France Politics: फ्रांस में फिर से होंगे चुनाव? बजट से नाराज विपक्ष के अविश्वास प्रस्ताव से बाल-बाल बचे बायरू
सोशलिस्ट और दक्षिणपंथी नेशनल रैली दोनों ने पहले बजट का समर्थन किया था और कहा था कि वे वामपथियों के लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे। दक्षिणपंथी नेशनल रैली के अध्यक्ष जॉर्डन बार्डेला ने कहा था कि मौजूदा दौर में फ्रांसीसी अस्थिरता के नए दौर का लाभ नहीं उठाएंगे।
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फ्रांस में फ्रांस्वा बायरू को फिलहाल अविश्वास प्रस्ताव से राहत मिल गई है। उन्होंने 2025 के लिए बजट को आखिरकार पारित करा लिया है। उन्होंने सांसदों के वोट के बिना बजट विधेयक को मंजूरी दिलाने के लिए विशेष सांविधानिक शक्तियों का इस्तेमाल किया। इसके चलते ही अविश्वास प्रस्ताव लाया गया। केवल 128 सांसदों ने प्रस्ताव के समर्थन में मतदान किया, जो कि आवश्यक 289 वोटों से बहुत कम है। बता दें कि बायरू को दिसंबर में राजनीतिक अस्थिरता के बीच पीएम नियुक्त किया गया है। हालांकि अभी भी बायरू को नेशनल असेंबली में बहुमत नहीं मिला है। वहीं, इस बात की भी संभावना है कि अगले कुछ महीनों में ही
गौरतलब है कि सोशलिस्ट और दक्षिणपंथी नेशनल रैली दोनों ने पहले बजट का समर्थन किया था और कहा था कि वे वामपथियों के लाए गए अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेंगे। दक्षिणपंथी नेशनल रैली के अध्यक्ष जॉर्डन बार्डेला ने कहा था कि मौजूदा दौर में फ्रांसीसी अस्थिरता के नए दौर का लाभ नहीं उठाएंगे। साथ ही न्यू पॉपुलर फ्रंट (NFP) गठबंधन पहले ही कह चुका है कि वह अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगा क्योंकि यह फ्रांस को बजट देने का समय है।
कट्टर वामपंथी दल अविश्वास प्रस्ताव लाया था अविश्वास प्रस्ताव
फ्रांस के नए प्रधानमंत्री फ्रांस्वा बायरू की सरकार के खिलाफ नेशनल असेंबली में कट्टर वामपंथी दल अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस प्रस्ताव को पारित कराने के लिए 577 सांसदों में से कम से कम आधे वोटों की जरूरत थी। इससे पहले माना जा रहा था कि कट्टर वामपंथी सांसद प्रस्ताव के समर्थन में मतदान कर सकते हैं, भले ही उनके पास मध्यमार्गी गठबंधन की सरकार को गिराने के लिए पर्याप्त संख्या नहीं है। लेकिन पीएम बायरू ने विशेष सांविधानिक शक्तियों का इस्तेमाल कर बजट विधेयक को मंजूरी दे दी।
बजट को अभी भी सीनेट में अनुमोदन की जरूरत
अब भले ही बजट से जुड़े प्रस्ताव के समर्थन में 128 सांसदों ने मंजूरी दी, लेकिन यह अभी भी सरकार को गिराने के लिए आवश्यक 289 वोटों से बहुत कम है। इससे साथ ही मसौदा कानून बनने के लिए अभी भी उच्च सदन में अनुमोदन की आवश्यकता है।
भले ही तात्कालिक राहत लेकिन सरकार गिरने का खतरा बरकरार
वहीं, भले ही बायरू को तात्कालिक राहत मिल गई हो, लेकिन सरकार गिरने का खतरा बरकरार है। जोखिम विश्लेषण फर्म यूरेशिया ग्रुप ने दावा किया है कि 2025 के लिए बजट अगले कुछ दिनों में पूरी तरह लागू हो जाएगा। इसके बाद पीएम बायरू के लिए सोशलिस्ट और दक्षिणपंथी नेशनल रैली दोनों का निष्क्रिय समर्थन समाप्त हो जाएगा। तब इस बात की संभावना 70 प्रतिशत है कि इसके अगले कुछ महीनों में सरकार का पतन हो जाएगा।
हो सकते हैं चुनाव
वहीं, अविश्वास प्रस्ताव पर वोटिंग से पहले दक्षिणपंथी आर.एन. के प्रमुख जॉर्डन बार्डेला ने बयान दिया था कि हमें अनिश्चितता से बचना होगा, क्योंकि हम और हमारे कई साथी नागरिक संभावित दीर्घकालिक अस्थिरता को लेकर गंभीर रूप से परेशान हैं। साथ ही पार्टी के उपाध्यक्ष सेबेस्टियन चेनु ने भी बुधवार को कहा था आरएन तब तक स्थिरता चाहता है जब तक कि नए चुनाव कराना संभव न हो जाए। ऐसे में कहा जा रहा है कि बीते मतदान विधान सभा चुनावों के एक वर्ष बाद जून में हो सकते हैं।
नए प्रधानमंत्री ने गठबंधन के दलों से की बात
पीएम फ्रांस्वा बायरू ने अपनी अल्पमत सरकार को बचाए रखने के लिए गठबंधन के दलों से कई बार बात की है। उन्होंने सार्वजनिक अस्पतालों के लिए अधिक धन उपलब्ध कराने पर सहमति व्यक्त की और राष्ट्रीय शिक्षा में 4,000 नौकरियों में कटौती नहीं करने का वादा किया। इससे पहले उन्होंने कहा था कि वे सेवानिवृत्ति की आयु 62 से बढ़ाकर 64 करने को लेकर बातचीत करने के लिए तैयार हैं।
जुलाई में हुए आम चुनाव में किसी पार्टी को नहीं मिला था स्पष्ट बहुमत
फ्रांस में जुलाई में हुए आम चुनाव में 577 सीटों वाली नेशनल असेंबली में किसी पार्टी को बहुमत नहीं मिला था। वामपंथी न्यू पॉपुलर फ्रंट (NFP) गठबंधन के पास सबसे ज्यादा 190 सीटें थीं। मैक्रों के मध्यमार्गी गठबंधन के पास लगभग 160 सीटें और दक्षिणपंथी नेता ले पेन की नेशनल रैली के पास 140 सीटें थीं। इसके बाद राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने मिशेल बार्नियर को नया प्रधानमंत्री नामित किया था।
तीन महीने ही चल पाई थी बर्निये सरकार
माइकल बर्निये की सरकार के खिलाफ कट्टर वामपंथी दल ने अविश्वास प्रस्ताव पेश किया था, जिसे मरीन ली पेन के नेतृत्व वाले धुर दक्षिणपंथी दल का भी समर्थन मिला था। फ्रांस की संसद के 577 सांसदों में से 331 सांसदों ने सरकार के खिलाफ मत दिया। इसके बाद से ही देश में राजनीतिक संकट पैदा हो गया था। हाल ही में मैक्रों ने 73 वर्षीय फ्रांस्वा बायरू को नया प्रधानमंत्री बनाया है।