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UN: बिना वीटो के भी स्थायी सदस्यता को तैयार G4 देश? UNSC विस्तार को लेकर संयुक्त राष्ट्र में रखा अहम प्रस्ताव

Wed, 20 May 2026 02:40 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, न्यूयॉर्क Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 20 May 2026 02:40 AM IST
सार

United Nations Security Council: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में सुधारों को लेकर भारत सहित जी4 देशों (ब्राजील, जर्मनी, जापान) ने अहम प्रस्ताव रखा। जी4 ने स्पष्ट किया है कि स्थायी सदस्यों की कोई उप-श्रेणी नहीं हो सकती। प्रस्ताव दिया गया है कि नए स्थायी सदस्य 15 साल की समीक्षा अवधि तक वीटो पावर का इस्तेमाल नहीं करेंगे, ताकि परिषद के विस्तार की प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके।
 

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G4 Nations Ready for Permanent Membership Without Veto Power Key Proposal Submit at UN Regard UNSC Expansion
यूएन सुरक्षा परिषद में बदलाव पर भारत सहित जी4 देशों ने क्या प्रस्ताव दिया? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में सुधारों की मांग काफी समय से चल रही है। इसी कड़ी में भारत सहित जी4 देशों ने एक बहुत ही बड़ा और अहम प्रस्ताव दुनिया के सामने रखा है। भारत, ब्राजील, जर्मनी और जापान (जी4 देशों) ने सुरक्षा परिषद में बदलाव को लागू करने के लिए एक रास्ता सुझाया है। इस गुट ने साफ तौर पर कहा है कि सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यों की श्रेणी के भीतर कोई और उप-श्रेणी (सब-कैटेगरी) बिल्कुल नहीं बनाई जा सकती है। यह बयान दुनिया भर की राजनीति और संयुक्त राष्ट्र के भविष्य के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। बदलाव की इस मुहिम में भारत एक प्रमुख और मजबूत आवाज बनकर उभरा है।

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जी4 देश चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में जो नए देश स्थायी सदस्य बनें, उन्हें भी पुराने सदस्यों के बराबर ही अधिकार और शक्तियां मिलें। हालांकि, बातचीत को आगे बढ़ाने और आम सहमति बनाने के लिए जी4 देशों ने एक बड़ा समझौता भी पेश किया है। इस प्रस्ताव के तहत, विस्तारित सुरक्षा परिषद में शामिल होने वाले नए स्थायी सदस्य शुरुआत में 15 साल तक 'वीटो' पावर (विशेषाधिकार) का इस्तेमाल नहीं करेंगे। वीटो पावर के इस्तेमाल पर अंतिम फैसला 15 साल की एक लंबी समीक्षा (रिव्यू) अवधि के बाद लिया जाएगा। यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि सुधार की रुकी हुई प्रक्रिया बिना किसी विवाद के तेजी से आगे बढ़ सके और कोई देश इसमें अड़ंगा न लगाए।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत ने जी4 की तरफ से क्या कड़ा संदेश दिया?
संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि, राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने जी4 देशों की तरफ से यह महत्वपूर्ण बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को सुरक्षा परिषद सुधारों पर अंतर-सरकारी वार्ता (आईजीएन) की बैठक में इस गुट का पक्ष बहुत ही मजबूती के साथ रखा। भारतीय राजदूत ने कहा कि दुनिया ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में वास्तविक सुधार के लिए बहुत लंबा इंतजार किया है और अब हम इसके गंभीर परिणाम भुगत रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह मौजूदा चर्चा आईजीएन प्रक्रिया की समग्र समीक्षा करने के लिए एक बहुत अच्छा मंच है। इसके जरिए अब तक हुई प्रगति का निष्पक्ष मूल्यांकन किया जा सकता है।

नए स्थायी सदस्यों के अधिकार और वीटो पावर पर क्या है नया प्रस्ताव?
राजदूत हरीश पर्वथानेनी ने वीटो के सवाल पर जी4 समूह के लचीलेपन को दोहराते हुए कहा कि स्थायी श्रेणी के भीतर किसी भी तरह की कोई उप-श्रेणी नहीं हो सकती है। जी4 गुट का स्पष्ट और अटल रुख यह है कि जो भी नए देश स्थायी सदस्य बनेंगे, उनकी जिम्मेदारियां और दायित्व भी बिल्कुल वैसे ही होने चाहिए, जैसे अभी मौजूद स्थायी सदस्यों के हैं। रचनात्मक बातचीत को बढ़ावा देने और अपना खुलापन दिखाने के लिए जी4 ने यह खास प्रस्ताव रखा है कि नए स्थायी सदस्य 15 साल की समीक्षा पूरी होने तक वीटो का प्रयोग नहीं करेंगे। यह प्रस्ताव संयुक्त राष्ट्र में एक नई बहस को जन्म दे रहा है।


जी4 मॉडल के तहत सुरक्षा परिषद का नया स्वरूप कैसा होगा?
जी4 देशों ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के विस्तार का जो मॉडल पेश किया है, वह बहुत ही स्पष्ट और सुलझा हुआ है। भारत का हमेशा से मानना रहा है कि मौजूदा यूएनएससी संरचना पुराने समय की है और यह आज की भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को बिल्कुल नहीं दर्शाती है। जी4 मॉडल के तहत सुरक्षा परिषद के सदस्यों की संख्या मौजूदा 15 से बढ़ाकर 25 या 26 करने का प्रस्ताव है। इसमें 11 स्थायी सदस्य और 14 या 15 गैर-स्थायी सदस्य होंगे। राजदूत ने कहा कि एक समेकित मॉडल केवल चर्चा का शुरुआती बिंदु होता है। यह कोई अंतिम बिंदु नहीं है जिसे आम सहमति के नाम पर थोपा जाए। बातचीत लिखित पाठ (टेक्स्ट) के आधार पर ही होनी चाहिए।

वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की क्या स्थिति है?
वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र के इस सबसे शक्तिशाली अंग में केवल पांच वीटो-प्राप्त स्थायी सदस्य हैं, जिनमें चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका शामिल हैं। ट्रंप मौजूदा अमेरिका के राष्ट्रपति हैं। बाकी 10 सदस्यों को गैर-स्थायी सदस्यों के रूप में दो साल के कार्यकाल के लिए चुना जाता है। भारत ने आखिरी बार 2021-22 में गैर-स्थायी सदस्य के रूप में काम किया था। जी4 ने जोर देकर कहा है कि अगर जल्द ही पाठ-आधारित बातचीत शुरू नहीं हुई, तो सुधारों में कोई भी वास्तविक प्रगति नहीं हो पाएगी। समूह ने कहा कि चर्चा से पहले हाइब्रिड विचारों को थोपना 'गाड़ी को घोड़े के आगे रखने' जैसा होगा।

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