जी 20 इंडोनेशिया 2022 : यूक्रेन संघर्ष पर चिंता... एटमी हमले की रूसी धमकी पर जताई नाराजगी
जी-20 की तरफ से जारी घोषणापत्र में कहा गया कि बैठक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई है। यूक्रेन में युद्ध जारी है और इसके प्रभाव यूरोप से परे भी महसूस किए जा रहे हैं। कई सदस्य देशों का मानना था कि जी-20 को अपने मूल एजेंडे पर ध्यान देना चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
यूक्रेन पर रूस के हमलों को लेकर दुनिया की चिंता जी-20 शिखर सम्मेलन के घोषणापत्र का केंद्र बिंदु के रूप में सामने आई है। समूह ने बुधवार को सर्वसम्मति से घोषणापत्र पारित करके इस युद्ध के कारण वैश्विक अर्थव्यवस्था और अनाज आपूर्ति के लिए उत्पन्न संकट पर चिंता जताई है। सम्मेलन के अंत में जारी बयान में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की परमाणु हमले की धमकियों पर भी सख्त नाराजगी जताई गई है।
समूह ने घोषित किया कि परमाणु हथियारों के उपयोग या इस्तेमाल की धमकी हर हाल में अस्वीकार्य है। यूक्रेन पर आठ माह से भी ज्यादा समये से जारी हमलों के दौरान रूसी राष्ट्रपति परमाणु विकल्प खुले रहने की धमकी देते रहे हैं। बयान के मुताबिक, यूक्रेन के खिलाफ अवैध, अनुचित और अकारण युद्ध वैश्विक आर्थिक सुधारों को बाधित कर रहा है। इसके मुताबिक, सदस्यों का मत है कि यूक्रेन युद्ध भारी मानवीय पीड़ा का कारण है, जिसने वैश्विक अर्थव्यवस्था में मौजूदा समस्याओं को गहरा दिया है। इससे विकास बाधित हुआ, मुद्रास्फीति में वृद्धि हुई और ऊर्जा व खाद्य असुरक्षा बढ़ी।
नेताओं ने पौधे लगाए...
बैठक के बाद पीएम मोदी, बाइडन व इंडोनेशियाई राष्ट्रपति जोको विडोडो समेत सभी विश्व नेताओं ने जलवायु परिवर्तन के खिलाफ संघर्ष के प्रतीक स्वरूप पौधारोपण किया।
जंग का असर यूरोप से बाहर भी हो रहा महसूस, कुछ देशों ने प्रतिबंधों पर भी चिंता जताई
जी-20 की तरफ से जारी घोषणापत्र में कहा गया कि बैठक चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में हुई है। यूक्रेन में युद्ध जारी है और इसके प्रभाव यूरोप से परे भी महसूस किए जा रहे हैं। कई सदस्य देशों का मानना था कि जी-20 को अपने मूल एजेंडे पर ध्यान देना चाहिए। यह सुनिश्चित करना चाहिए कि चर्चा आर्थिक प्रभावों पर केंद्रित हो तथा एक व्यापक व संतुलित दृष्टिकोण अपनाया जाए। साथ ही समूह के कुछ सदस्य देशों ने रूस पर अमेरिका समेत पश्चिमी देशों की तरफ से लगाए जा रहे प्रतिबंधों के आर्थिक परिणामों को लेकर भी चिंता जाहिर की। समूह ने आशंका जताई कि मौजूदा स्थिति जारी रहने से खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
- इससे पहले शिखर सम्मेलन में उस वक्त बाधा पड़ी, जब मंगलवार को यूक्रेन से लगते पोलैंड के एक इलाके में मिसाइल गिरने से दो लोगों की मौत हो गई।
- जल्द ही साफ हो गया कि संभवतः यह मिसाइल रूस की तरफ से नहीं दागी गई थी। अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने भी मिसाइल हमले में रूसी हाथ की संभावना नकार दी। इससे सम्मेलन में एक और तनाव की स्थिति टल गई।
भारत के प्रयासों से हो सकी आम सहमति
भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर बयान पर आम सहमति बनाने में अहम और महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। भारत ने बयान का मसौदा बनाने में सभी देशों के साथ साझेदारी में काम किया। भारत सकारात्मक और रचनात्मक दृष्टिकोण से आम सहमति बनाने वाले नेतृत्वकर्ता के रूप में उभरा है।
- पुतिन व यूक्रेनी राष्ट्रपति जेलेंस्की से मोदी कई बार बात कर चुके हैं। भारत ने यूक्रेन पर रूसी हमले की निंदा नहीं की है और इस रुख पर कायम है कि कूटनीति और बातचीत के माध्यम से संकट का समाधान किया जाना चाहिए।
समूह में सिमटी है दुनिया की 80 फीसदी जीडीपी
यूरोपीय संघ समेत 20 सदस्य मिलकर दुनिया के सकल घरेलू उत्पाद का 80 फीसदी, अंतरराष्ट्रीय व्यापार का 75 फीसदी और इसकी आबादी का 60 फीसदी हिस्सा बनाते हैं।
युद्ध...पश्चिमी देशों व रूस ने एक-दूसरे पर जमकर लगाए आरोप
जी-20 के अधिकतर देश यूक्रेन पर रूस हमले की निंदा करने पर सहमत थे, लेकिन समूह के ही सदस्य रूस ने अपने ऊपर इन हमलों पर विरोध दर्ज कराया। यूक्रेन पर रूस के आक्रमण की निंदा करने वाले पश्चिमी देशों के समूह का जी-20 शिखर सम्मेलन में दबदबा रहा। युद्ध को लेकर पश्चिमी देशों व रूस ने एक-दूसरे पर जमकर आरोप लगाए। हालांकि, कम से कम तीन राजनयिकों ने स्वीकार किया कि यूक्रेन संकट को लेकर और प्रतिबंधों पर भिन्न विचारों के बावजूद घोषणापत्र को सर्वसम्मति से पारित किया गया।
- पश्चिमी देशों ने पुतिन पर परमाणु हथियारों के उपयोग को लेकर गैर-जिम्मेदाराना बयान देने का आरोप लगाया। रूस ने भी अमेरिका और यूरोपीय देशों पर भड़काऊ बयानबाजी का आरोप मढ़ा। मेजबान इंडोनेशिया ने मुद्रास्फीति, भुखमरी और ऊर्जा की ऊंची कीमतों जैसी समस्याओं पर ध्यान केंद्रित करने का अनुरोध किया। वैसे उसने भी कहा कि यूक्रेन युद्ध की वजह से स्थितियां बदतर हो गई हैं।
वैश्विक अर्थव्यवस्था चौपट
ज्यादातर देशों ने कहा, हमले ने वैश्विक अर्थव्यवस्था चौपट कर दी है। हालात फिर शीतयुद्ध युग के जैसे हो गए हैं। रूस ने पश्चिमी देशों पर शिखर सम्मेलन के राजनीतिकरण का आरोप लगाया। रूसी विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने कहा, यूक्रेन में पश्चिमी देश हाइब्रिड युद्ध चला रहे हैं। लावरोव ने पुतिन की जगह अपने देश का प्रतिनिधित्व किया। मंगलवार को लावरोव के लौटने पर वित्त मंत्री एंटोन सिलुआनोव ने रूसी दल की कमान संभाली।
व्यापार-सुरक्षा संबंध बढ़ाने पर सुनक से की चर्चा, दोनों ने रणनीतिक साझेदारी और ‘रोडमैप 2030’ की प्रगति पर जताया संतोष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ऋषि सुनक ने बुधवार को बैठक की। बैठक के बाद प्रधानमंत्री मोदी ने ट्वीट किया, हमने व्यावसायिक संबंधों, भारत के रक्षा सुधारों के संदर्भ में सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। सुनक ने कहा, हिंद-प्रशांत क्षेत्र हमारी सुरक्षा और समृद्ध के लिए दिन पर दिन महत्वपूर्ण होता जा रहा है। यह गतिशील और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं से भरा हुआ है। अगले दशक को इससे परिभाषित किया जाएगा, इस क्षेत्र में क्या हो रहा है।
भारतीय मूल के सुनक की ब्रिटेन के पीएम बनने के बाद मोदी से पहली द्विपक्षीय बैठक थी। विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि दोनों नेताओं ने भारत-ब्रिटेन के व्यापक रणनीतिक साझेदारी की स्थिति और दोनों देशों के संबंधों को और आगे ले जाने वाले ‘रोडमैप 2030’की प्रगति पर भी संतोष जताया। दोनों देशों के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर भी बातचीत हो रही है।
सिंगापुर एक्ट ईस्ट नीति का अहम स्तंभ
पीएम नरेंद्र मोदी ने बुधवार को सिंगापुर के पीएम ली सीन लूंग से मुलाकात की और कहा कि सिंगापुर भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति का एक अहम स्तंभ है। मोदी ने ट्वीट किया, ली से हरित अर्थव्यवस्था, अक्षय ऊर्जा, फिनटेक और व्यापार संबंधों जैसे क्षेत्रों में भारत-सिंगापुर सहयोग के अवसरों को बढ़ाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि सिंगापुर भारत की एक्ट ईस्ट नीति का एक अहम स्तंभ है। एक्ट ईस्ट नीति एशिया-प्रशांत क्षेत्र में भारत के विस्तारित पड़ोस पर केंद्रित है। विदेश मंत्रालय ने बताया, दोनों ने वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रम पर भी विचार साझा किए।
मैक्रों-शोल्ज समेत कई राष्ट्र शासन प्रमुखों से मिले मोदी
मोदी की फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर ओलाफ शोल्ज, ऑस्ट्रेलियाई पीएम एंथोनी अल्बनीज और इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलनी समेत कई राष्ट्र और शासन प्रमुखों से भी रक्षा और आर्थिक क्षेत्र में संबंधों को बढ़ावा देने पर चर्चा हुई। पीएम ने ट्वीट किया, शोल्ज से आर्थिक संबंधों, रक्षा सहयोग और अन्य मुद्दों पर चर्चा की। मोदी ने बताया, इटली की पीएम जॉर्जिया मेलनी से ऊर्जा, रक्षा, संस्कृति और जलवायु परिवर्तन के मुद्दे पर सहयोग पर बात हुई।
मोदी ने दिए गुजराती-हिमाचली लोककलाओं से जुड़े तोहफे, सुनक को माता नी पछेड़ी, बाइडन को कांगड़ा पेंटिंग
पीएम नरेंद्र मोदी राष्ट्र और शासन प्रमुखों के लिए भारतीय लोककला से जुड़े तोहफे भी ले गये। ये गुजराती और हिमाचली कलाकृतियों के उत्कृष्ट नमूने हैं।
ऋषि के लिए देवी
मोदी ने ब्रिटेन के भारतीय मूल के पहले पीएम ऋषि सुनक को गुजराती कलाकृति ‘माता नी पछेड़ी’ गिफ्ट की। इसके गुजराती नाम में ‘माता’ यानी ‘देवी मां’, ‘नी’ का अर्थ है ‘से संबंधित’ और ‘पछेड़ी’ का अर्थ है ‘पृष्ठभूमि’। हस्तनिर्मित कपड़े पर देवी मां का चित्र बना हुआ है। नवरात्रि के समय और अन्य पूजन के दौरान इसे देवी मंदिर में चढ़ाया जाता है।
बाइडन को राधाकृष्ण
अमेरिका के राष्ट्रपति जो बाइडन को प्रधानमंत्री मोदी ने भगवान श्रीकृष्ण और राधा की पेंटिंग गिफ्ट की। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा के चित्रकारों ने इसे बनाया है। इसमें श्ृंगार रस और प्राकृतिक प्रेम का चित्रण किया जाता है। इसकी खासियत ये है कि कांगड़ा के कलाकर इसे बनाने में सिर्फ प्राकृतिक रंगों का ही उपयोग करते हैं।
मेलनी के लिए स्कार्फ
प्रधानमंत्री ने इटली की पहली महिला प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलनी को मुलाकात के बाद गुजरात के पाटन की परम्परा के प्रतीक ‘पाटन पटोला दुपट्टा’ (स्कार्फ) गिफ्ट किया। यह स्कार्फ पाटन के साल्वी परिवार ने बुना है। हाथ से तैयार स्कार्फ के पाटन पटोला कपड़े के रंग देखते ही बनते हैं। इसमें आगे और पीछे का हिस्सा एक जैसा दिखता है।
ऑस्ट्रेलियाई पीएम को जनजातीय कलाकृति
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री एंथोनी अल्बनीज को जनजातीय लोक कला का नमूना पिथौरा गिफ्ट किया। गुजरात के छोटा उदयपुर के राठवा कारीगरों ने इसे बना है। ये चित्र ऑस्ट्रेलिया के समुदायों की एबोरिजिनल डॉट पेंटिंग की तरह ही है।
मैक्रों को कच्छ का तोहफा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, सिंगापुर के प्रधानमंत्री ली ह्सियन लूंग और जर्मन चांसलर ओलाफ शोल्ज़ को गुजरात के कच्छ में बना एगेट बाउल गिफ्ट किया।