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USA: 'लोकतांत्रिक देशों पर संकट, हमें सतर्क रहने की जरूरत', फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने किया आगाह

Sun, 25 Sep 2022 02:36 PM IST
संजीव कुमार झा वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन Published by: संजीव कुमार झा Updated Sun, 25 Sep 2022 02:36 PM IST
सार

फ्रांस के राष्ट्रपति  इमैनुएल मैक्रों ने कहा कि पश्चिमी ‘उदार लोकतांत्रिक देशों’ में पैदा हुए संकट के कारण सारी दुनिया को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा- ‘मेरी राय में लोकतांत्रिक देश एक बड़े संकट में हैं। मैं इन देशों की व्यवस्था को उदार लोकतंत्र कहता हूं। क्यों? इसलिए कि एक तो ये खुला समाज हैं, यहां बहुत खुलापन है, और ये सहयोग का रुख रखने वाले लोकतंत्र हैं।

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France President Emmanuel Macron Deep Concern About Democratic country including USA
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुअल मैक्रों (फाइल) - फोटो : Facebook

विस्तार

इन दिनों अमेरिका यात्रा पर आए फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने लोकतांत्रिक देशों के संकट को लेकर दुनिया को आगाह किया है। उन्होंने जिन लोकतांत्रिक देशों के संकट का जिक्र किया, उनमें अमेरिका भी है। मैक्रों ने कहा कि वर्षों से अस्थिर करने की जारी कोशिशों के कारण ये स्थिति पैदा हुई है। लोकतंत्र के भविष्य को लेकर मैक्रों ने अपनी चिंता अमेरिकी टीवी चैनल सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में जताई। जब अमेरिकी लोकतंत्र के बारे में पूछा गया, तो फ्रांस के राष्ट्रपति ने कहा- ‘यहां की स्थिति हम सबके लिए चिंता का कारण है। मैं यह कहना पसंद नहीं करता कि मुझे आपकी चिंता है। लेकिन मेरी राय है कि हमने 18वीं सदी के बाद जो कुछ निर्मित किया, वह आज दांव पर लग गया है।’

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मैक्रों ने कहा कि पश्चिमी ‘उदार लोकतांत्रिक देशों’ में पैदा हुए संकट के कारण सारी दुनिया को सतर्क रहने की जरूरत है। उन्होंने कहा- ‘मेरी राय में लोकतांत्रिक देश एक बड़े संकट में हैं। मैं इन देशों की व्यवस्था को उदार लोकतंत्र कहता हूं। क्यों? इसलिए कि एक तो ये खुला समाज हैं, यहां बहुत खुलापन है, और ये सहयोग का रुख रखने वाले लोकतंत्र हैं। लेकिन इससे विरोधियों को इन व्यवस्थाओं पर दबाव बनाने का मौका मिला है।’
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पर्यवेक्षकों ने ध्यान दिलाया है कि मैक्रों ने वही बात कही है, जो अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन कहते रहे हैं। बाइडेन ने 21वीं सदी की प्रतिस्पर्धा को लोकतंत्र बनाम तानाशाही के मुकाबले के रूप में प्रस्तुत किया है। विश्लेषकों के मुताबिक हाल के महीनों में दुनिया भर में बने आर्थिक मंदी के माहौल के कारण लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के भविष्य को लेकर दी जा रही चेतावनियों को अधिक गंभीरता से लिया जाने लगा है। यह राय भी बनी है कि यूक्रेन पर रूस के हमले से भी लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं के लिए नई चुनौती खड़ी हुई है। 
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मैक्रों इस वर्ष अप्रैल में दूसरे कार्यकाल के लिए फ्रांस के राष्ट्रपति चुने गए थे। लेकिन जून में वहां हुए संसदीय चुनावों में उनकी पार्टी बहुमत हासिल नहीं कर पाई। इन चुनावों में वामपंथी और धुर दक्षिणपंथी नेताओं को बड़ी सफलता मिली। समझा जाता है कि फ्रांस के जनमत ने वहां जारी स्थिति के खिलाफ मतदान किया। उन्होंने दो चरमपंथी नेताओं को अपना समर्थन दिया। उससे जहां मैक्रों के लिए शासन चलाना मुश्किल हो गया है, वहीं फ्रांस में लोकतंत्र के भविष्य को लेकर नई आशंकाएं पैदा हुई हैँ। 


मैक्रों ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्थाएं जन इच्छा का सम्मान करती हैं। वहां विभिन्न संस्कृतियों का स्वागत किया जाता है। इन व्यवस्थाओं में सभी वर्गों के बीच पारदर्शिता और सहयोग की भावना बनाए रखी जाती है। ऐसा हो, इसके लिए सबसे महत्त्वपूर्ण संतुलन कायम रखना है। विश्लेषकों के मुताबिक मैक्रों का इशारा लोकतांत्रिक समाजों में बढ़ते वामपंथी और दक्षिणपंथी ध्रुवीकरण की तरफ है। अमेरिका में भी ऐसा ध्रुवीकरण हाल के वर्षों में बढ़ा है। उधर यूरोप के कई देशों धुर दक्षिणपंथी पार्टियों को बड़ी सफलता मिली है। पिछले हफ्ते स्वीडन में धुर दक्षिणपंथी पार्टी सबसे बड़ा दल बन कर उभरी। इस रविवार को इटली में भी ऐसा होने की संभावना है। 

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