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अफगानिस्तान: काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उपराष्ट्रपति सालेह ने जला दिए थे अपनी बेटी-पत्नी के फोटो
Sun, 05 Sep 2021 06:21 AM IST
Jeet Kumar
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, काबुल
Published by: Jeet Kumar
Updated Sun, 05 Sep 2021 06:21 AM IST
सार
- सालेह ने अपने गार्ड से कहा था कि वह जख्मी हो जाएं तो उनके सिर में गोली मार दे
- साहेल ने कहा अफगानिस्तान की इस हालात के पीछे पाकिस्तान का हाथ है
- जब काबुल पर तालिबान कब्जा कर रहा था तो अफगानी फोर्स कही नजर नहीं आई
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अमरुल्लाह सालेह
- फोटो : वीडियो स्क्रीनग्रैब
विस्तार
तालिबान ने अफगानिस्तान को अपने कब्जे में ले लिया है लेकिन पंजशीर में घमासान जारी है। हालांकि उसका दावा है कि पंजशीर पर भी उसने कब्जा कर लिया है, लेकिन नॉर्दन एलायंस ने उसके दावे को खारिज कर दिया है। अफगानिस्तान के पूर्व उपराष्ट्रपति अमरुल्लाह सालेह पंजशीर में तालिबान से लोहा ले रहे हैं। उन्होंने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह तालिबान के सामने सरेंडर नहीं करेंगे।
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सालेह ने एक लेख के जरिए कई बातों का खुलासा किया है। इसमें उन्होंने अमेरिका के अचानक अफगानिस्तान से चले जाने वाले निर्णय की भी निंदा की है। साथ ही पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि अफगानिस्तान की इस हालात के पीछे उसका ही हाथ है।
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एक अखबार में छपे लेख में सालेह ने अफगानिस्तान के हालात के बारे में लिखा है। अमरुल्लाह सालेह ने बताया कि काबुल पर तालिबान के कब्जे के बाद उन्होंने अपनी पत्नी और बेटी की तस्वीरों को नष्ट कर दिया था। कंप्यूटर और जरूरी सामान को भी नष्ट कर दिया। उन्होंने लिखा कि मैंने अपने सुरक्षा गार्ड को भी कह रखा है कि अगर मैं घायल हो गया तो वो मेरे सिर में गोली मार दे। सालेह पहले ही कह चुके हैं कि वह कभी तालिबान के सामने सरेंडर नहीं करेंगे।
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पाकिस्तान पर साधा निशाना
पूर्व उपराष्ट्रपति ने लिखा कि तालिबान को पाकिस्तानी दूतावास की तरफ से निर्देश मिल रहे थे। तालिबान के प्रवक्ता को हर घंटे निर्देश मिल रहे थे। बता दें कि शनिवार को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के प्रमुख फैज हमीद भी काबुल पहुंचे। पाकिस्तान के किसी अधिकारी का इस तरह तालिबान सरकार के गठन से पहले अफगानिस्तान पहुंचना अपने आप में कई सवाल और कयासों को जन्म दे रहा है।
सालेह ने लिखा कि अफगानिस्तान आतंकियों से घिर चुका है। काबुल की सड़कों पर अब अलकायदा आ चुका है। तालिबान में कोई सुधार नहीं हुआ है। काबुल पर कब्जे के समय तालिबानी कैदियों ने गैर-तालिबानी कैदियों से संपर्क करने की कोशिश की थी और इसके बाद विद्रोह हुआ था। मैंने रक्षा मंत्री और गृहमंत्री से संपर्क करने की कोशिश की थी, लेकिन संपर्क नहीं हो सका।
उन्होने लिखा कि मैंने अफगानिस्तान के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार को मैसेज किया था, लेकिन उनका कोई जवाब नहीं आया। 15 अगस्त को जब काबुल पर कब्जा हुआ तो लोग परेशान थे, उस समय सेना सक्रिय नहीं थी। उन्होंने लिखा कि मैंने अपने प्रमुख गार्ड रहीम से कहा था कि अगर मैं जख्मी हो जाता हूं तो वो मुझे गोली मार दे। क्योंकि मैं तालिबान के सामने सरेंडर नहीं करना चाहता हूं।
तालिबान ने भी पाकिस्तान को बताया है अपना साथी
तालिबान प्रवक्ता जबीउल्ला मुजाहिद ने भी एक हफ्ते पहले कहा था कि तालिबान पाकिस्तान को अपना दूसरा घर मानता है और अफगानिस्तान की धरती पर ऐसी किसी भी गतिविधि की इजाजत नहीं देगा जो पाकिस्तान के हितों के खिलाफ हो। हालांकि, मुजाहिद ने यह भी कहा था कि हम अपनी सरजमीं को किसी मुल्क के खिलाफ इस्तेमाल नहीं करने देंगे। भारत और पाकिस्तान को चाहिए वे अपने द्विपक्षीय मामले सुलझाएं।