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हमलों से दहला इराक, 107 की मौत
Updated Sat, 11 Aug 2012 04:28 PM IST
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इराक के लिए सोमवार का दिन काफी खूनखराबे वाला रहा, बम हमलों और गोलीबारी की घटनाओं में 107 लोगों की मौत हो गई। ज्यादातर शिया मुसलमानों को निशाना बनाया गया। लंबे समय बाद पहली बार ऐसा है जब एक ही दिन में सिलसिलेवार हमलों में इतने ज्यादा लोगों की मौत हुई। कम से कम 268 लोगों के घायल होने की खबर है। बगदाद से 20 किलोमीटर दूर शिया इलाके ताजी, किरकुक और मोसूल आदि जगहों पर हमलावरों ने हमलों को अंजाम दिया।
हमलों के चलते पुलिस सूत्रों ने सोमवार को खूनी दिन बताया। इराक के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने इन हमलों के लिए स्थानीय अल कायदा को जिम्मेदार ठहराया, इस संगठन में सुन्नी मुसलमानों का वर्चस्व है। अधिकारी ने कहा कि ये हमले इराक को साफ संदेश देते हैं कि अल कायदा देश में खूनी और सांप्रदायिक जंग भड़काना चाहता है, जो कुछ भी पड़ोसी देश सीरिया में हो रहा है उसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। पुलिस और सेना के सूत्रों के अनुसार बगदाद से 70 किलोमीटर दूर बंदूकधारियों ने सेना की धूलिया पोस्ट पर असॉल्ट राइफल और हैंड ग्रेनेड से हमले कर 16 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया।
बगदाद से 20 किलोमीटर उत्तर स्थित ताजी में हमलावरों ने एक कार बम विस्फोट समेत सात धमाके किए, यहां 32 लोग मारे गए और 62 घायल हो गए। इनमें कई पुलिसकर्मी भी हैं। शिया बाहुल्य सद्र शहर में सरकारी इमारत के नजदीक दो बम फटे, इनमें 21 लोग मारे गए और 73 घायल हुए। मोसूल में हुए धमाके में नौ लोग मारे गए, जिनमें छह सैनिक हैं। किरकुक में पांच कार बम धमाके हुए , छह लोग मारे गए, 17 घायल हो गए। दियाला में धमाकों और गोलीबारी में छह लोग मारे गए इनमें चार सैनिक शामिल हैं। अभी तक इराक से अमेरिका की वापसी के बाद पिछला महीना सबसे खूनखराबे वाला रहा था, हमलों में 237 लोग मारे गए थे और 603 घायल हुए थे।
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इराक का सुन्नी बहुलता वाला अनबार प्रांत सीरिया की सीमा पर स्थित है। सीरिया में सुन्नियों ने ही राष्ट्रपति बशर अल असद को पद से हटाने के लिए लड़ाई छेड़ रखी है। ऐसे में सीरिया से सुन्नी इराक में आकर हमलों को अंजाम दे सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता के अनुसार पिछले हफ्ते 80 बसों पर भरकर इराकी शरणार्थी सीमा पार करके देश लौटे हैं।
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हमलों के चलते पुलिस सूत्रों ने सोमवार को खूनी दिन बताया। इराक के वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारी ने इन हमलों के लिए स्थानीय अल कायदा को जिम्मेदार ठहराया, इस संगठन में सुन्नी मुसलमानों का वर्चस्व है। अधिकारी ने कहा कि ये हमले इराक को साफ संदेश देते हैं कि अल कायदा देश में खूनी और सांप्रदायिक जंग भड़काना चाहता है, जो कुछ भी पड़ोसी देश सीरिया में हो रहा है उसे गंभीरता से लिए जाने की जरूरत है। पुलिस और सेना के सूत्रों के अनुसार बगदाद से 70 किलोमीटर दूर बंदूकधारियों ने सेना की धूलिया पोस्ट पर असॉल्ट राइफल और हैंड ग्रेनेड से हमले कर 16 सैनिकों को मौत के घाट उतार दिया।
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बगदाद से 20 किलोमीटर उत्तर स्थित ताजी में हमलावरों ने एक कार बम विस्फोट समेत सात धमाके किए, यहां 32 लोग मारे गए और 62 घायल हो गए। इनमें कई पुलिसकर्मी भी हैं। शिया बाहुल्य सद्र शहर में सरकारी इमारत के नजदीक दो बम फटे, इनमें 21 लोग मारे गए और 73 घायल हुए। मोसूल में हुए धमाके में नौ लोग मारे गए, जिनमें छह सैनिक हैं। किरकुक में पांच कार बम धमाके हुए , छह लोग मारे गए, 17 घायल हो गए। दियाला में धमाकों और गोलीबारी में छह लोग मारे गए इनमें चार सैनिक शामिल हैं। अभी तक इराक से अमेरिका की वापसी के बाद पिछला महीना सबसे खूनखराबे वाला रहा था, हमलों में 237 लोग मारे गए थे और 603 घायल हुए थे।
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इराक का सुन्नी बहुलता वाला अनबार प्रांत सीरिया की सीमा पर स्थित है। सीरिया में सुन्नियों ने ही राष्ट्रपति बशर अल असद को पद से हटाने के लिए लड़ाई छेड़ रखी है। ऐसे में सीरिया से सुन्नी इराक में आकर हमलों को अंजाम दे सकते हैं। संयुक्त राष्ट्र के प्रवक्ता के अनुसार पिछले हफ्ते 80 बसों पर भरकर इराकी शरणार्थी सीमा पार करके देश लौटे हैं।