यमन में भड़की हिंसा: हूती विद्रोहियों ने सैन्य शिविर पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें; 20 सैनिकों की मौत, कई घायल
यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दक्षिणी प्रांत शबवा के अल-अलम सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। इसमें कम से कम 20 सैनिकों की मौत हुई और दो दर्जन से अधिक जवान घायल हुए। आखिर यमन में लड़ाई फिर क्यों तेज हो गई है? वर्ष 2022 के संघर्षविराम का क्या हुआ? सादा प्रांत में हवाई हमले में कितने लोगों की मौत हुई और इसके लिए किसे जिम्मेदार ठहराया गया? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
विस्तार
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थक बलों के बीच संघर्ष लगातार गंभीर होता जा रहा है। सोमवार को दक्षिणी यमन के शबवा प्रांत में सरकारी बलों के सैन्य शिविर पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया गया। इस हमले में कम से कम 20 सैनिकों की मौत हो गई, जबकि दो दर्जन से अधिक जवान घायल हुए हैं। मरने वालों में ज्यादातर नए भर्ती हुए सैनिक बताए गए हैं। यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब यमन में लंबे समय से जारी संघर्ष फिर तेज हो गया है।
हूती विद्रोहियों ने कहां और कैसे किया हमला?
ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने शबवा प्रांत के अल-अलम सैन्य शिविर को निशाना बनाया। यमन की सेना के प्रवक्ता कर्नल माजेद अल-नजिली ने पुष्टि की कि हूतियों ने पुलिस और सुरक्षा बलों के प्रशिक्षण केंद्र पर तीन बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। हालांकि, उन्होंने हताहतों की संख्या पर टिप्पणी नहीं की। यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार के दो सैन्य अधिकारियों ने कम से कम 20 सैनिकों की मौत और दो दर्जन से अधिक जवानों के घायल होने की जानकारी दी। हूती संचालित समाचार एजेंसी ने भी हमले में कई लोगों के मारे जाने और घायल होने का दावा किया, लेकिन संख्या नहीं बताई।
सैन्य शिविर को निशाना बनाना क्यों अहम है?
अल-अलम सैन्य शिविर शबवा प्रांत की राजधानी अटक के उत्तर में जर्दान जिले में स्थित है। इस शिविर का इस्तेमाल पहले संयुक्त अरब अमीरात के समर्थन वाले एक सशस्त्र समूह ने किया था। यह इलाका सरकार के नियंत्रण वाले मारीब प्रांत तक जाने वाले रास्ते पर स्थित है। यहां से सरकारी बलों को जरूरी सामान और सैन्य आपूर्ति पहुंचाने में मदद मिलती है। एक सैन्य अधिकारी के मुताबिक, हमले में निशाना बनाए गए जवान रैपिड इंटरवेंशन नाम से गठित नई सुरक्षा इकाई का हिस्सा थे। इस बल को इलाके की रक्षा की जिम्मेदारी दी गई थी।
यमन में संघर्ष फिर क्यों बढ़ रहा है?
यमन में हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब समर्थित सरकारी बलों के बीच लड़ाई पिछले कई महीनों से तेज हो रही है। क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़े तनाव ने भी हालात को प्रभावित किया है। दोनों पक्षों के बीच बढ़ते संघर्ष ने वर्ष 2022 के उस संघर्षविराम को कमजोर कर दिया, जिसने यमन के गृहयुद्ध में लड़ाई को काफी हद तक रोक दिया था। इसी बीच रविवार को उत्तरी यमन के हूती नियंत्रित सादा प्रांत में हवाई हमला हुआ। हूती प्रशासन के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, इसमें कम से कम नौ लोगों की मौत हुई, जिनमें पांच बच्चे और दो महिलाएं शामिल थीं। हूतियों ने इसके लिए सऊदी नेतृत्व वाले बलों को जिम्मेदार ठहराया। सप्ताहांत के कई हमलों में 30 से अधिक लोगों के मारे जाने या घायल होने का दावा भी किया गया। सऊदी अरब की ओर से तत्काल कोई टिप्पणी नहीं आई।
सऊदी अरब और लाल सागर के आसपास तनाव क्यों बढ़ा?
हूती विद्रोहियों ने हाल के हफ्तों में सऊदी अरब पर भी हमले फिर शुरू किए हैं। उनका कहना है कि सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन कर रहा है। विद्रोही सऊदी हवाई अड्डों, तेल ठिकानों और सैन्य सुविधाओं को निशाना बना रहे हैं। इन हमलों से हजारों उड़ानें प्रभावित हुई हैं और 19 लोगों की मौत हुई है। सऊदी तेल कंपनी अरामको के मुख्यालय पर भी हमला किया गया। इसके अलावा हूतियों ने लाल सागर के तट और बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के आसपास के इलाकों में अपना कब्जा बढ़ाया है। यह समुद्री रास्ता अंतरराष्ट्रीय व्यापार के लिए अहम है और होर्मुज जलडमरूमध्य के विकल्प के तौर पर भी इस्तेमाल किया जा सकता है। इस रणनीतिक इलाके से हूतियों को हटाने और क्षेत्र पर दोबारा कब्जा करने के लिए सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन ने इसी महीने बड़ा सैन्य अभियान शुरू किया है।