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अमेरिका में पाक सिंधियों की आवाज बनीं गुलालाई इस्माइल, दुनिया को बता रहीं सच्चाई

Sun, 29 Sep 2019 09:01 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: Sneha Baluni Updated Sun, 29 Sep 2019 09:01 AM IST
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Gulalai Ismail is hope for oppressed minorities, leads anti pakistan protest against imran khan
गुलालाई इस्माइल (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

पाकिस्तानी महिला गुलालाई इस्माइल एक मानवाधिकार कार्यकर्ता हैं जो किसी तरह अपने देश से भागकर अमेरिका पहुंच गई हैं। वह अमेरिका से राजनीतिक शरण चाहती हैं। वह यूएस में अल्पसंख्यक पर होने वाले अत्याचार का नया चेहरा बन गई हैं। शुक्रवार की सुबह इस्माइल न्यूयॉर्क की व्यस्त सड़कों पर पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर होने वाले अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाती हुई दिखाई दीं। 

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गुलालाई एक महीने पहले ही अमेरिका पहुंची हैं। वह यहां आकर बता रही हैं कि कैसे पाकिस्तान में अल्पसंख्यक दशकों से अत्याचार सहन कर रहे हैं। जिस समय इमरान संयुक्त राष्ट्र महासभा में भाषण दे रहे थे उस समय इस्माइल मुहाजिर, पश्तून, बलोच, सिंधी और अन्य अल्पसंख्यकों के साथ मिलकर बाहर प्रदर्शन कर रही थीं।
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प्रदर्शनकारियों के हाथों में प्लाकार्ड थे और वह नारे लगा रहे थे। जिसमें लिखा था- नो मोर ब्लैंक चेक फॉर पाकिस्तान (पाकिस्तान को अब और पैसे नहीं दिए जाने चाहिए) और पाकिस्तान आर्मी स्टॉप मेडलिंग इन पॉलिटिक्स (पाकिस्तानी सेना को राजनीति में दखल देना बंद करना चाहिए)।
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न्यूयॉर्क में इमरान खान के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए इस्माइल ने कहा, 'बेगुनाह पश्तूनों को पाकिस्तान में आतंकवाद का उन्मूलन करने के नाम पर मारा जा रहा है। पाकिस्तानी सेना की जेलों में हजारों लोग कैद हैं। हमारी मांग है कि पकिस्तानी सेना द्वारा किए जाने वाले मानवाधिकार उल्लंघन को तुरंत खत्म किया जाए।' 

गुलाई पर पाकिस्तान ने राजद्रोह का आरोप लगाया था जिसके बाद उन्हें देश छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ा था। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तान को उन लोगों को रिहा करना चाहिए जिन्हें जेलों में बंद रखा गया है। यदि हम उनके खिलाफ आवाज उठाते हैं तो हमपर आतंकवाद का आरोप लगाया जाता है। पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान द्वारा खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में एक तानाशाही शासन चलता है।'


इस्माइल ने कहा कि उन्हें अपने परिवार और उस अंडरग्राउंड नेटवर्क की चिंता है जिसके कारण वह पाकिस्तान से भागने में सफल रहीं। उन्होंने कहा, 'पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान ने मेरी आवाज दबाने के लिए हर हथियार का इस्तेमाल किया। उन्होंने मेरे परिवार पर दबाव बनाया ताकि वह मेरे खिलाफ खड़े हो सकें। हालांकि इसके बावजूद मेरा पूरा परिवार मेरे साथ खड़ा है। मुझे प्रताड़ित करने के लिए उन्होंने मेरे माता-पिता पर झूठे आरोप लगाए हैं।' 

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