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China Bank Crisis: सरकार की नीतियों से चीन में खड़ा हुआ गंभीर बैंकिंग संकट, शेयर के दाम में भी भारी गिरावट
Sun, 16 Jul 2023 02:35 PM IST
शक्तिराज सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: शक्तिराज सिंह
Updated Sun, 16 Jul 2023 02:35 PM IST
सार
इंडस्ट्रियल एंड कॉर्शियल बैंक ऑफ चाइना के शेयरों में 15.1 प्रतिशत और एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना के शेयरों के भाव में 15.6 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। बैंक ऑफ चाइना के शेयरों के भाव में 12.7 प्रतिशत और चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक के शेयरों की कीमत में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
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bank of china
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विस्तार
चीन सरकार देश के बड़े बैंकों पर दबाव डाल रही है कि वे अपने मुनाफे में कटौती करें। उन पर स्थानीय सरकारों को अधिक कर्ज देने के लिए दबाव डाला जा रहा है। इससे देश में गंभीर बैंकिंग संकट खड़ा होने का अंदेशा गहरा गया है। चीन की स्थानीय सरकारें गंभीर आर्थिक संकट में फंसी हुई हैं।
अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के सरकारी बैंक अब स्थानीय सरकारों को अधिक लंबी अवधि पर मैच्योर होने वाले कर्ज दे रहे हैं। आम तौर पर चलन दस साल में कर्ज की मैच्योरिटी का रहा है। यानी इस अवधि के अंदर ऋण चुकाना पड़ता है। लेकिन अब सरकारी बैंक 25 साल में मैच्योर होने वाले कर्ज स्थानीय सरकारों को दे रहे हैं। कुछ कर्ज तो इस रूप में दिए गए हैं, जिनमें पहले चार साल में कोई ब्याज नहीं लगेगा या पहले चार साल में मुख्य राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) को चुकाने की कोई देनदारी तय नहीं होगी।
ब्लूमबर्ग ने यह रिपोर्ट बीते चार जुलाई को दी थी। उसके बाद से चीन के बैंकिंग सेक्टर में भारी उथल-पुथल देखी गई है। इस बीच इंडस्ट्रियल एंड कॉर्शियल बैंक ऑफ चाइना के शेयरों में 15.1 प्रतिशत और एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना के शेयरों के भाव में 15.6 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। बैंक ऑफ चाइना के शेयरों के भाव में 12.7 प्रतिशत और चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक के शेयरों की कीमत में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
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विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा लगता है कि केंद्रीय सरकार ने स्थानीय सरकारों की कर्ज समस्या को बड़े बैंकों को ट्रांसफर कर देने की नीति अपना ली है। वह उन पर अधिक कर्ज देने का दबाव बना कर उनके ऋण खाते पर दबाव बढ़ा रही है। सरकारी दबाव के कारण सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने पिछले महीने स्थानीय सरकारों को 3.05 ट्रिलियन युवान का नया कर्ज दिया। बैंक ने यह जानकारी 11 जुलाई को सार्वजनिक की।
वेबसाइट शंघाई सिक्युरिटीज न्यूज के मुताबिक ऐसी संभावना है कि सरकार अभी इस नीति को और तेजी से आगे बढ़ाएगी। सरकार ने इसनीति को ‘स्थिर और स्वस्थ विकास’ नाम दिया है। इसके तहत संकटग्रस्त रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देने की कोशिश भी की जा रही है।
ग्लोल्डेन क्रेडिट रेटिंग कंपनी में विश्लेषक वांग चिंग ने कहा है कि नई नीति के तहत सरकार कुछ और कदम उठा सकती है। उनमें जायदाद की खरीद और गिरवी संबंधी नियमों में ढील देना और हाउजिंग लोन के लिए ब्याज दरों में कटौती शामिल है।
इस बीच पिछले पांच जुलाई को अमेरिकी गोल्डमैन शैक्स ने चीन के बैंकों के बारे में एक रिपोर्ट जारी की, जिससे यहां चिंता और बढ़ गई है। गोल्डमैन शैक्स ने उस रिपोर्ट में बताया कि उसने पांच चीनी ऋणदाता संस्थाओं की रेटिंग गिरा दी है। लेकिन इस रिपोर्ट पर चीनी मीडिया ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। चाइना मर्चेंट्स बैंक के प्रवक्ता ने कहा है- गोल्डमैन शैक्स की रिपोर्ट से कुछ निवेशकों में चिंता पैदा हुई है। प्रवक्ता ने शंघाई सिक्युरिटीज न्यूज से बातचीत में दावा किया- गोल्डमैन शैक्स ने 2022 के आंकड़ों का इस्तेमाल किया है। नई स्थिति पर बिना ध्यान दिए वह निष्कर्ष पर पहुंच गया।
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अमेरिकी मीडिया ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के सरकारी बैंक अब स्थानीय सरकारों को अधिक लंबी अवधि पर मैच्योर होने वाले कर्ज दे रहे हैं। आम तौर पर चलन दस साल में कर्ज की मैच्योरिटी का रहा है। यानी इस अवधि के अंदर ऋण चुकाना पड़ता है। लेकिन अब सरकारी बैंक 25 साल में मैच्योर होने वाले कर्ज स्थानीय सरकारों को दे रहे हैं। कुछ कर्ज तो इस रूप में दिए गए हैं, जिनमें पहले चार साल में कोई ब्याज नहीं लगेगा या पहले चार साल में मुख्य राशि (प्रिंसिपल अमाउंट) को चुकाने की कोई देनदारी तय नहीं होगी।
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ब्लूमबर्ग ने यह रिपोर्ट बीते चार जुलाई को दी थी। उसके बाद से चीन के बैंकिंग सेक्टर में भारी उथल-पुथल देखी गई है। इस बीच इंडस्ट्रियल एंड कॉर्शियल बैंक ऑफ चाइना के शेयरों में 15.1 प्रतिशत और एग्रीकल्चरल बैंक ऑफ चाइना के शेयरों के भाव में 15.6 प्रतिशत की गिरावट आ चुकी है। बैंक ऑफ चाइना के शेयरों के भाव में 12.7 प्रतिशत और चाइना कंस्ट्रक्शन बैंक के शेयरों की कीमत में 14 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई है।
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विश्लेषकों के मुताबिक ऐसा लगता है कि केंद्रीय सरकार ने स्थानीय सरकारों की कर्ज समस्या को बड़े बैंकों को ट्रांसफर कर देने की नीति अपना ली है। वह उन पर अधिक कर्ज देने का दबाव बना कर उनके ऋण खाते पर दबाव बढ़ा रही है। सरकारी दबाव के कारण सेंट्रल बैंक- पीपुल्स बैंक ऑफ चाइना ने पिछले महीने स्थानीय सरकारों को 3.05 ट्रिलियन युवान का नया कर्ज दिया। बैंक ने यह जानकारी 11 जुलाई को सार्वजनिक की।
वेबसाइट शंघाई सिक्युरिटीज न्यूज के मुताबिक ऐसी संभावना है कि सरकार अभी इस नीति को और तेजी से आगे बढ़ाएगी। सरकार ने इसनीति को ‘स्थिर और स्वस्थ विकास’ नाम दिया है। इसके तहत संकटग्रस्त रियल एस्टेट सेक्टर को राहत देने की कोशिश भी की जा रही है।
ग्लोल्डेन क्रेडिट रेटिंग कंपनी में विश्लेषक वांग चिंग ने कहा है कि नई नीति के तहत सरकार कुछ और कदम उठा सकती है। उनमें जायदाद की खरीद और गिरवी संबंधी नियमों में ढील देना और हाउजिंग लोन के लिए ब्याज दरों में कटौती शामिल है।
इस बीच पिछले पांच जुलाई को अमेरिकी गोल्डमैन शैक्स ने चीन के बैंकों के बारे में एक रिपोर्ट जारी की, जिससे यहां चिंता और बढ़ गई है। गोल्डमैन शैक्स ने उस रिपोर्ट में बताया कि उसने पांच चीनी ऋणदाता संस्थाओं की रेटिंग गिरा दी है। लेकिन इस रिपोर्ट पर चीनी मीडिया ने कड़ी प्रतिक्रिया जताई है। चाइना मर्चेंट्स बैंक के प्रवक्ता ने कहा है- गोल्डमैन शैक्स की रिपोर्ट से कुछ निवेशकों में चिंता पैदा हुई है। प्रवक्ता ने शंघाई सिक्युरिटीज न्यूज से बातचीत में दावा किया- गोल्डमैन शैक्स ने 2022 के आंकड़ों का इस्तेमाल किया है। नई स्थिति पर बिना ध्यान दिए वह निष्कर्ष पर पहुंच गया।