सीपीसी में बगावत: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में सब ठीक नहीं, ‘तख्ता पलट’ जैसी कोशिशों की अटकलें
कम्युनिस्ट पार्टी की वेबसाइट पर प्रकाशित पार्टी की अनुशासन समिति के बयान के मुताबिक सुन को साल भर पहले पकड़ा गया था। उन्हें असीमित राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा का दोषी पाया गया। उन्होंने राजनीतिक अफवाहें फैलाईं और अपने हाथों में राजनीतिक ताकत हासिल करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया...
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
इसी महीने एक अक्तूबर को चीन के राष्ट्रीय दिवस समारोह से ठीक पहले पूर्व उप प्रधानमंत्री सुन लिजुन को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया। उन पर ये कार्रवाई भ्रष्टाचार के किसी आरोप में नहीं हुई। बल्कि अब ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्होंने कोई ऐसा बड़ा ‘राजनीतिक अपराध’ किया था, जो तख्ता पलट की कोशिश जैसा था। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सुन ‘अनुशासन के गंभीर उल्लंघनों’ में शामिल थे। वे एक प्रमुख सरकारी विभाग पर कब्जा जमाने के लिए गिरोह बना रहे थे।
कम्युनिस्ट पार्टी की वेबसाइट पर प्रकाशित पार्टी की अनुशासन समिति के बयान के मुताबिक सुन को साल भर पहले पकड़ा गया था। उन्हें असीमित राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा का दोषी पाया गया। ये आरोप भी साबित हुआ कि उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नीतिगत दिशानिर्देशों से ‘मनमाने ढंग से असहमति जताई’ थी। उन्होंने राजनीतिक अफवाहें फैलाईं और अपने हाथों में राजनीतिक ताकत हासिल करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया।
इस बीच चीनी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह खबर भी दी है कि सुन के पूर्व सहकर्मी, पूर्व न्याय मंत्री, और सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो के पूर्व प्रमुख फु झेंगहुआ के खिलाफ भी ‘अनुशासन और कानून के उल्लंघन’ के आरोप में जांच चल रही है। फू ने 2015 में पूर्व सुरक्षा अधिकारी झाओ योंगकांग के खिलाफ जांच का नेतृत्व किया था। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर झाओ को कैद की सजा दी गई। झाओ चोंगिछिंग प्रदेश में पार्टी के पूर्व प्रमुख बो शिलाई के सहयोगी रह चुके हैं। बो को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का प्रतिद्वंद्वी समझा जाता था। बो को 2013 में गिरफ्तार कर लिया गया था।
फू और सुन के बारे में खबर आने से एक हफ्ता पहले उनके निकट सहयोगी पेंग बो पर अनुशासन समिति ने पार्टी के प्रति वफादार ना रहने का आरोप लगाया था। पेंग पहले चीन की इंटरनेट सेंसर इकाई के प्रमुख थे। उन्हें पिछले अगस्त में पार्टी से निकाला गया था। खबरों के मुताबिक हाल के वर्षों में फू चौथे नेता हैं, जिन्हें अनुशासन समिति की सिफारिश पर हिरासत में लिया गया है।
विश्लेषकों के मुताबिक उनके खिलाफ आरोप में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उससे संकेत मिलता है कि वे शी जिनपिंग के खिलाफ साजिश में जुटे हुए थे। इसमें उन्हें कुछ और वरिष्ठ नेताओं का सहयोग मिल रहा था। ऐसी संभावना जताई गई है कि उनमें से कई नेताओं को जल्द ही उनके पदों से रिटायर कराया जाने वाला है। वेबसाइट एशिया टाइम्स ने एक विश्लेषण में कहा गया है कि शी जिनपिंग ने पार्टी में अपनी ऐसी हैसियत बना ली है, जिसमें समझा जाता है कि उनके लिए कोई चुनौती नहीं है। उनकी हैसियत की तुलना माओ जे दुंग से की जाती है।
पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसीलिए ताजा घटनाएं पार्टी के अंदर चल रही किसी हलचल का संकेत हैं। अटकलें लगाई गई हैं कि पार्टी का एक हिस्सा उन सुधारों के खिलाफ है, जिन्हें शी उत्साह के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। खासकर 2035 तक देश में ‘कानून का शासन’ लागू करने के शी के इरादे को लेकर पार्टी में गहरा विरोध है। एक खेमे को अंदेशा है कि ऐसा हुआ तो उनका रसूख खत्म हो जाएगा।