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Hindi News ›   World ›   Former deputy prime minister Sun Lijun was arrested a year ago, accused of attempts like coup

सीपीसी में बगावत: चीन की कम्युनिस्ट पार्टी में सब ठीक नहीं, ‘तख्ता पलट’ जैसी कोशिशों की अटकलें

Fri, 08 Oct 2021 06:44 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, हांग कांग Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 08 Oct 2021 06:44 PM IST
सार

कम्युनिस्ट पार्टी की वेबसाइट पर प्रकाशित पार्टी की अनुशासन समिति के बयान के मुताबिक सुन को साल भर पहले पकड़ा गया था। उन्हें असीमित राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा का दोषी पाया गया। उन्होंने राजनीतिक अफवाहें फैलाईं और अपने हाथों में राजनीतिक ताकत हासिल करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया...

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Former deputy prime minister Sun Lijun was arrested a year ago, accused of attempts like coup
चीन की कम्युनिस्ट पार्टी - फोटो : chinausfocus

विस्तार

इसी महीने एक अक्तूबर को चीन के राष्ट्रीय दिवस समारोह से ठीक पहले पूर्व उप प्रधानमंत्री सुन लिजुन को चीन की कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया। उन पर ये कार्रवाई भ्रष्टाचार के किसी आरोप में नहीं हुई। बल्कि अब ये अटकलें लगाई जा रही हैं कि उन्होंने कोई ऐसा बड़ा ‘राजनीतिक अपराध’ किया था, जो तख्ता पलट की कोशिश जैसा था। आधिकारिक बयान में कहा गया है कि सुन ‘अनुशासन के गंभीर उल्लंघनों’ में शामिल थे। वे एक प्रमुख सरकारी विभाग पर कब्जा जमाने के लिए गिरोह बना रहे थे।

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कम्युनिस्ट पार्टी की वेबसाइट पर प्रकाशित पार्टी की अनुशासन समिति के बयान के मुताबिक सुन को साल भर पहले पकड़ा गया था। उन्हें असीमित राजनीतिक महत्त्वाकांक्षा का दोषी पाया गया। ये आरोप भी साबित हुआ कि उन्होंने पार्टी के केंद्रीय नीतिगत दिशानिर्देशों से ‘मनमाने ढंग से असहमति जताई’ थी। उन्होंने राजनीतिक अफवाहें फैलाईं और अपने हाथों में राजनीतिक ताकत हासिल करने के लिए गलत तरीकों का इस्तेमाल किया।
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इस बीच चीनी मीडिया ने अधिकारियों के हवाले से यह खबर भी दी है कि सुन के पूर्व सहकर्मी, पूर्व न्याय मंत्री, और सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो के पूर्व प्रमुख फु झेंगहुआ के खिलाफ भी ‘अनुशासन और कानून के उल्लंघन’ के आरोप में जांच चल रही है। फू ने 2015 में पूर्व सुरक्षा अधिकारी झाओ योंगकांग के खिलाफ जांच का नेतृत्व किया था। उनकी जांच रिपोर्ट के आधार पर झाओ को कैद की सजा दी गई। झाओ चोंगिछिंग प्रदेश में पार्टी के पूर्व प्रमुख बो शिलाई के सहयोगी रह चुके हैं। बो को राष्ट्रपति शी जिनपिंग का प्रतिद्वंद्वी समझा जाता था। बो को 2013 में गिरफ्तार कर लिया गया था।

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फू और सुन के बारे में खबर आने से एक हफ्ता पहले उनके निकट सहयोगी पेंग बो पर अनुशासन समिति ने पार्टी के प्रति वफादार ना रहने का आरोप लगाया था। पेंग पहले चीन की इंटरनेट सेंसर इकाई के प्रमुख थे। उन्हें पिछले अगस्त में पार्टी से निकाला गया था। खबरों के मुताबिक हाल के वर्षों में फू चौथे नेता हैं, जिन्हें अनुशासन समिति की सिफारिश पर हिरासत में लिया गया है।

विश्लेषकों के मुताबिक उनके खिलाफ आरोप में जिस भाषा का इस्तेमाल किया गया है, उससे संकेत मिलता है कि वे शी जिनपिंग के खिलाफ साजिश में जुटे हुए थे। इसमें उन्हें कुछ और वरिष्ठ नेताओं का सहयोग मिल रहा था। ऐसी संभावना जताई गई है कि उनमें से कई नेताओं को जल्द ही उनके पदों से रिटायर कराया जाने वाला है। वेबसाइट एशिया टाइम्स ने एक विश्लेषण में कहा गया है कि शी जिनपिंग ने पार्टी में अपनी ऐसी हैसियत बना ली है, जिसमें समझा जाता है कि उनके लिए कोई चुनौती नहीं है। उनकी हैसियत की तुलना माओ जे दुंग से की जाती है।

पर्यवेक्षकों के मुताबिक इसीलिए ताजा घटनाएं पार्टी के अंदर चल रही किसी हलचल का संकेत हैं। अटकलें लगाई गई हैं कि पार्टी का एक हिस्सा उन सुधारों के खिलाफ है, जिन्हें शी उत्साह के साथ आगे बढ़ा रहे हैं। खासकर 2035 तक देश में ‘कानून का शासन’ लागू करने के शी के इरादे को लेकर पार्टी में गहरा विरोध है। एक खेमे को अंदेशा है कि ऐसा हुआ तो उनका रसूख खत्म हो जाएगा।

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