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Lithuania New PM: लिथुआनिया को मिला नया प्रधानमंत्री, पूर्व मजदूर संघ नेता इंगा रुगिनिएने संभालेंगी सत्ता
Tue, 26 Aug 2025 04:16 PM IST
पवन पांडेय
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, विलनियस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, विलनियस
Published by: पवन पांडेय
Updated Tue, 26 Aug 2025 04:16 PM IST
सार
Inga Ruginiene New PM Of Lithuania: लिथुआनिया की नई पीएम इंगा रुगिनिएने को अब औपचारिक रूप से राष्ट्रपति से नियुक्ति पत्र लेना है और संसद में शपथ ग्रहण करना है। इसके बाद वे आधिकारिक रूप से देश की प्रधानमंत्री बन जाएंगी और आने वाले वर्षों में उनकी असली परीक्षा शासन और स्थिरता बनाए रखने की होगी।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : ANI
विस्तार
लिथुआनिया की संसद ने मंगलवार को एक बड़ी राजनीतिक हलचल के बीच देश को नया प्रधानमंत्री दे दिया। मजदूर संघ की पूर्व नेता और 44 वर्षीय राजनेता इंगा रुगिनिएने को संसद ने 78 बनाम 35 मतों से देश का नया प्रधानमंत्री चुना। यह चुनाव उनसे पहले के प्रधानमंत्री गिंतौतास पलुकस के इस्तीफे के बाद हुआ है।
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क्यों देना पड़ा पलुकस को इस्तीफा?
गिंतौतास पलुकस पिछले साल ही प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन उनकी छवि लगातार सवालों में रही। जुलाई में कई मीडिया रिपोर्टों में उनके पुराने और मौजूदा कारोबारी लेन-देन पर गंभीर आरोप लगे। इसमें वित्तीय गड़बड़ी और पुराने मामलों से जुड़े आरोप शामिल थे। इन खुलासों के बाद देश की भ्रष्टाचार-रोधी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने आधिकारिक जांच शुरू कर दी। दबाव बढ़ने पर पलुकस ने जुलाई के अंत में पद छोड़ दिया।
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कौन हैं इंगा रुगिनिएने?
इंगा रुगिनिएने मजदूर संघ परिसंघ की पूर्व प्रमुख रही हैं। पिछले साल आम चुनाव से ठीक पहले उन्होंने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ज्वाइन की थी। इसके बाद वे पलुकस की सरकार में सामाजिक मामलों और श्रम मंत्री बनीं। अब वे सीधे प्रधानमंत्री पद तक पहुंच गई हैं। वहीं नई प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद इंगा रुगिनिएने ने संसद से कहा, 'हमारा मकसद स्थिरता बहाल करना है और यह सुनिश्चित करना है कि सरकार वही काम करे जो जनता ने उसे सौंपा है।'
राष्ट्रपति नौसेदा का भरोसा
लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने संसद में इंगा रुगिनिएने को नामित करते हुए कहा कि वे समझौते की तलाश करने वाली, रचनात्मक वार्ताकार हैं। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि वह देश की राजनीति में स्थिरता लाएंगी।
लिथुआनिया में नई गठबंधन सरकार
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने सोमवार को दो छोटे दलों के साथ मिलकर एक नया केंद्र-वाम गठबंधन बनाया है। संसद में इस गठबंधन के पास 141 में से 82 सीटों का मजबूत बहुमत है। इसका मतलब है कि रुगिनिएने की सरकार को स्थिरता मिलेगी और वह बाकी बचे कार्यकाल (चार साल की अवधि) तक काम कर सकेगी।
यह भी पढ़ें - Storm: वियतनाम में तूफान से तीन की मौत, दक्षिण पूर्व एशिया के कई हिस्सों में भारी बारिश-बाढ़ की चेतावनी
विदेश नीति में बदलाव की संभावना नहीं
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदलाव से लिथुआनिया की विदेश नीति में कोई बड़ा असर नहीं होगा। राष्ट्रपति नौसेदा ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का चेहरा बने रहते हैं। वे यूक्रेन के लिए रूस के खिलाफ़ युद्ध में सबसे मज़बूत समर्थकों में गिने जाते हैं। इस रुख को देश की लगभग सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों का समर्थन हासिल है।
लिथुआनिया की रणनीतिक स्थिति
लिथुआनिया यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य है। यह रूस के कलिनिनग्राद एक्सक्लेव और रूस समर्थक बेलारूस की सीमा से सटा है। यही वजह है कि सुरक्षा और विदेश नीति यहां हमेशा प्रमुख मुद्दा बनी रहती है।
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क्यों देना पड़ा पलुकस को इस्तीफा?
गिंतौतास पलुकस पिछले साल ही प्रधानमंत्री बने थे, लेकिन उनकी छवि लगातार सवालों में रही। जुलाई में कई मीडिया रिपोर्टों में उनके पुराने और मौजूदा कारोबारी लेन-देन पर गंभीर आरोप लगे। इसमें वित्तीय गड़बड़ी और पुराने मामलों से जुड़े आरोप शामिल थे। इन खुलासों के बाद देश की भ्रष्टाचार-रोधी और कानून प्रवर्तन एजेंसियों ने आधिकारिक जांच शुरू कर दी। दबाव बढ़ने पर पलुकस ने जुलाई के अंत में पद छोड़ दिया।
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कौन हैं इंगा रुगिनिएने?
इंगा रुगिनिएने मजदूर संघ परिसंघ की पूर्व प्रमुख रही हैं। पिछले साल आम चुनाव से ठीक पहले उन्होंने सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ज्वाइन की थी। इसके बाद वे पलुकस की सरकार में सामाजिक मामलों और श्रम मंत्री बनीं। अब वे सीधे प्रधानमंत्री पद तक पहुंच गई हैं। वहीं नई प्रधानमंत्री चुने जाने के बाद इंगा रुगिनिएने ने संसद से कहा, 'हमारा मकसद स्थिरता बहाल करना है और यह सुनिश्चित करना है कि सरकार वही काम करे जो जनता ने उसे सौंपा है।'
राष्ट्रपति नौसेदा का भरोसा
लिथुआनिया के राष्ट्रपति गितानस नौसेदा ने संसद में इंगा रुगिनिएने को नामित करते हुए कहा कि वे समझौते की तलाश करने वाली, रचनात्मक वार्ताकार हैं। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि वह देश की राजनीति में स्थिरता लाएंगी।
लिथुआनिया में नई गठबंधन सरकार
सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ने सोमवार को दो छोटे दलों के साथ मिलकर एक नया केंद्र-वाम गठबंधन बनाया है। संसद में इस गठबंधन के पास 141 में से 82 सीटों का मजबूत बहुमत है। इसका मतलब है कि रुगिनिएने की सरकार को स्थिरता मिलेगी और वह बाकी बचे कार्यकाल (चार साल की अवधि) तक काम कर सकेगी।
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विदेश नीति में बदलाव की संभावना नहीं
विशेषज्ञ मानते हैं कि इस बदलाव से लिथुआनिया की विदेश नीति में कोई बड़ा असर नहीं होगा। राष्ट्रपति नौसेदा ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर देश का चेहरा बने रहते हैं। वे यूक्रेन के लिए रूस के खिलाफ़ युद्ध में सबसे मज़बूत समर्थकों में गिने जाते हैं। इस रुख को देश की लगभग सभी बड़ी राजनीतिक पार्टियों का समर्थन हासिल है।
लिथुआनिया की रणनीतिक स्थिति
लिथुआनिया यूरोपीय संघ और नाटो का सदस्य है। यह रूस के कलिनिनग्राद एक्सक्लेव और रूस समर्थक बेलारूस की सीमा से सटा है। यही वजह है कि सुरक्षा और विदेश नीति यहां हमेशा प्रमुख मुद्दा बनी रहती है।