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गूगल, उबर, अमेजन और फेसबुक के इंडियन टेकीज ने नागरिकता कानून के खिलाफ लिखा खुला खत
Fri, 27 Dec 2019 09:02 PM IST
अमित मंडल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
Published by: अमित मंडल
Updated Fri, 27 Dec 2019 09:02 PM IST
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नागरिकता कानून का विरोध
- फोटो : PTI
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गूगल, उबर, अमेजन और फेसबुक जैसी कंपनियों में काम करने वाले भारतीय और भारतीय मूल के पेशेवरों ने खुला खत लिखकर आरोप लगाया है कि नागरिकता कानून और एनआरसी फासीवादी है। इन लोगों ने सुंदर पिचाई, मुकेश अंबानी और सत्या नाडेला को खत लिखकर अनुरोध किया है कि वे भारत सरकार के इस फासीवादी कदम को सार्वजनिक तौर पर इसे नकारें। इस खत को टेकअगेंस्टफासिज्म नाम दिया गया है।
पेशेवरों ने सुंदर पिचाई, सत्य नाडेला और मुकेश अंबानी जैसे दिग्गजों को पत्र लिखकर भारत सरकार के इस ‘फासीवादी कदम’ के खिलाफ रुख अपनाने और सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करने का आग्रह किया है।
ऑनलाइन प्रकाशन प्लेटफार्म मीडियम पर ‘फासीवाद के खिलाफ प्रौद्योगिकीविद्’ शीर्षक से डाले गये पत्र में नेताओं से सरकार के निर्देश पर इंटरनेट बंद करने से इनकार करने और यह सुनिश्चित करने को अनुरोध किया गया है कि सामग्री को संतुलित करने का काम ऐसा न हो कि उसमें सरकार की ओर झुकाव हो।
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पेशेवरों ने यह पत्र ऐसे समय लिखा है जब देश भर में हजारों की संख्या में भारतीय संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी की योजना का विरोध कर रहे हैं। कुछ विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ के उग्र होने पर पुलिस कार्रवाई में 20 लोगों की मौत हो गई है जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
पत्र में लिखा गया है- हम प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े इंजीनियर, शोधकर्ता और डिजाइनर फासीवादी भारत सरकार और प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर हो रही बर्बर कार्रवाई की पुरजोर निंदा करते हैं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य प्रायोजित बर्बर कार्रवाई तत्काल रोकी जानी चाहिए।
इन कर्मचारियों ने यह भी लिखा है कि ये विचार उनके खुद के हैं और उनके नियोक्ताओं से इसका कोई लेना-देना नहीं है। इन कर्मचारियों का दावा है कि ये सैन फ्रांसिस्को, सिएटल, लंदन, इस्राइल और बेंगलुरू जैसे जगहों पर काम कर रहे हैं। पत्र के अनुसार, सीएए और एनआरसी मुस्लिम विरोधी है और इससे मुसलमानों के खिलाफ असामानता बढ़ेगी।
नागरिकता कानून मानवीय: अमेरिकी बांग्लादेशी संगठन
वहीं, बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों और संगठनों के एक समूह ने संशोधित नागरिकता कानून को मानवीय बताते हुए कहा है कि इसके माध्यम से भारत ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लाखों गैर-मुसलमानों के प्रति अपने कर्तव्य को आंशिक रूप से पूरा किया है। इनमें बांग्लादेश माइनॉरिटी कोलिजन (अमेरिका) और दूसरे संगठन शामिल हैं।
अमेरिकी थिंक टैंक ने जताई चिंता
उधर, अमेरिकी कांग्रेस की एक रिसर्च यूनिट और अमेरिकी थिंक टैंक कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार की एनआरसी की योजना को सीएए के साथ लाने से भारत के लगभग 20 करोड़ मुस्लिम अल्पसंख्यकों का दर्जा प्रभावित हो सकता है।
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पेशेवरों ने सुंदर पिचाई, सत्य नाडेला और मुकेश अंबानी जैसे दिग्गजों को पत्र लिखकर भारत सरकार के इस ‘फासीवादी कदम’ के खिलाफ रुख अपनाने और सार्वजनिक रूप से इसकी निंदा करने का आग्रह किया है।
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ऑनलाइन प्रकाशन प्लेटफार्म मीडियम पर ‘फासीवाद के खिलाफ प्रौद्योगिकीविद्’ शीर्षक से डाले गये पत्र में नेताओं से सरकार के निर्देश पर इंटरनेट बंद करने से इनकार करने और यह सुनिश्चित करने को अनुरोध किया गया है कि सामग्री को संतुलित करने का काम ऐसा न हो कि उसमें सरकार की ओर झुकाव हो।
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पेशेवरों ने यह पत्र ऐसे समय लिखा है जब देश भर में हजारों की संख्या में भारतीय संशोधित नागरिकता कानून और राष्ट्रीय नागरिक पंजी की योजना का विरोध कर रहे हैं। कुछ विरोध प्रदर्शन के दौरान भीड़ के उग्र होने पर पुलिस कार्रवाई में 20 लोगों की मौत हो गई है जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
पत्र में लिखा गया है- हम प्रौद्योगिकी उद्योग से जुड़े इंजीनियर, शोधकर्ता और डिजाइनर फासीवादी भारत सरकार और प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर हो रही बर्बर कार्रवाई की पुरजोर निंदा करते हैं। प्रदर्शनकारियों के खिलाफ राज्य प्रायोजित बर्बर कार्रवाई तत्काल रोकी जानी चाहिए।
इन कर्मचारियों ने यह भी लिखा है कि ये विचार उनके खुद के हैं और उनके नियोक्ताओं से इसका कोई लेना-देना नहीं है। इन कर्मचारियों का दावा है कि ये सैन फ्रांसिस्को, सिएटल, लंदन, इस्राइल और बेंगलुरू जैसे जगहों पर काम कर रहे हैं। पत्र के अनुसार, सीएए और एनआरसी मुस्लिम विरोधी है और इससे मुसलमानों के खिलाफ असामानता बढ़ेगी।
नागरिकता कानून मानवीय: अमेरिकी बांग्लादेशी संगठन
वहीं, बांग्लादेश के धार्मिक अल्पसंख्यकों का प्रतिनिधित्व करने वाले लोगों और संगठनों के एक समूह ने संशोधित नागरिकता कानून को मानवीय बताते हुए कहा है कि इसके माध्यम से भारत ने बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के लाखों गैर-मुसलमानों के प्रति अपने कर्तव्य को आंशिक रूप से पूरा किया है। इनमें बांग्लादेश माइनॉरिटी कोलिजन (अमेरिका) और दूसरे संगठन शामिल हैं।
अमेरिकी थिंक टैंक ने जताई चिंता
उधर, अमेरिकी कांग्रेस की एक रिसर्च यूनिट और अमेरिकी थिंक टैंक कांग्रेशनल रिसर्च सर्विस (सीआरएस) की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत सरकार की एनआरसी की योजना को सीएए के साथ लाने से भारत के लगभग 20 करोड़ मुस्लिम अल्पसंख्यकों का दर्जा प्रभावित हो सकता है।