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Cuba Cash Crunch: क्यूबा में ईंधन के दाम 500% बढ़े, तेल के लिए लंबी कतारें, गैसोलीन के दाम 5 गुना बढ़े
Thu, 11 Jan 2024 07:12 AM IST
यशोधन शर्मा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हवाना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हवाना
Published by: यशोधन शर्मा
Updated Thu, 11 Jan 2024 07:12 AM IST
सार
रिपोर्ट के मुताबिक, एक लीटर मानक गैसोलीन की कीमत अब 25 पेसोस (स्थानीय मुद्रा) के बजाय 132 पेसोस होगी, जबकि एक लीटर प्रीमियम ईंधन की कीमत 30 के बजाय 156 पेसोस होगी।
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- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
क्यूबा में सरकार ने मुद्रा स्फीति के खतरनाक स्तर तक बढ़ने के चलते ईंधन पर 500% तक दाम बढ़ा दिए हैं। इसे देखते हुए देश के गैस स्टेशनों पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। क्यूबावासी पहले ही मुद्रा स्फीति के बोझ से दबे हैं, ऐसे में ईंधन की कीमतों में हुई वृद्धि को लेकर वे परेशान हैं।
ईंधन केंद्रों पर तेल भराने के लिए लगी लंबी लाइनों में झगड़े भी बढ़ गए हैं। नकदी की कमी से जूझ रहे कम्युनिस्ट द्वीप के प्रशासन ने अपने बजट घाटे को कम करने के मकसद से उठाए कदमों की एक शृंखला के तहत एक फरवरी से ईंधन के दामों में पांच गुना वृद्धि की घोषणा की है।
रिपोर्ट के मुताबिक, एक लीटर मानक गैसोलीन की कीमत अब 25 पेसोस (स्थानीय मुद्रा) के बजाय 132 पेसोस होगी, जबकि एक लीटर प्रीमियम ईंधन की कीमत 30 के बजाय 156 पेसोस होगी। क्यूबा के टैक्सी चालक 33 वर्षीय जेवियर अर्नेस्टो ने कहा हम कीमतें बढ़ने से पहले ईंधन भरने की कोशिश कर रहे हैं। यह बड़ी वृद्धि है और मुझे लगता है कि इसके बाद हमारे लिए समय कठिन होने वाला है। कम्युनिस्ट संचालित सरकार का कहना है कि यह उपाय घाटे के खर्च को नियंत्रित करने और भोजन, दवा और आयात के लिए धन जुटाने के लिए आवश्यक है।
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वस्तुओं-सेवाओं की लागत आसमान पर...मौजूदा नकदी संकट ने क्यूबा को हिलाकर रख दिया है। यहां के निवासी जीवित रहने के लिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं। लेकिन मुद्रास्फीति में इस बढ़ोतरी के चलते अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की लागत आसमान छू रही है। सरकार ने कहा है कि वह खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तरल गैस और शीर्ष स्तर के उपयोगकर्ताओं के लिए बिजली की कीमतें भी बढ़ाएगी।
सबसे खराब आर्थिक संकट
सरकार ने कहा कि वह 29 सेवा केंद्र खोलेगी जो विशेष रूप से डॉलर में ईंधन के लिए शुल्क लेंगे। दरअसल, 1.1 करोड़ लोगों का देश 1990 के दशक में सोवियत संघ के पतन के बाद से कोरोना महामारी के कारण बुरी तरह टूट गया है। हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े होने और अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक कमजोरियों के कारण यहां सबसे खराब आर्थिक संकट है।
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ईंधन केंद्रों पर तेल भराने के लिए लगी लंबी लाइनों में झगड़े भी बढ़ गए हैं। नकदी की कमी से जूझ रहे कम्युनिस्ट द्वीप के प्रशासन ने अपने बजट घाटे को कम करने के मकसद से उठाए कदमों की एक शृंखला के तहत एक फरवरी से ईंधन के दामों में पांच गुना वृद्धि की घोषणा की है।
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रिपोर्ट के मुताबिक, एक लीटर मानक गैसोलीन की कीमत अब 25 पेसोस (स्थानीय मुद्रा) के बजाय 132 पेसोस होगी, जबकि एक लीटर प्रीमियम ईंधन की कीमत 30 के बजाय 156 पेसोस होगी। क्यूबा के टैक्सी चालक 33 वर्षीय जेवियर अर्नेस्टो ने कहा हम कीमतें बढ़ने से पहले ईंधन भरने की कोशिश कर रहे हैं। यह बड़ी वृद्धि है और मुझे लगता है कि इसके बाद हमारे लिए समय कठिन होने वाला है। कम्युनिस्ट संचालित सरकार का कहना है कि यह उपाय घाटे के खर्च को नियंत्रित करने और भोजन, दवा और आयात के लिए धन जुटाने के लिए आवश्यक है।
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वस्तुओं-सेवाओं की लागत आसमान पर...मौजूदा नकदी संकट ने क्यूबा को हिलाकर रख दिया है। यहां के निवासी जीवित रहने के लिए सरकारी सब्सिडी पर निर्भर हैं। लेकिन मुद्रास्फीति में इस बढ़ोतरी के चलते अधिकांश वस्तुओं और सेवाओं की लागत आसमान छू रही है। सरकार ने कहा है कि वह खाना पकाने के लिए इस्तेमाल होने वाली तरल गैस और शीर्ष स्तर के उपयोगकर्ताओं के लिए बिजली की कीमतें भी बढ़ाएगी।
सबसे खराब आर्थिक संकट
सरकार ने कहा कि वह 29 सेवा केंद्र खोलेगी जो विशेष रूप से डॉलर में ईंधन के लिए शुल्क लेंगे। दरअसल, 1.1 करोड़ लोगों का देश 1990 के दशक में सोवियत संघ के पतन के बाद से कोरोना महामारी के कारण बुरी तरह टूट गया है। हाल के वर्षों में अमेरिकी प्रतिबंधों के कड़े होने और अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक कमजोरियों के कारण यहां सबसे खराब आर्थिक संकट है।