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संयुक्त राष्ट्र महासचिव बोले- कोविड-19 से निपटने की कोशिशों में महिलाओं पर मुख्य रूप से ध्यान दें

Sat, 11 Apr 2020 09:19 AM IST
Sneha Baluni वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: Sneha Baluni Updated Sat, 11 Apr 2020 09:19 AM IST
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General Antonio Guterres urge govts to put women girls at centre of their efforts to recover from covid-19
एंतोनियो गुटेरेश (फाइल फोटो) - फोटो : Instagram

संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने दुनियाभर की सरकारों से अपील की कि वे कोविड-19 से निपटने के अपने प्रयासों के केंद्र में महिलाओं एवं लड़कियों को रखें और उन पर विशेष ध्यान दें। उन्होंने आशंका जताई कि लैंगिक समानता और महिला अधिकारों की रक्षा की दिशा में पिछले कई दशकों में जो थोड़ी-बहुत प्रगति हुई, वह इस महामारी के कारण खतरे में है।

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गुटेरेश ने कहा कि मैं सरकारों से आग्रह करता हूं कि कोविड-19 से उबरने के अपने प्रयासों के केंद्र में महिलाओं और लड़कियों को रखें। जिसकी शुरुआत महिलाओं को नेता, समान प्रतिनिधित्व और निर्णय लेने की शक्ति के साथ होती है। कैश ट्रांसफर से लेकर क्रेडिट और लोन तक, अर्थव्यवस्था को बचाने और प्रोत्साहित करने के उपाय, महिलाओं को लेकर लक्षित होने चाहिए।
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महासचिव ने कहा कि अवैतनिक देखभाल कार्य को अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान के रूप में मान्यता दी जानी चाहिए। उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि कैसे नई बीमारी पहले से मौजूद असमानताओं को और गहरा कर रही है, जिससे महिलाओं और लड़कियों के जीवन पर इसका प्रभाव बढ़ रहा है।

यह महामारी ऐसे समय पर फैली है जब दुनिया महिलाओं के अधिकारों और लैंगिक समानता पर कार्रवाई के लिए ऐतिहासिक बीजिंग प्लेटफॉर्म की 25वीं वर्षगांठ मना रही है। दुनिया के लगभग हर देश में कोरोना संक्रमितों के मामले सामने आए हैं। अब तक इसकी वजह से 16 लाख 21 हजार 348 लोग संक्रमित हैं और एक लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। इस महामारी की शुरुआत पिछले साल चीन से हुई थी।


वायरस से जहां लगभग सभी लोग प्रभावित हैं, वहीं संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने महिलाओं और लड़कियों पर महामारी के विनाशकारी परिणामों को उजागर किया, जिसमें स्वास्थ्य और अर्थव्यवस्था से लेकर सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा तक हर क्षेत्र शामिल हैं। दुनिया भर में लगभग 60 प्रतिशत महिलाएं अनौपचारिक अर्थव्यवस्था में काम करती हैं, कम पैसे कमाती हैं, कम बचत करती हैं और उनके गरीबी में जाने का खतरा अधिक है।

गुटेरेश ने कहा कि बाजार गिरने और व्यापार के बंद होने से लाखों महिलाओं की नौकरियां चली गई हैं। ऐसे समय में वे वैतनिक रोजगार खो रही हैं। स्कूल बंद होने और वृद्ध लोगों की बढ़ती जरूरतों के कारण महिलाओं के अवैतनिक देखभाल के काम में तेजी से वृद्धि हो रही है।

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