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Sudan: गृहयुद्ध के बीच सूडान की सबसे बड़े रिफाइनरी में लगी आग, सेना ने विद्रोही समूह पर लगाया हमले का आरोप
Sat, 25 Jan 2025 03:56 PM IST
शुभम कुमार
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, खार्तूम
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, खार्तूम
Published by: शुभम कुमार
Updated Sat, 25 Jan 2025 03:56 PM IST
सार
सूडान से गृहयुद्ध, हिंसा और डर के कारण लोगों का घर छोड़कर दूसरे स्थान पर जाना जारी है। इसी बीच एक और खबर सामने आ रही है कि सूडान की सबसे बड़ी रिफाइनरी में आग लग गई है, जिसके कारण चारो ओर धुंआ फैल गया है। सेना ने विद्रोही समूद को इसका जिम्मेदार बताया है।
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सूडान (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : एएनआई
विस्तार
सूडान में सेना और विद्रोही समूह रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के बीच जारी गृह युद्ध के बीच बड़ी खबर सामने आ रही है। जहां देश की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी अल-जैली में हमलों के कारण आग लग गई। इस बात का खुलासा सैटेलाइट द्वारा ली गई तस्वीर से हुआ। अल-जैली में आग लगने से राजधानी खार्तूम में चारों आरो धुंआ फैल गया है। यह रिफाइनरी कंपनी सूडान सरकार और चाइना नेशनल पेट्रोलियम कॉर्प (सीएनपीसी) की साझेदारी में है।
बता दें कि अल-जैली रिफाइनरी राजधानी खार्तूम से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। रिफाइनरी पहले भी हमलों का शिकार हो चुकी है क्योंकि आरएसएफ ने अप्रैल 2023 से इस सुविधा पर नियंत्रण का दावा किया है और उनके बल इसकी रखवाली कर रहे थे। वहीं मामले में मीडिया रिपोर्ट की माने तो आरएसएफ ने रिफाइनरी को बारूदी सुरंगों से घेर दिया है, ताकि आगे बढ़ने की गति धीमी हो सके।
सैटेलाइट तस्वीर से खुलासा
25 जनवरी को उपग्रह से ली गई तस्वीरों में रिफाइनरी में लगी आग की लपेटें और चारों ओर धुआं देखने को मिल रही है। साथ ही आग के कारण, तेल टैंक जल रहे थे और काले धुएं का गुबार खार्तूम की ओर बढ़ रहा था, जो श्वसन समस्याएं और कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। बता दें कि 100,000 बैरल तेल प्रोसेस करने वाली अल-जैली रिफाइनरी गुरुवार तक लगभग सही सलामत थी, लेकिन अगले दिन रिफाइनरी पर एक बड़ा हमला हुआ, जिसके परिणामस्वरूप पूरे परिसर में आग लग गई। नासा के सैटेलाइट से प्राप्त डेटा के अनुसार, इस आग को अब दुनिया भर में जंगल की आग की निगरानी करने वाली प्रणालियों से ट्रैक किया जा रहा है।
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साथ ही मामले में शुक्रवार को प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा ली गई उपग्रह तस्वीरों में रिफाइनरी के बड़े हिस्से में आग लगी हुई दिखी। खासकर 1200 GMT (समय क्षेत्र) के आसपास की तस्वीरों में कई जगहों से आग की लपटें आसमान की ओर उठ रही थीं, और रिफाइनरी के तेल टैंक जल रहे थे, जिससे धुएं का काला गुबार आसमान में फैल गया। यह काला धुआं हवा के साथ खार्तूम की ओर दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था। गौरतलब है कि विद्रोही समूह आरएसएफ ने अप्रैल 2023 में रिफाइनरी पर कब्जा कर लिया था। वे उसे बारूदी सुरंगो से घेरखर रक्षा कर रहे थे।
सूडान सेना का दावा
अब्देस-फत्ताह बुरहान के नेतृत्व वाली सूडान सेना ने इस मामले में दावा किया है कि उन्होंने रिफाइनरी पर कब्जा कर लिया है। देखा जाए तो ये रिफाइनरी सैनिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कारण है कि यह विद्रोही समूह रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के साथ चल रहे गृह युद्ध में एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।
सूडानी सेना का आरोप
साथ ही मामले में सूडानी सेना ने आरएसएफ पर आरोप लगाया कि उन्होंने रिफाइनरी में आग लगाई, ताकि सूडान की बुनियादी संरचनाओं को नष्ट किया जा सके। वहीं, बदले में आरएसएफ ने आरोप लगाया कि सूडानी सेना ने रिफाइनरी पर बमबारी की। हालांकि, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिए। हालांकि रिफाइनरी का महत्वपूर्ण साझेदार चीन ने इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की।
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बता दें कि अल-जैली रिफाइनरी राजधानी खार्तूम से लगभग 60 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। रिफाइनरी पहले भी हमलों का शिकार हो चुकी है क्योंकि आरएसएफ ने अप्रैल 2023 से इस सुविधा पर नियंत्रण का दावा किया है और उनके बल इसकी रखवाली कर रहे थे। वहीं मामले में मीडिया रिपोर्ट की माने तो आरएसएफ ने रिफाइनरी को बारूदी सुरंगों से घेर दिया है, ताकि आगे बढ़ने की गति धीमी हो सके।
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सैटेलाइट तस्वीर से खुलासा
25 जनवरी को उपग्रह से ली गई तस्वीरों में रिफाइनरी में लगी आग की लपेटें और चारों ओर धुआं देखने को मिल रही है। साथ ही आग के कारण, तेल टैंक जल रहे थे और काले धुएं का गुबार खार्तूम की ओर बढ़ रहा था, जो श्वसन समस्याएं और कैंसर का खतरा बढ़ा सकता है। बता दें कि 100,000 बैरल तेल प्रोसेस करने वाली अल-जैली रिफाइनरी गुरुवार तक लगभग सही सलामत थी, लेकिन अगले दिन रिफाइनरी पर एक बड़ा हमला हुआ, जिसके परिणामस्वरूप पूरे परिसर में आग लग गई। नासा के सैटेलाइट से प्राप्त डेटा के अनुसार, इस आग को अब दुनिया भर में जंगल की आग की निगरानी करने वाली प्रणालियों से ट्रैक किया जा रहा है।
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साथ ही मामले में शुक्रवार को प्लैनेट लैब्स पीबीसी द्वारा ली गई उपग्रह तस्वीरों में रिफाइनरी के बड़े हिस्से में आग लगी हुई दिखी। खासकर 1200 GMT (समय क्षेत्र) के आसपास की तस्वीरों में कई जगहों से आग की लपटें आसमान की ओर उठ रही थीं, और रिफाइनरी के तेल टैंक जल रहे थे, जिससे धुएं का काला गुबार आसमान में फैल गया। यह काला धुआं हवा के साथ खार्तूम की ओर दक्षिण की तरफ बढ़ रहा था। गौरतलब है कि विद्रोही समूह आरएसएफ ने अप्रैल 2023 में रिफाइनरी पर कब्जा कर लिया था। वे उसे बारूदी सुरंगो से घेरखर रक्षा कर रहे थे।
सूडान सेना का दावा
अब्देस-फत्ताह बुरहान के नेतृत्व वाली सूडान सेना ने इस मामले में दावा किया है कि उन्होंने रिफाइनरी पर कब्जा कर लिया है। देखा जाए तो ये रिफाइनरी सैनिकों के लिए बहुत महत्वपूर्ण माना जाता है। कारण है कि यह विद्रोही समूह रैपिड सपोर्ट फोर्स (आरएसएफ) के साथ चल रहे गृह युद्ध में एक बड़ी रणनीतिक जीत मानी जा रही है।
सूडानी सेना का आरोप
साथ ही मामले में सूडानी सेना ने आरएसएफ पर आरोप लगाया कि उन्होंने रिफाइनरी में आग लगाई, ताकि सूडान की बुनियादी संरचनाओं को नष्ट किया जा सके। वहीं, बदले में आरएसएफ ने आरोप लगाया कि सूडानी सेना ने रिफाइनरी पर बमबारी की। हालांकि, दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के आरोपों का समर्थन करने के लिए कोई ठोस सबूत नहीं दिए। हालांकि रिफाइनरी का महत्वपूर्ण साझेदार चीन ने इस घटना पर कोई टिप्पणी नहीं की।