Sri Lanks Crisis: श्रीलंका सरकार की माफी काफी नहीं, रूस ने लगाई कारोबार फिर शुरू करने के लिए शर्त
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने श्रीलंका की संसद में यह बताया कि उन्होंने एयरोफ्लोट विमान को उठे विवाद पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस मामले में श्रीलंका सरकार ने माफी मांग ली है। सिरिसेना ने बताया कि उनके पत्र लिखने के तीन दिन बाद ही उन्हें जवाब मिला...
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रूस से कारोबारी संबंध शुरू करने के लिए बेसब्र श्रीलंका के सामने रूस सरकार ने एक खास शर्त रख दी है। उसने यह दो टूक आश्वासन देने की मांग की है कि उसके एक विमान को जबर्दस्ती जमीन पर उतार कर, जिस तरह कानूनी कार्रवाई की गई, वैसा श्रीलंका सरकार भविष्य में नहीं करेगी। रूस की एयरलाइन एयरोफ्लोट के विमान को श्रीलंका ने कोलंबो से नहीं उड़ने दिया था। ऐसा आयरलैंड की कंपनी- सेलेस्टियल एवियेशन ट्रेडिंग-10 लिमिटेड के मालिक के अनुरोध पर किया गया था। इस एयरलाइन ने एक लीज संबंधी विवाद में एयरोफ्लोट के खिलाफ अदालती आदेश हासिल किया था।
श्रीलंका सरकार के सूत्रों ने मीडिया को बताया है कि एयरोफ्लोट विमान के साथ हुए व्यवहार से रूस सरकार बेहद खफा हुई थी। उसे लेकर रूस और श्रीलंका के संबंधों में कड़वाहट आई। अब श्रीलंका सरकार रूस से सस्ता तेल खरीदने के लिए बेताब है। उसमें वह विवाद आड़े आ रहा है।
माफी मांग चुकी है सरकार
श्रीलंका के पूर्व राष्ट्रपति मैत्रिपाला सिरिसेना ने श्रीलंका की संसद में यह बताया कि उन्होंने एयरोफ्लोट विमान को उठे विवाद पर रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को पत्र लिखा था। उसमें उन्होंने ध्यान दिलाया कि इस मामले में श्रीलंका सरकार ने माफी मांग ली है। सिरिसेना ने बताया कि उनके पत्र लिखने के तीन दिन बाद ही उन्हें जवाब मिला। उसमें रूसी राष्ट्रपति ने तीन खास बातें कही हैं। उन्होंने कहा है कि अगर इन तीन बातों पर श्रीलंका सरकार कदम उठाए, तो दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार और विमान सेवाएं फिर से शुरू हो सकती हैं। उनमें एक बात यह है कि भविष्य में फिर कभी एयरोफ्लोट जैसा मामला सामने आऩे पर श्रीलंका सरकार कानूनी कदम उठाने के बजाय कूटनीतिक माध्यमों से उसे हल करेगी।
सिरिसेना ने बताया कि उन्होंने रूसी राष्ट्रपति का पत्र राष्ट्रपति गोटबया राजपक्षे को भेज दिया है। इसके मुताबिक पुतिन ने कहा है कि दोनों पक्षों के बीच व्यापार में कोलंबो स्थित रूसी दूतावास की कोई भूमिका नहीं है। इस बारे में करार श्रीलंका और रूस की कंपनियों को आपस में करना होगा।
अदालत ने दिया था आदेश
सिरिसेना के इस बयान के बाद श्रीलंका में एयरोफ्लोट मामले को लेकर फिर से बहस छिड़ गई है। कुछ सरकारी अधिकारी इस बात से सहमत हैं कि सरकार को इस मामले को कूटनीतिक माध्यम से हल करना चाहिए था। जबकि कुछ दूसरे अधिकारियों के मुताबिक चूंकि इस मामले में कोर्ट ने आदेश जारी किया था, इसलिए जो कदम उठाया गया, वह सही था।
पिछले दो जून को श्रीलंका के पश्चिमी प्रांत के कॉमर्शियल हाई कोर्ट ने अपने आदेश के तहत एयरोफ्लोट के विमानों को श्रीलंका से उड़ने पर रोक लगा दी थी। आयरलैंड की कंपनी सेलेस्टियल एवियेशन ट्रेंडिग-10 लिमिटेड ने इस संबंध में याचिका दायर की थी। ये मामला तब हल हुआ, जब श्रीलंका की एक दूसरी अदालत ने पश्चिमी प्रांत के कॉमर्शियल हाई कोर्ट के आदेश पर रोक लगा दी। यह फैसला श्रीलंका के अटार्नी जनरल की तरफ से दायर याचिका पर आया। इसका यह मतलब निकाला गया कि श्रीलंका सरकार आरंभ से ही इस विवाद में पड़ने को इच्छुक नहीं थी। लेकिन कोर्ट के आदेश के कारण अधिकारियों ने कदम उठाया। अब रूस ने आश्वासन मांगा है कि भविष्य में ऐसा नहीं होगा।