लोकतंत्र से तानाशाही की ओर दुनिया?: ट्रंप के दावों पर मैक्रों की दो टूक, बोले- वैश्विक कानून को कुचला जा रहा
ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात और टैरिफ की धमकियों ने अमेरिका-फ्रांस रिश्तों में तनाव बढ़ा दिया है। राष्ट्रपति मैक्रों ने ट्रंप की व्यापार नीतियों को यूरोप को दबाने की साजिश बताया। उन्होंने चेताया कि दुनिया लोकतंत्र से तानाशाही की ओर बढ़ रही है, जहां अंतरराष्ट्रीय कानून की अनदेखी हो रही है। मैक्रों के बयान से सवाल यह खड़ा हो रहा है कि क्या वैश्विक व्यवस्थाएं टूट रही है?क्या ताकतवर देश ही नियम तय करेंगे?
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विस्तार
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तरफ से ग्रीनलैंड पर कब्जे की बात ने एक तरफ जहां वैश्विक राजनीति में तहलका मचा दिया है। वहीं दूसरी ओर इन विवादों के चलते फ्रांस और अमेरिका भी खुलकर आमने-सामने आता हुआ दिख रहा है। पहले जहां ट्रंप की ओर से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का निजी संदेश को सार्वजनिक किया गया और भारी-भरकम टैरिफ की धमकी दी गई। वहीं अब फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने भी ट्रंप पर दो टूक अंदाज में तीखा हमला बोला है।
मैक्रों ने मंगलवार को अमेरिका की व्यापार नीतियों पर कड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अमेरिका की तरफ से टैरिफ (शुल्क) लगाने की धमकियां सीधे तौर पर यूरोप को कमजोर करने और उसे दबाव में लाने की कोशिश हैं। मैक्रों ने इशारों-इशारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस बयान का भी जिक्र किया, जिसमें ग्रीनलैंड को अपने अधीन करने की बात कही गई थी।
लोकतंत्र से तानाशाही की ओर दुनिया?
इसके साथ ही मैक्रों ने चेतावनी दी कि दुनिया धीरे-धीरे लोकतंत्र से हटकर तानाशाही की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि साल 2024 में दुनिया भर में 60 से ज्यादा युद्ध हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि मैंने सुना है कि इनमें से कुछ युद्ध सुलझा लिए गए हैं, जो ट्रंप के उस दावे की ओर इशारा था, जिसमें उन्होंने कई युद्ध खत्म कराने की बात कही थी। मैक्रों ने कहा कि अब संघर्ष सामान्य बात बनते जा रहे हैं और खतरे नए-नए क्षेत्रों तक फैल रहे हैं, जैसे अंतरिक्ष, सूचना, साइबर, डिजिटल और व्यापार।
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अंतरराष्ट्रीय कानून को कुचला जा रहा- मैक्रों
उन्होंने कहा कि दुनिया ऐसे दौर की ओर बढ़ रही है जहां अंतरराष्ट्रीय कानून को कुचला जा रहा है और ताकतवर की ही चल रही है। उनके मुताबिक, साम्राज्यवादी सोच फिर से उभर रही है। मैक्रों ने रूस-यूक्रेन युद्ध का उदाहरण देते हुए कहा कि यह युद्ध अब चौथे साल में प्रवेश करने वाला है। इसके अलावा मध्य पूर्व और अफ्रीका में चल रहे संघर्ष भी इस बात का सबूत हैं कि वैश्विक स्तर पर सामूहिक शासन और बहुपक्षीय व्यवस्था कमजोर पड़ रही है।
मैक्रों ने इन बातों पर जताई चिंता
मैक्रों ने यह बातें स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) के 56वें वार्षिक सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। इस दौरान उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया इस समय गंभीर अस्थिरता के दौर से गुजर रही है। मैक्रों ने सुरक्षा, रक्षा और अर्थव्यवस्था, तीनों क्षेत्रों में बढ़ते असंतुलन पर चिंता भी जताई। मैक्रों ने कहा कि हम ऐसे समय में प्रवेश कर चुके हैं जहां अस्थिरता और असंतुलन साफ दिख रहा है। अगर सामूहिक वैश्विक शासन नहीं होगा, तो सहयोग की जगह बेरहम प्रतिस्पर्धा ले लेगी।
मैक्रों का बयान और ट्रंप की सख्ती, पूरा मामला समझिए
- फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने डावोस में अमेरिका की व्यापार नीतियों पर कड़ा हमला बोला।
- मैक्रों ने कहा कि अमेरिका टैरिफ की धमकी देकर यूरोप को कमजोर और अपने अधीन करने की कोशिश कर रहा है।
- उन्होंने इशारों में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ग्रीनलैंड को लेकर दिए गए बयान पर भी नाराजगी जताई।
- मैक्रों के मुताबिक दुनिया इस समय सुरक्षा, रक्षा और अर्थव्यवस्था- तीनों मोर्चों पर अस्थिरता से गुजर रही है।
- उन्होंने चेतावनी दी कि अगर वैश्विक सहयोग नहीं हुआ तो सहयोग की जगह बेरहम प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- मैक्रों ने कहा कि दुनिया धीरे-धीरे लोकतंत्र से हटकर तानाशाही की ओर बढ़ रही है।
- उन्होंने बताया कि साल 2024 में दुनिया भर में 60 से ज्यादा युद्ध हुए, जो अब तक का सबसे बड़ा आंकड़ा है।
- मैक्रों ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर हो रहा है और अब ताकतवर देशों की मनमानी चल रही है।
- इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने यूरोप के कई देशों पर टैरिफ लगाने की धमकी दी, जिसमें फ्रांस भी शामिल है।
- ट्रंप ने यहां तक कहा कि फ्रांस की वाइन और शैंपेन पर 200 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया जा सकता है।
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अमेरिका की व्यापार नीति पर सवाल
इस दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि अमेरिका अपने व्यापार समझौतों के जरिए यूरोप के हितों को नुकसान पहुंचा रहा है, ज्यादा से ज्यादा रियायतें मांग रहा है और लगातार नए टैरिफ थोप रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसी नीतियां पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं, खासकर तब जब टैरिफ का इस्तेमाल किसी देश की क्षेत्रीय संप्रभुता पर दबाव बनाने के लिए किया जाए।
गौरतलब है कि मैक्रों के बयान ऐसे समय आए हैं, जब अमेरिका ने फ्रांस समेत यूरोप के आठ देशों को चेतावनी दी है कि अगर वे ग्रीनलैंड को बेचने पर सहमत नहीं हुए, तो उन पर भारी टैरिफ लगाए जाएंगे। इतना ही नहीं, ट्रंप ने मीडिया से बातचीत में यह भी कहा कि अगर मैक्रों ने गाजा के लिए बनाए गए 'बोर्ड ऑफ पीस' में शामिल होने से इनकार किया, तो वह फ्रांस से आने वाली वाइन और शैंपेन पर 200% टैरिफ लगा देंगे। ट्रंप ने मैक्रों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि कोई उसे नहीं चाहता, क्योंकि वह बहुत जल्द सत्ता से बाहर होने वाला है।
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