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Ghibli Explained: क्या है घिबली, सोशल मीडिया के नए ट्रेंड के बाद क्यों हो रही AI से कॉपीराइट पर खतरे की बात?

Mon, 31 Mar 2025 02:58 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 31 Mar 2025 02:58 PM IST
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सार
यह घिबली आर्ट है क्या? इसकी शुरुआत कहां से हुई? चैटजीपीटी ने इसे वायरल ट्रेंड कैसे बनाया? कौन-कौन इस फीचर का इस्तेमाल कर सकता है? जापान के एक स्टूडियो की आर्ट को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बार-बार बनाना कानूनी हद तक कितना सही है? घिबली की शुरुआत करने वाले कलाकारों का इस पर क्या कहना है? और इस आर्ट को लेकर एआई की पहुंच के बारे में क्या चर्चाएं हैं? आइये जानते हैं...
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Ghibli Art OpenAI ChatGPT Copyright Infringement Claim Hayao Miyazaki AI Studio Japan Animation Social Media
भारत में भी लोकप्रिय हुई घिबली आर्ट। - फोटो : ChatGPT

विस्तार

दुनियाभर में सोशल मीडिया पर इस वक्त जो एक चीज हर प्रोफाइल पर दिख रही है, वह है घिबली आर्ट। एक्स से लेकर इंस्टाग्राम और फेसबुक तक लोग लगातार एआई के जरिए अपनी और सेलिब्रिटीज की कार्टून नुमा तस्वीरों को देखते और इनका इस्तेमाल करते दिख रहे हैं। इन सबके बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की पहुंच और इसके खतरों को लेकर भी चर्चाएं शुरू हो गई है। दरअसल, जापान की कॉमिक बुक्स और कार्टून शो के लिए इस्तेमाल होने वाली जिस घिबली आर्ट को बनाने में एक जमाने में कई दिनों से लेकर महीनों का समय लग जाता था, अब एआई ने उन्हें कुछ ही सेकंड्स या मिनट्स में बनाना शुरू कर दिया है। 


ऐसे में सवाल यह है कि आखिर यह घिबली आर्ट है क्या? इसकी शुरुआत कहां से हुई? चैटजीपीटी ने इसे वायरल ट्रेंड कैसे बनाया? कौन-कौन इस फीचर का इस्तेमाल कर सकता है? जापान के एक स्टूडियो की आर्ट को अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के जरिए बार-बार बनाना कानूनी हद तक कितना सही है? घिबली की शुरुआत करने वाले कलाकारों का इस पर क्या कहना है? और इस आर्ट को लेकर एआई की पहुंच के बारे में क्या चर्चाएं हैं? आइये जानते हैं...


लोगों को इतनी पसंद क्यों आ रही घिबली स्टाइल तस्वीरें?
घिबली तस्वीरों की खास बात यह है कि इसके कैरेक्टर हाथ से बनाए जाते थे। इनमें हमेशा हल्के पेस्टल रंगों का इस्तेमाल होता था और इन्हें तड़क भड़क से दूर ही दिखाया गया। घिबली आर्ट के विश्लेषकों का कहना है कि घिबली की सादगी और शांति ही लोगों को अपनी ओर खींचती है। ऐसे में कुछ ही वर्षों के अंदर इस स्टूडियो ने करोड़ों लोगों को अपना फैन बना लिया है। 

चैटजीपीटी ने इसे वायरल ट्रेंड कैसे बनाया?
चैटजीपीटी ने बीते मंगलवार को अपना बिल्ट-इन इमेज जेनरेशन फीचर शुरू किया। ओपनएआई के जीपीटी-4o टूल ने एआई चैटबॉट को घिबली स्टाइल की तस्वीरें प्रॉसेस करने के फीचर से जोड़ दिया। नतीजा यह रहा कि एआई ने ऐसी फोटोज बनाना शुरू कर दिया, जो कि जापानी एनिमेटर हयाओ मियाजाकी की हाथ से बनाई हुई आर्ट जैसी ही लगती थीं। इसके चलते बुधवार तक घिबली इमेज पूरी दुनिया में वायरल होना शुरू हो गईं। 

चौंकाने वाली बात यह है कि यूजर्स के निर्देशों और उसके आधार पर तस्वीरों को घिबली स्टाइल में तैयार करने की चैटजीपीटी की क्षमता ने इसे बाकी चैटबॉट से अलग खड़ा कर दिया। जहां मेटा एआई और एक्स का ग्रोक अभी भी घिबली स्टाइल तस्वीरों में मियाजाकी की तस्वीरों जैसी डिटेल्स नहीं ला पाए हैं, वहीं चैटजीपीटी का यह स्पेशल फीचर देखते ही देखते वायरल हो रहा है। 

प्रोफाइल फोटोज से लेकर बॉलीवुड फिल्म और बहुत कुछ, सब घिबली में बदला?
घिबली आर्ट लोगों को किस कदर पसंद आई हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया में बॉलीवुड फिल्मों से लेकर सेलिब्रिटीज, लोगों की अपनी प्रोफाइल पिक्चर्स, निजी यादों की तस्वीरों से लेकर खेल के दृश्यों तक सब कुछ घिबली के अंदाज में बदल चुका है। 2024 के पेरिस ओलंपिक से लेकर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और एलन मस्क तक, सबसे घिबली स्वरूप दुनिया में आ चुके हैं। 

घिबली बनाने के लिए चैटजीपीटी पर अभी भी होड़ मची है। कुछ यूजर्स ने पहले एक्स (X) पर पोस्ट कर बताया था कि घिबली वर्जन इमेज चैटजीपीटी के प्रीमियम वर्जन में बनाया जा सकता है। हालांकि, बाद में कई यूजर्स ने पाया कि यह फ्री वर्जन में काम कर रहा है। इसके बाद चैटजीपीटी यूजर्स के बीच तस्वीरों को घिबली में बदलने की होड़ लग गई। इसी बीच सैम अल्टमैन ने X पर ट्वीट कर बताया कि उनके जीपीयू 'पिघल' रहे हैं। दरअसल, चैटजीपीटी जैसे चैटबॉट कमांड से तस्वीरों को क्रिएट करने के लिए ग्राफिकल प्रोसेसिंग यूनिट, यानी GPU का इस्तेमाल करते हैं। ट्रेंड के बढ़ने से इनके GPU में दबाव बढ़ता है और ये ओवरहीट होने लगते हैं, जिससे प्रोसेसिंग धीमी हो जाती है। ऐसे में GPU को नुकसान से बचाने के लिए कुछ प्रोसेसिंग को रोकना या सीमित करना पड़ता है।

सैम अल्टमैन ने पोस्टा किया- "यह देखना बहुत मजेदार है कि लोग चैटजीपीटी की बनाई तस्वीरों को पसंद कर रहे हैं। लेकिन हमारे जीपीयू पिघल रहे हैं। हम इसे और अधिक कुशल बनाने पर काम करते हुए अस्थायी रूप से कुछ दर सीमाएं लागू करने जा रहे हैं। उम्मीद है कि इसमें ज़्यादा समय नहीं लगेगा! चैटजीपीटी फ्री टियर को जल्द ही प्रतिदिन 3 जनरेशन मिलेंगी।" 

हालांकि, उनके इस पोस्ट पर शायद ही किसी का ध्यान गया हो, क्योंकि शनिवार-रविवार को चैटजीपीटी पर घिबली बनाने वालों की इतनी संख्या जुड़ी कि प्लेटफॉर्म क्रैश कर गया। इसके बाद ऑल्टमैन ने पोस्ट कर कहा कि क्या आप सब प्लीज इमेज जनरेट करना थोड़ा कम कर सकते हैं? हमारी टीम को नींद चाहिए!

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कैसे बना सकते हैं घिबली इमेज?
चैटजीपीटी अपने लेटेस्ट मॉडल GPT-4o का इस्तेमाल कर रहा है। घिबली इमेज जनरेशन इसी मॉडल से संभव हो पाया है। इसका सबसे रोचक पहलू यह है कि यह Studio Ghibli की प्रसिद्ध कार्टून शैली को बखूबी दोहरा सकता है। आप भी आसानी के घिबली इमेज जनरेट कर सकते हैं...


 

घिबली वायरल हुई तो इसके कॉपीराइट से जुड़ा मसला क्या है?
जैसे-जैसे घिबली तस्वीरें दुनिया में वायरल हुई हैं। वैसे ही इसे लेकर विवाद की भी शुरुआत हुई है। सबसे बड़ा विवाद है एआई की पहुंच को लेकर। दरअसल, सोशल मीडिया पर विवाद है कि कैसे एआई कलाकारों के रचनात्मक कार्यों को कुछ ही क्षणों में कॉपी कर लेता है। वह भी इसके लिए उन्हें जरूरी श्रेय और आर्थिक मुआवजा दिए बिना। 

चैटजीपीटी पर घिबली आर्ट बनाने को लेकर कॉपीराइट का विवाद इन्हीं चर्चाओं के बाद शुरू हुआ है। खुद चैटजीपीटी ने भी प्रीमियम सेवा का इस्तेमाल न करने वाले कई यूजर्स को यह संदेश दिया कि वह कॉपीराइट के अंतर्गत आने वाले एनिमेशन स्टूडियो की तरह की तस्वीरें नहीं बना सकता, क्योंकि उसकी आर्ट स्टाइल सुरक्षा मानकों में आती है। इसके बावजूद कुछ ही घंटों बाद चैटजीपीटी पर लोगों ने फिर से घिबली तस्वीरें बनाना जारी रखा। 

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि ओपनएआई जो कर रहा है, वह न तो कानूनी तौर पर सही है और न ही कानूनों का पूरी तरह उल्लंघन है। यानी घिबली इमेज बनाना बीच के ग्रे जोन में आता है। अमेरिका की लॉ फर्म नील एंड मैक्डेविट के इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी मामलों के वकील इवान ब्राउन के मुताबिक, घिबली आर्ट स्टाइल को कॉपीराइट कानून के तहत सुरक्षित नहीं किया गया है। इसके सिर्फ कैरेक्टर्स और कहानियां सुरक्षित हो सकती हैं। यानी ओपनएआई सिर्फ ऐसी तस्वीरें बनाकर कोई कानून नहीं तोड़ रहा है। 

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हालांकि, ब्राउन ने साफ किया कि हो सकता है कि ओपनएआई ने अपने मॉडल को जापानी स्टूडियो की रचनात्मक तस्वीरों के आधार पर ही ट्रेनिंग दी हो। यानी उसके जैसी ही तस्वीरें बनाने का कमांड। इससे एक सवाल यह उठता है कि अगर आप हमारा काम सीधे तौर पर कॉपी नहीं कर सकते तो उसके जैसा ही काम तैयार करना शुरू कर दो। उन्होंने बताया कि कई अदालतें अब इस बात पर विचार कर रही हैं कि क्या एआई डेवलपर्स अपने मॉडल्स को प्रशिक्षित करने के लिए कॉपीराइट किए हुए काम का इस्तेमाल कर सकते हैं।  

इस बीच आर्टिस्ट कार्ला ओर्टिज, जिन्होंने एआई तस्वीरें बनाने वाले मॉडल्स को कॉपीराइट के मामलों में कोर्ट में घसीटा है, ने घिबली आर्ट को लेकर कहा कि यह साफ है कि ओपनएआई जैसी कंपनियां अब कला के क्षेत्र से जुड़े लोगों के काम और इसके जरिए अपना गुजारा चलाने वाले लोगों की चिंता नहीं करता। उन्होंने कहा कि ओपनएआई घिबली का नाम और उसके ब्रांड का इस्तेमाल अपने मॉडल को आगे बढ़ाने के लिए कर रहा है, जो कि कॉपीराइट का सीधा उल्लंघन है। 
 

एआई के घिबली बनाने पर क्या सोचते हैं इसके संस्थापक?
एआई से घिबली तस्वीरें बनाने के आलोचकों ने एक्स पर हयाओ मियाजाकी के कुछ पुराने वीडियो पोस्ट किए हैं। इनमें घिबली आर्ट के फाउंडर ने एक बार एआई जनरेटेड तस्वीरों को लेकर बेहद कड़ी आलोचना की थी और इसे जीवन का अपमान बताया था। खबरों के मुताबिक यह वीडियो 2016 का है जिसमें वह एआई की आलोचना करते हुए कह रहे हैं कि यह ‘जीवन का अपमान’ (Insult to Life Itself) है और इस तरह के कंटेंट को देखकर उन्हें कोई दिलचस्पी नहीं होती।

मियाजाकी कहते हैं, “मैं इस तरह की चीजें देखकर रोमांचित नहीं हो सकता। इसे बनाने वाले लोग दर्द की भावना को नहीं समझते। मैं इसे लेकर बेहद निराश हूं और कभी भी अपनी कला में इस तकनीक को अपनाना नहीं चाहूंगा। मेरे हिसाब से यह जीवन का अपमान है।” 

वह मानते हैं कि कला का असली सार तभी झलकता है जब इंसान अपने अनुभवों, दर्द, खुशी और संवेदनाओं को चित्रों और कहानियों में उतारता है। लेकिन एआई आधारित एनीमेशन इस गहराई से कोसों दूर है।
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