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UN: मुंबई-न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों को यूएन महासचिव की चेतावनी, समुद्र के बढ़ते जलस्तर को लेकर कही यह बात

Wed, 15 Feb 2023 12:02 AM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, संयुक्त राष्ट्र Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 15 Feb 2023 12:02 AM IST
सार

संयुक्त राष्ट्र प्रमुख गुटेरस ने कहा, छोटे द्वीपीय विकासशील देशों और दुनियाभर के अन्य निचले तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए समुद्र के जलस्तर में वृद्धि परेशानी का विषय है।

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From Mumbai to New York, mega cities will face serious impacts from rising sea levels UN chief Guterres
Twitter/António Guterres - फोटो : António Guterres

विस्तार

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरस ने मंगलवार को चेतावनी दी कि मुंबई और न्यूयॉर्क जैसे बड़े शहरों को समुद्र के बढ़ते जलस्तर से गंभीर प्रभावों का सामना करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समुद्र के स्तर में वृद्धि न केवल अपने आप में एक खतरा है। यह खतरे को बढ़ाने वाला है। गुटेरस 'समुद्र के स्तर में वृद्धि- अंतरराष्ट्रीय शांति एवं सुरक्षा के लिए निहितार्थ' विषय पर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की चर्चा में बोल रहे थे। 

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गुटेरस ने कहा, छोटे द्वीपीय विकासशील देशों और दुनियाभर के अन्य निचले तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों के लिए समुद्र के जलस्तर में वृद्धि परेशानी का विषय है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समुद्र का बढ़ता स्तर निचले इलाकों में रहने वाले समुदायों और यहां तक कि देशों के अस्तित्व के लिए खतरा हैं। उन्होंने कहा कि पिछले 3,000 वर्षों में किसी भी पिछली शताब्दी की तुलना में साल 1900 के बाद से औसत वैश्विक समुद्र स्तर तेजी से बढ़ा है। गुटेरस ने कहा, विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार भले ही वैश्विक तापमान चमत्कारिक रूप से 1.5 डिग्री तक सीमित हो, फिर भी समुद्र के स्तर में काफी वृद्धि होगी। 
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पृथ्वी का तापमान 1.8 डिग्री से ज्यादा बढ़ा तो मुंबई समेत कई शहरों पर खतरा
नये अध्ययन में दावा किया गया है कि अगर पृथ्वी का औसत तापमान 1.8 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ा तो पूरी दुनिया में समुद्र के स्तर का तेजी से बढ़ना भी दूर नहीं है। इससे पश्चिमी अंटार्कटिक और ग्रीनलैंड की हिम चादर को फिर से कभी ठीक न हो सकने वाला नुकसान भी पहुंचेगा। वहीं, देश के मुंबई समेत कई शहरों में खतरे की आशंका रहेगी। जर्नल नेचर कम्युनिकेशंस में प्रकाशित इस अध्ययन के अनुसार दुनिया की तटीय आबादी पहले ही समुद्र के बढ़ते स्तर से चिंतित है। इसे रोकने के लिए तापमान की वृद्धि नियंत्रित रखने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन यह बेहद मुश्किल साबित हुआ है।  हिम चादरों का पिघलना समुद्र का स्तर बढ़ने की सबसे बड़ी वजह है। दक्षिण कोरिया के पुसान विश्वविद्यालय के शोधकर्ता जुन यंग पार्क के अनुसार, नये मॉडल में दावे किए गए हैं कि साल 2060 तक अगर दुनिया कार्बन उत्सर्जन शून्य कर लेती है तो समुद्र में हिम चादर और हिम खंडों का घुलना रोका जा सकता है।
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जोखिम में भारत और नीदरलैंड जैसे देश
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने कहा, लेकिन एक डिग्री का हर हिस्सा मायने रखता है। यदि तापमान 2 डिग्री तक बढ़ता है, तो यह स्तर दोगुना हो सकता है। बांग्लादेश, चीन, भारत और नीदरलैंड जैसे देश सभी जोखिम में हैं।

इन शहरों को करना पड़ेगा गंभीर प्रभावों का सामना
उन्होंने चेतावनी दी कि काहिरा, लागोस, मापुतो, बैंकॉक, ढाका, जकार्ता, मुंबई, शंघाई, कोपेनहेगन, लंदन, लॉस एंजिल्स, न्यूयॉर्क, ब्यूनस आयर्स और सैंटियागो सहित हर महाद्वीप के बड़े शहरों को गंभीर प्रभावों का सामना करना पड़ेगा। 


समुद्र के स्तर में वृद्धि से 90 करोड़ लोगों को खतरा
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने जोर देकर कहा कि यह उन लगभग 900 मिलियन (नब्बे करोड़) लोगों के लिए गंभीर खतरा है, जो कम ऊंचाई पर तटीय क्षेत्रों में रहते हैं। जो पृथ्वी पर दस लोगों में से एक है। कुछ तटरेखाओं में पहले से ही तीन गुना समुद्र के स्तर में वृद्धि की औसत दर देखी गई है।

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