिया में पहले ईसाई धर्म अपनाया और बाद में सेंट एंथोनी से प्रेरित होकर पहले मिस्र और फिर गाजा में सन्यासी बन गए। इसके बाद उन्होंने अपने गांव थबाथा के पास एक आश्रम की स्थापना की। 
विज्ञापन
विज्ञापन


पांच चर्च बने हैं
बताया जाता है कि सेंट हिलारियन मठ के अवशेष चार शताब्दी से भी अधिक पुराने हैं। इसमें पांच चर्च, स्नान गृह और विशाल सेंचुरी है। साथ ही एक विशाल तहखाना भी है। मठ में मिट्टी की ईंटों से छोटे-छोटे आश्रम बने थे। यह अवशेष जल्द ही खत्म हो गए। सातवीं सदी गाजा में आए भूकंप के बाद यह मठ लुप्त हो गया। बाद में 1999 में पुरातत्वविदों ने इसकी खोज की। 

मठ को संरक्षण की जरूरत
गाजा पर्यटन मंत्रालय के मुताबिक सेंट हिलारियन मठ को संरक्षण की जरूरत है। 2012 में इसे विश्व निगरानी स्मारक की सूची में शामिल किया गया। वहीं मौजूदा समय में चल रहे युद्ध से भी मठ को काफी नुकसान पहुंचा है। दिसंबर 2023 में यूनेस्को ने मठ को अनंतिम उन्नत संरक्षण सूची में शामिल किया था।

मोरावियन चर्च बस्तियां भी विश्व विरासत सूची में शामिल

अमेरिका से मिले नामांकन के बाद ऐतिहासिक मोरावियन चर्च बस्तियों को भी यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल कर लिया गया। नई दिल्ली में चल रहे विश्व धरोहर समिति के 46 वें सत्र में इसकी घोषणा होने के बाद अमेरिका, जर्मनी और ब्रिटेन से आए जनप्रतिनिधियों से खुशी जताई। बताया जाता है कि डेनमार्क की मोरावियन चर्च बस्ती जो क्रिश्चियफील्ड से जुड़ी है, वह पहले से ही विश्व विरासत सूची में शामिल है। अब मोरावियन चर्च बस्ती की 18वीं शताब्दी में स्थापित बस्ती हेरनहट जमर्नी, बेथलहम यूएस और ग्रेसहिल ब्रिटेन को भी विश्व विरासत सूची में शामिल किया गया है। मोरावियन चर्च बस्ती का वास्तु शिल्प बेजोड़ है। यह स्थानीय हालातों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय मोरावियन समुदाय की खासियत को बयां करती है। यहां की परंपराएं मोरावियन संस्कृति को जीवंत रखती हैं। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed