Nigeria: लागोस में बोले जयशंकर- वैश्वीकरण को हथियार बनाया गया, कुछ लोग दूसरों को अवसर नहीं देना चाहते
S Jaishankar: नाइजीरियन इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनेशनल अफेयर्स में आयोजित एक कार्यक्रम में डॉ. एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक दक्षिण मानसिकता, एकजुटता और आत्मनिर्भरता के बारे में है।
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जयशंकर ने कहा, 1945 वाली विश्व व्यवस्था अब भी कायम है। कुछ लोग अपने नियंत्रण को खोना नहीं चाहते। ये लोग दूसरों के लिए अधिक अवसर भी नहीं देना चाहते। जयशंकर ने कहा, जब मैंने वैश्वीकरण के केंद्रीयकरण के बारे में बात की तो उससे एक अलग चुनौती उभर कर सामने आई कि कैसे वैश्वीकरण को ही हथियार बना दिया गया है। आज मुद्रा एक हथियार है, व्यापार एक हथियार है, पर्यटन एक हथियार है। जो प्रमुख खिलाड़ी हैं वे इनके जरिये हावी हो सकते हैं। यह एक चुनौती है, जिसे हम अच्छी तरह से जानते हैं। यह एक विश्व व्यवस्था है, जिसे 1945 में तैयार किया गया था।
उन्होंने कहा, संयुक्त राष्ट्र के सदस्य उस वक्त आज की तुलना में लगभग 25 प्रतिशत थे। यह विश्व व्यवस्था अब भी हठपूर्वक जारी है, क्योंकि जो लोग ड्राइविंग सीट पर हैं वे अधिक सीटें नहीं बनाना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि आज वैश्विक एजेंडा कई मायनों में दुनिया को उसकी प्राकृतिक विविधता को बहाल करने के बारे में है। जयशंकर ने प्राकृतिक विविधता को बहाल करने को सामूहिक उद्देश्य बताया और इस प्रक्रिया में दुनिया के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डाला।
वैश्विक दक्षिण का मतलब मानसिकता, एकजुटता और आत्मनिर्भरता
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि वैश्विक दक्षिण (ग्लोबल साउथ) एक मानसिकता है। यह एक तरह से एकजुटता और आत्मनिर्भरता है। 'भारत और वैश्विक दक्षिण' को संबोधित करते हुए विदेशमंत्री ने कहा, आज का वैश्विक एजेंडा पुनर्संतुलन और बहुध्रुवीयता को बढ़ावा देना है। जिससे दुनिया अपनी कुदरती विविधता को जारी रख सके। जयशंकर ने कहा कि अर्थव्यवस्था के केंद्रीकरण से वर्चस्व की समकालीन चुनौतियां पैदा होती हैं। वैश्विक दक्षिण मानसिकता, एकजुटता और आत्मनिर्भरता के बारे है।
अमेरिका के तीन वर्ष का कैशलेस लेनदेन भारत एक माह में करता है...
युगांडा से नाइजीरिया पहुंचे विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि अमेरिका जितना कैशलेस लेनदेन तीन वर्ष में करता है, उतना भारत एक माह में करता है। भारतीय समुदाय से चर्चा के दौरान जयशंकर ने कहा, प्रत्येक भारतीय नागरिक का जीवन आसान हो गया है और इसका कारण यह है कि हमने प्रौद्योगिकी को बहुत गहराई से अपनाया है।
भारत दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था
जयशंकर ने कहा, आज हम दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाली बड़ी अर्थव्यवस्था हैं। आज, यदि आप भारत में आर्थिक गतिविधि देखते हैं, हर जगह कुछ न कुछ बन रहा है। मेट्रो बन रही है, सड़क बन रही है, नए हवाई अड्डे बन रहे हैं, नई रेलगाड़ियां आ रही हैं, रेलवे स्टेशन बन रहे हैं। गांवों में पाइप से पानी आ रहा है, बिजली कनेक्शन आ रहा है। विदेश मंत्री ने भारत के कोविड-19 से निपटने के तरीके की भी सराहना की।