{"_id":"5f87609a6b1ca7498f3f2517","slug":"government-debt-will-be-90-percent-of-gdp-after-30-years-imf-said-expense-increases-in-epidemic-decrease-in-tax-collection-will-increase-ratio","type":"story","status":"publish","title_hn":"30 साल बाद जीडीपी का 90 फीसदी होगा सरकारी कर्ज, आईएमएफ ने कहा-महामारी में खर्च बढ़ने, कर संग्रह घटने से बढ़ेगा अनुपात","category":{"title":"World","title_hn":"दुनिया","slug":"world"}}
30 साल बाद जीडीपी का 90 फीसदी होगा सरकारी कर्ज, आईएमएफ ने कहा-महामारी में खर्च बढ़ने, कर संग्रह घटने से बढ़ेगा अनुपात
Thu, 15 Oct 2020 02:03 AM IST
देव कश्यप
एजेंसी, वाशिंगटन
एजेंसी, वाशिंगटन
Published by: देव कश्यप
Updated Thu, 15 Oct 2020 02:03 AM IST
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर
- फोटो : Social Media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कोविड-19 महामारी के कारण खर्च बढ़ने की वजह से सरकारी कर्ज अनुपात 30 साल बाद बढ़कर जीडीपी का 90 फीसदी पहुंच जाएगा। यह अनुपात 1991 से उल्लेखनीय रूप से 70 फीसदी पर स्थिर है।
विज्ञापन
अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के राजकोषीय मामले विभाग के निदेशक विटोर गैस्पर ने बुधवार को कहा कि 'हमारा अनुमान है कि महामारी के दौरान खर्च बढ़ने, कर संग्रह में कमी और आर्थिक गतिविधियों में गिरावट से सरकारी कर्ज अनुपात 17 फीसदी अंक बढ़कर करीब 90 फीसदी पर पहुंच जाएगा। हालांकि, 2025 से इस अनुपात में धीरे-धीरे कमी आएगी।'
विज्ञापन
भारत की राजकोषीय स्थिति के आकलन से जुड़े सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि 'भारत में सरकारी कर्ज का तरीका वैश्विक मानदंडों के अनुसार है। 1991 के आर्थिक उदारीकरण सुधारों के बाद से भारत दुनिया में विकास का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। 1991 से 2019 के बीच वास्तविक जीडीपी की विकास दर औसतन 6.5 फीसदी रही। इस दौरान प्रति व्यक्ति वास्तविक जीडीपी चार गुना बढ़ी है, जिससे लाखों लोगों को अत्यधिक गरीबी से बाहर निकलने में मदद मिली।'
विज्ञापन
कोरोना से उबरने को नकद सहायता और कर छूट दे भारत
आईएमएफ के शोध विभाग के प्रभाग प्रमुख मल्हार श्याम नबार का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था को भयानक कोविड-19 संकट से उबारने के लिए सरकार को लोगों को हाथ में सीधे पैसे देने के साथ कर छूट जैसे कदम उठाने चाहिए। राजकोषीय और मौद्रिक उपायों के साथ संरचनात्मक उपाय भी करने होंगे। आईएमएफ और वर्ल्ड बैंक की सालाना बैठक में उन्होंने कहा कि 'अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए भारत को महामारी से प्रभावित परिवारों और कंपनियों को मदद देनी होगी। प्रत्यक्ष खर्च एवं कर छूट पर अधिक जोर देने के साथ नकदी समर्थन, ऋण गारंटी जैसे उपायों पर कम भरोसा करना होगा।' हालांकि, ये अर्थव्यवस्था में ऋण प्रावधान बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण हैं और इन उपायों पर अधिक जोर भी दिया गया।
बांग्लादेश से 0.6 फीसदी कम हो सकती है प्रति व्यक्ति जीडीपी
आईएमएफ के मुताबिक, इस कैलेंडर साल में भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी बांग्लादेश से 0.58 फीसदी कम हो सकती है। जनवरी-दिसंबर के दौरान बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति जीडीपी चार फीसदी बढ़कर 1,888 डॉलर (1,38,346.13 रुपये) हो सकती है, जबकि भारत में यह 10.5 फीसदी घटकर 1,877 डॉलर (1,37,540.08 रुपये) रह सकती है। हालांकि, 2021 में भारत पड़ोसी देश से आगे निकल जाएगा। इस दौरान भारत की प्रति व्यक्ति जीडीपी 8.2 फीसदी बढ़कर 2,030 डॉलर पहुंच सकती है, जबकि बांग्लादेश की 5.4 फीसदी बढ़कर 1,990 डॉलर रह सकती है।