{"_id":"66c8ae3f93a28743e70c1b03","slug":"have-concerns-but-bangladesh-close-to-our-hearts-says-indian-family-living-in-dhaka-for-16-years-2024-08-23","type":"story","status":"publish","title_hn":"Bangladesh: ढाका नहीं छोड़ना चाहता 16 साल से बसा भारतीय परिवार, कहा- बांग्लादेश हमारे दिल के करीब और घर जैसा","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
Bangladesh: ढाका नहीं छोड़ना चाहता 16 साल से बसा भारतीय परिवार, कहा- बांग्लादेश हमारे दिल के करीब और घर जैसा
Fri, 23 Aug 2024 09:52 PM IST
बशु जैन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ढाका
Published by: बशु जैन
Updated Fri, 23 Aug 2024 09:52 PM IST
सार
ढाका में रह रहीं भारतीय प्रवासी मीरा मेनन का कहना है कि केरल में रह रहीं उनकी मां सुरक्षा चिंता को लेकर उनसे देश छोड़ने को कह रही हैं।
विज्ञापन
बांग्लादेश में रह रहीं भारतीय प्रवासी मीरा मेनन।
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
बांग्लादेश में हुई हिंसा और भारतीय हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार को लेकर हर कोई चिंतित है। वहीं ढाका में 16 साल से रह रहा एक भारतीय परिवार बांग्लादेश छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। ढाका में रह रहीं भारतीय प्रवासी मीरा मेनन का कहना है कि केरल में उनकी मां सुरक्षा चिंता को लेकर उनसे देश छोड़ने को कह रही हैं, लेकिन उनको ढाका घर जैसा लगता है और इससे अलग होना आसान नहीं है।
विज्ञापन
केरल के त्रिशूर की निवासी मेनन अपने पति सुरेश और 14 साल की बेटी अवंतिका के साथ ढाका में रहती हैं। उनके पति ढाका में एक कंपनी में वरिष्ठ प्रबंधक के पद पर कार्यरत हैं। मेनन ने कहा कि हम छुट्टी मनाने के लिए केरल गए थे और चार अगस्त को वापस ढाका लौटे। ढाका में कर्फ्यू लगा था और हमें इसकी जानकारी नहीं थी। हमें नहीं पता था कि हालात इतने बदहाल हो जाएंगे। मेनन ने कहा कि हम जहां रहते हैं, वह विरोध प्रदर्शन से अछूता था। मगर रात में सुरक्षाकर्मी गश्त करते थे और सीटी की आवाज आती थी।
विज्ञापन
मेनन ढाका मलयाली एसोसिएशन (डीएमए) की अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा कि हर साल हम यहां अपने त्योहार मनाते हैं। हमने यहां 27 सितंबर को ओणम मनाने की योजना बनाई थी, लेकिन मौजूदा स्थिति को देखते हुए हमने कार्यक्रम रद्द कर दिया। उन्होंने कहा कि हमारी एसोसिएशन के कई सदस्य केरल या भारत के अन्य हिस्सों के लिए रवाना हो गए हैं। जबकि कुछ लोग भारत लौटने को लेकर असमंजस में हैं।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि कुछ लोगों ने अपने परिवारों को भारत में ही रखने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि केरल में मेरी मां हालचाल लेने के लिए हर दिन मुझे फोन करती हैं और हमें भारत वापस आने के लिए कहती हैं।
मेनन बताती हैं कि वह जब पहली बार बांग्लादेश आईं थी तो उनकी बेटी 10 महीने की थी। वह यहीं पली-बढ़ी है और यहां से जुड़ाव महसूस करती है। हम भी ऐसा ही महसूस करते हैं। ढाका पिछले 16 वर्षों से हमारा घर है। वह बताती हैं कि उनके पति खुद को शांत रखने के लिए समाचारों और सोशल मीडिया से मिलने वाली जानकारी से दूर रहने की कोशिश करते हैं।
मेनन ने कहा कि मौजूदा स्थिति सामान्य दिखती है, लेकिन कोई नहीं जानता कि कुछ हफ्तों या महीनों में क्या होने वाला है? स्कूल फिर से शुरू हो गए हैं, कार्यालय काम कर रहे हैं और सड़कें भी ठीक लग रही हैं। हम ढाका में पिछले 16 वर्षों से रह रहे हैं। एक तरह का जुड़ाव हो गया है। हम सब कुछ छोड़कर दूसरी जगह नहीं जा सकते।
मीरा मेनन की बेटी अवंतिका ने कहा कि मैंने यह घरेलू सहायिका और कार चालक (दोनों बांग्लादेशी) को सुनकर बांग्ला बोलना सीखा। जब हाल ही में वह केरल में थीं, तो उसकी नानी ने उससे भी भारत वापस आने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ढाका घर जैसा लगता है। केरल की यात्रा करना किसी जगह घूमने के लिये जाने जैसा लगता है।
बांग्लादेश में क्या हुआ
नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली को लेकर अपनी सरकार के खिलाफ अभूतपूर्व सरकार विरोधी छात्र नेतृत्व वाले विरोध प्रदर्शन के बाद पांच अगस्त को हसीना ने इस्तीफा दे दिया और भारत चली गईं। हसीना के नेतृत्व वाली सरकार को अंतरिम सरकार द्वारा प्रतिस्थापित किया गया और 84 वर्षीय नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस को इसका मुख्य सलाहकार नामित किया गया। बांग्लादेश में हसीना सरकार के पतन के बाद देश भर में भड़की हिंसा की घटनाओं में 230 से अधिक लोग मारे गए, सरकारी नौकरियों में विवादास्पद कोटा प्रणाली के खिलाफ छात्रों द्वारा बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू होने के बाद से मरने वालों की संख्या 600 से अधिक हो गई है।