G-7 Summit: दुर्लभ खनिज से लेकर AI व मानव तस्करी तक, कई अहम मुद्दों पर जी7 देशों की सहमति; संयुक्त बयान जारी
कनाडा में जी-7 देशों के शिखर सम्मेलन के दौरान कई वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की गई। जिसमें एआई से लेकर अवैध प्रवासी तस्करी के खिलाफ कड़ा रुख और जरूरी खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को लेकर नवाचार और सहयोग की बात पर भी जोर दिया गया। मामले में जी-7 नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि वे प्रवासी तस्करी को रोकने और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।
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कनाडा के कानानास्किस में चल रहे जी-7 शिखर सम्मेलन के दौरान कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। इसमें प्रमुख तौर अवैध प्रवासी तस्करी के खिलाफ कड़ा रुख और जरूरी खनिजों (क्रिटिकल मिनरल्स) को लेकर नवाचार और सहयोग की बात पर जोर दिया गया। इसकी जानकारी जी-7 देशों ने संयुक्त बयान जारी कर के दी, जिसमें साफ तौर पर ये दर्शाया गया कि जी-7 देश प्रवासी तस्करी और मानव तस्करी के खिलाफ एकजुट है। साथ ही अहम खनिजों के के लिए भी क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान तैयार किया गया है।
मानव तस्करी के खिलाफ जी-7 देशों की एकजुटता
मामले में जी-7 नेताओं ने एक संयुक्त बयान जारी करते हुए दोहराया कि वे प्रवासी तस्करी को रोकने और इसके खिलाफ सख्त कार्रवाई करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं। यह कार्रवाई जी-7 की कोएलिशन टू प्रिवेंट एंड काउंटर द स्मगलिंग ऑफ माइग्रेंट्स और 2024 के एक्शन प्लान के तहत की जाएगी।
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कानून लागू करने की क्षमता होगी मजबूत
नेताओं ने कहा कि वे सीमाओं की निगरानी और अपराधियों के खिलाफ कानून लागू करने की क्षमता को और मजबूत करेंगे, ताकि संगठित आपराधिक गिरोहों को खत्म किया जा सके जो प्रवासी तस्करी और मानव तस्करी जैसे अपराधों से पैसा कमा रहे हैं।
इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि प्रवासी तस्करी कई अन्य गंभीर अपराधों जैसे मनी लॉन्ड्रिंग, ड्रग्स तस्करी, भ्रष्टाचार और जबरन श्रम से जुड़ी होती है, जिससे न सिर्फ समाज को खतरा होता है, बल्कि शिकार बने लोगों को शारीरिक शोषण, यौन हिंसा और जबरन काम जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।
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अहम खनिजों के लिए ‘क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान’
वहीं दूसरी ओर सम्मेलन में जी-7 देशों ने क्रिटिकल मिनरल्स (जैसे लिथियम, कोबाल्ट आदि) के क्षेत्र में एकजुट होकर काम करने के लिए 'क्रिटिकल मिनरल्स एक्शन प्लान' लॉन्च किया। इसका मकसद इन जरूरी खनिजों की सप्लाई चेन को सुरक्षित बनाना, नई तकनीक को बढ़ावा देना और साझेदार देशों के साथ सहयोग मजबूत करना है।
इस योजना में रिसर्च, प्रोसेसिंग, रीसाइक्लिंग, और सर्कुलर इकोनॉमी जैसे क्षेत्रों पर ध्यान दिया जाएगा। साथ ही 2025 में अमेरिका के शिकागो में इस विषय पर एक वैश्विक सम्मेलन भी होगा। बता दें कि जी-देशों की तरफ से जारी इन संयुक्त बयान पर भारत, ऑस्ट्रेलिया और दक्षिण कोरिया ने भी इस एक्शन प्लान का समर्थन किया है।