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Explainer: समुद्र तल से 7220 फीट ऊंचाई, सांस लेना भी चुनौती; विश्वकप के बीच क्यों चर्चा में यह फुटबॉल स्टेडियम
Sun, 05 Jul 2026 05:56 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 05 Jul 2026 05:56 PM IST
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सार
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मेक्सिको का एज्टेका स्टेडियम।
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
फुटबॉल विश्व कप का रोमांच अपने चरम पर है। लगभग सभी बड़ी टीमें अब तक छोटी टीमों के आगे संघर्ष करती नजर आई हैं। फिर चाहे बात अर्जेंटीना की हो या फ्रांस और या फिर स्पेन की। लगभग सभी टीमों को छोटी या कम प्रचलित टीमों के आगे संघर्ष करना पड़ा है। अब पूरी दुनिया की नजरें लगी हैं 6 जुलाई को सुबह 5.30 बजे (भारतीय समयानुसार) खेले जाने वाले इंग्लैंड और मेक्सिको के मैच पर। यूं तो इंग्लैंड की टीम पारंपरिक तौर पर मजबूत मानी जाती रही है, लेकिन 2026 के फीफा विश्व कप की मेजबानी कर रही मेक्सिको की टीम भी काफी असरदार है। खासकर अपने मैदानों पर, जहां खिलाड़ियों का अनुभव पुराना है।हालांकि, इस बार मुकाबले में अनुभव ही नहीं, बल्कि एक स्टेडियम की लोकेशन भी फुटबॉल विश्व कप में बड़ी भूमिका अदा करने वाली है। यह स्टेडियम है मेक्सिको की राजधानी मेक्सिको सिटी में मौजूद एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम, जो कि खिलाड़ियों के लिए जबरदस्त चुनौती पेश करने वाले मैदानों में गिना जाता है। इसकी सबसे बड़ी वजह है समुद्र तल से इसकी ऊंचाई, जो कि इसे खिलाड़ियों के लिए मुसीबत बना देती है।
आइये जानते हैं कि इंग्लैंड और मेक्सिको के मैच के बीच एस्टाडियो एज्टेका स्टेडियम के चर्चा में आने की क्या वजहें है? इस स्टेडियम का इतिहास क्या है और यहां के कौन से मुकाबले ऐतिहासिक रहे हैं? खिलाड़ियों को इस स्टेडियम में किस तरह की चुनौतियों का सामना करना पड़ता है? इंग्लैंड की टीम को यहां मेक्सिको से ज्यादा मुश्किल होने की संभावना क्यों है? इन परिस्थितियों से निपटने के लिए टीम ने किस तरह से तैयारियां की हैं? आइये जानते हैं...
पहले जानें- एज्टेका स्टेडियम का क्या है इतिहास?
ब्राजील के स्टेडियम को टक्कर देने के लिए हुआ निर्माण
मेक्सिको सिटी के एज्टेका स्टेडियम का इतिहास बेहद समृद्ध और ऐतिहासिक रहा है। इस स्टेडियम का निर्माण 1962 में शुरू हुआ था और इसके वास्तुकार पेड्रो रामिरेज वाजक्वेज और राफेल मिजारेस अल्सेरेका थे। इसे विशेष रूप से 1,00,000 से अधिक दर्शकों की मेजबानी करने और ब्राजील के ऐतिहासिक माराकाना स्टेडियम को टक्कर देने के लिए बनाया गया था।18 करोड़ किग्रा चट्टानों को हटाकर बनाया गया स्टेडियम
यह स्टेडियम एक पुराने ज्वालामुखी लावा क्षेत्र (पेड्रेगल डी सैन एंजेल) पर बनाया गया है। इसके निर्माण के लिए 18 करोड़ किलोग्राम चट्टानों को विस्फोट करके हटाना पड़ा था। स्टेडियम को एक अंडाकार संरचना में बिना किसी आंतरिक स्तंभ के डिजाइन किया गया था, ताकि किसी भी सीट पर बैठे दर्शक को मैदान देखने में परेशानी न हो। भूकंप के खतरे से निपटने के लिए स्टेडियम को चार अलग-अलग खंडों में बांटा गया है जो भूकंप के समय अलग-अलग कंपन झेल सकते हैं। इसी तकनीक ने 1985 में आए 8.0 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप में भी इस स्टेडियम को भारी नुकसान से बचा लिया था। स्थानीय लोग प्यार से इसे 'कोलोसो' कहकर बुलाते हैं।कौन से ऐतिहासिक मुकाबलों का गवाह बना है यह स्टेडियम?
एज्टेका दुनिया का एकमात्र ऐसा स्टेडियम है, जिसने तीन अलग-अलग फीफा विश्व कप (1970, 1986 और 2026) के मैचों की मेजबानी की है। इसके अलावा, यह फीफा के सभी चार वैश्विक पुरुष टूर्नामेंट- विश्व कप, कन्फेडरेशंस कप, अंडर-20 और अंडर-17 विश्व कप की मेजबानी करने वाला इकलौता स्टेडियम भी है।
मेक्सिको का एज्टेका स्टेडियम।
- फोटो :
अमर उजाला
1970 विश्व कप
1986 विश्व कप
इस विश्व कप ने डिएगो माराडोना को अमर कर दिया। इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में माराडोना ने खेल के इतिहास के दो सबसे जाने-माने गोल किए। पहला विवादास्पद 'हैंड ऑफ गॉड' गोल और इसके महज चार मिनट बाद गोल ऑफ द सेंचुरी, जिसमें उन्होंने इंग्लैंड के पांच खिलाड़ियों को छकाते हुए अकेले दम पर गोल दागा था।
- इटली और पश्चिम जर्मनी के बीच हुआ ऐतिहासिक सेमीफाइनल, जिसे अक्सर महानतम मैच कहा जाता है, यहीं खेला गया था। इसमें इटली ने 4-3 से जीत हासिल की।
- इसी मैदान पर महान फुटबॉलर पेले ने अपना तीसरा विश्व कप खिताब जीता था। तब ब्राजील ने फाइनल में इटली को 4-1 से शिकस्त दी थी।
1986 विश्व कप
इस विश्व कप ने डिएगो माराडोना को अमर कर दिया। इंग्लैंड के खिलाफ क्वार्टर फाइनल मैच में माराडोना ने खेल के इतिहास के दो सबसे जाने-माने गोल किए। पहला विवादास्पद 'हैंड ऑफ गॉड' गोल और इसके महज चार मिनट बाद गोल ऑफ द सेंचुरी, जिसमें उन्होंने इंग्लैंड के पांच खिलाड़ियों को छकाते हुए अकेले दम पर गोल दागा था।
2026 के विश्व कप में फिर क्यों चर्चा में यह स्टेडियम?
2026 के फीफा विश्व कप में यह ऐतिहासिक स्टेडियम मुख्य रूप से इंग्लैंड और सह-मेजबान मेक्सिको के बीच होने वाले राउंड ऑफ 16 (प्री-क्वार्टर फाइनल) मुकाबले की वजह से एक बार फिर चर्चा में है। दरअसल, इस मैच को लेकर कई अनोखी और चुनौतीपूर्ण स्थितियां बनी हैं।
इंग्लैंड को 'कर्म' से इंसाफ की उम्मीद: इंग्लैंड की टीम 1986 विश्व कप के क्वार्टर फाइनल के बाद पहली बार इस स्टेडियम में कोई मुकाबला खेल रही है। 1986 में इसी मैदान पर डिएगो माराडोना के विवादास्पद हैंड ऑफ गॉड गोल की वजह से इंग्लैंड टूर्नामेंट से बाहर हो गया था। इंग्लैंड के मैनेजर थॉमस टुशेल ने इस मैच से पहले कहा है कि उन्हें 40 साल बाद इंसाफ मिलने की उम्मीद है।
मेक्सिको का 'अजेय' किला: स्टेडियम की 7220 फीट की ऊंचाई और परिस्थितियों के आदी होने की वजह से मेक्सिको की टीम को यहां कफी फायदा मिलता है। मेक्सिको ने यहां खेले गए 89 प्रतिस्पर्धी मैचों में से 70 जीते हैं और 2013 के बाद से वे यहां पूरी तरह अजेय रहे हैं। विश्व कप मुकाबलों में मेक्सिको कभी इस मैदान पर नहीं हारा है।
मेक्सिको का 'अजेय' किला: स्टेडियम की 7220 फीट की ऊंचाई और परिस्थितियों के आदी होने की वजह से मेक्सिको की टीम को यहां कफी फायदा मिलता है। मेक्सिको ने यहां खेले गए 89 प्रतिस्पर्धी मैचों में से 70 जीते हैं और 2013 के बाद से वे यहां पूरी तरह अजेय रहे हैं। विश्व कप मुकाबलों में मेक्सिको कभी इस मैदान पर नहीं हारा है।
इस स्टेडियम में खेलना कितनी बड़ी चुनौती?
एज्टेका में खेलना दुनिया की किसी भी फुटबॉल टीम के लिए सबसे बड़ी और खतरनाक चुनौतियों में से एक माना जाता है। इस स्टेडियम की चुनौतियां केवल विपक्षी टीम तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यहां का भूगोल, वातावरण और दर्शक भी एक बड़े प्रतिद्वंद्वी की तरह काम करते हैं।1. जानलेवा ऊंचाई और ऑक्सीजन की कमी
यह स्टेडियम समुद्र तल से 2,240 मीटर (7,220 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। इतनी ऊंचाई पर हवा बहुत पतली होती है और ऑक्सीजन का आंशिक दबाव लगभग 20% तक गिर जाता है। इसका मतलब है कि खिलाड़ियों को हर सांस के साथ कम ऑक्सीजन मिलती है, जिससे दिल की धड़कन तेज हो जाती है और उन्हें जल्दी और बहुत तीव्र थकान महसूस होती है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस ऊंचाई पर खिलाड़ियों की अधिकतम एरोबिक क्षमता में लगभग 10% की गिरावट आती है और थकान में 15-20% की बढ़ोतरी होती है। इस स्थिति में शरीर में लैक्टेट जल्दी बनता है, जिससे मांसपेशियों में भारीपन आ जाता है। पूर्व खिलाड़ी नाइजल रीओ-कोकर के अनुसार, शुरुआत के 45-55 मिनट तो खिलाड़ियों को सिर्फ सांस लेने के लिए संघर्ष करना पड़ता है।
2. गेंद की अनूठी और तेज गति
पतली हवा और कम वायु घनत्व के कारण गेंद पर हवा का प्रतिरोध (ड्रैग) 25% तक कम हो जाता है। इसका असर यह होता है कि शॉट और लंबे पास समुद्र तल की तुलना में 5% तक ज्यादा तेजी से और ज्यादा दूरी तक जाते हैं। हवा के कम दबाव के कारण 'मैग्नस प्रभाव' (गेंद का स्पिन या कर्व होना) भी कम हो जाता है। यह स्थिति गोलकीपरों के लिए एक बुरे सपने जैसी होती है, क्योंकि उन्हें गेंद की गति और दिशा का अनुमान लगाने में भारी परेशानी होती है।
3. रिकवरी और हाई-स्पीड रनिंग में गिरावट
ऑक्सीजन की कमी के कारण खिलाड़ियों की हाई-स्पीड रनिंग (तेज दौड़) में 21% तक और मैदान पर कुल दौड़ने की दूरी में 3-9% तक की कमी आ सकती है। खिलाड़ियों को एक स्प्रिंट (तेज दौड़) लगाने के बाद अपनी सांसें वापस सामान्य करने यानी औसत रिकवरी में बहुत ज्यादा समय लगता है। इस स्थिति में मिडफील्डरों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है, क्योंकि उन्हें पूरे मैदान पर भागना होता है। इसके अलावा, दिमाग तक कम ऑक्सीजन पहुंचने से खिलाड़ियों की निर्णय लेने की क्षमता भी बुरी तरह प्रभावित होती है।
4. शोरगुल और डराने वाला माहौल
स्टेडियम का अंडाकार डिजाइन और खड़ी ढलान दर्शकों को पिच के बेहद करीब महसूस कराता है। जब यहां मौजूद हजारों मेक्सिकन फैंस एक साथ शोर मचाते हैं, तो मैदान पर किसी मधुमक्खियों के झुंड जैसी गूंज पैदा होती है, जिससे खिलाड़ियों के लिए मैदान पर आपस में बात करना भी नामुमकिन हो जाता है। विपक्षी टीमों पर मनोवैज्ञानिक दबाव डालने के लिए मेक्सिकन फैंस रात में विपक्षी टीम के होटल के बाहर हॉर्न और लाउडस्पीकर बजाकर उनकी नींद भी खराब करते हैं।
मेक्सिको का एज्टेका स्टेडियम।
- फोटो :
अमर उजाला
5. माहौल में ढलने के लिए समय की कमी
इतनी ऊंचाई के अनुकूल होने के लिए किसी भी टीम को कम से कम 10 दिन से लेकर चार हफ्ते तक के प्रशिक्षण की जरूरत होती है। लेकिन विश्व कप जैसे टूर्नामेंट में इंग्लैंड जैसी टीमों के पास केवल चार दिन का समय होता है। इन सभी शारीरिक, मानसिक और पर्यावरण से जुड़ी चुनौतियों के कारण एज्टेका स्टेडियम में 90 मिनट तक टिके रहना किसी भी विदेशी फुटबॉल टीम के लिए अपनी शारीरिक सीमाओं को पार करने जैसी चुनौती होती है।इंग्लैंड कैसे कर रही इस स्टेडियम की चुनौती से निपटने की तैयारी?
एज्टेका स्टेडियम की खतरनाक ऊंचाई और मेक्सिकन दर्शकों के आक्रामक माहौल से निपटने के लिए इंग्लैंड के मैनेजर थॉमस टुशेल ने शारीरिक, रणनीतिक और मनोवैज्ञानिक स्तर पर कई खास तैयारियां की हैं।1. आखिरी क्षणों में मेक्सिको सिटी पहुंचना
शरीर को 7220 फीट के अनुकूल होने के लिए इंग्लैंड को जरूरी समय मिलना नामुमकिन था, इसलिए टीम के मैनेजर टुशेल ने ऊंचाई के सबसे बुरे शारीरिक प्रभाव को कम करने के लिए मैच से केवल 48 घंटे पहले (शुक्रवार को) मेक्सिको सिटी पहुंचने की जोखिम भरी रणनीति अपनाई है। इसका मकसद खिलाड़ियों के शरीर में सांस से जुड़ी थकान चरम पर पहुंचने से ठीक पहले मैच खेलकर निकलना है।
2. नींद और आराम के लिए स्लीप डिवाइस का इस्तेमाल
मेक्सिकन फैंस रात में विपक्षी टीम के होटल के बाहर लाउडस्पीकर, हॉर्न और मोटरसाइकिल से शोर मचाकर खिलाड़ियों की नींद खराब करने के लिए जाने जाते हैं, जिसका शिकार पिछले मैच में इक्वाडोर की टीम हुई थी। इससे बचने के लिए इंग्लैंड ने अपने होटल का नाम और स्थान गुप्त रखने की कोशिश की है। बाहरी शोर से खिलाड़ियों को बचाने के लिए, टीम प्रबंधन ने सभी खिलाड़ियों को खास स्लीप डिवाइस, जैसे- इयरप्लग, स्लीप बैंड, प्राकृतिक नींद के उपाय और व्हाइट नॉइज ऑडियो मशीन दी हैं।
3. खेल की गति को धीमा करना और गेंद पर कब्जे की नीति
लीड्स की बैकेट यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ रिसर्च फेलो डॉ. बार्नी वेनराइट के मुताबिक, पतली हवा और ऑक्सीजन की कमी के कारण 90 मिनट तक लगातार विपक्षी टीम पर आक्रामक दबाव डालना असंभव होगा। इस समस्या से निपटने के लिए इंग्लैंड अपनी खेल शैली को धीमा करने और गेंद पर अपना कब्जा बनाए रखने की कोशिश कर सकता है। वे ऊर्जा बचाने के लिए लगातार दौड़ने के बजाय सही मौकों का इंतजार करके ही हमले करेंगे।
मेक्सिकन फैंस रात में विपक्षी टीम के होटल के बाहर लाउडस्पीकर, हॉर्न और मोटरसाइकिल से शोर मचाकर खिलाड़ियों की नींद खराब करने के लिए जाने जाते हैं, जिसका शिकार पिछले मैच में इक्वाडोर की टीम हुई थी। इससे बचने के लिए इंग्लैंड ने अपने होटल का नाम और स्थान गुप्त रखने की कोशिश की है। बाहरी शोर से खिलाड़ियों को बचाने के लिए, टीम प्रबंधन ने सभी खिलाड़ियों को खास स्लीप डिवाइस, जैसे- इयरप्लग, स्लीप बैंड, प्राकृतिक नींद के उपाय और व्हाइट नॉइज ऑडियो मशीन दी हैं।
3. खेल की गति को धीमा करना और गेंद पर कब्जे की नीति
लीड्स की बैकेट यूनिवर्सिटी के वरिष्ठ रिसर्च फेलो डॉ. बार्नी वेनराइट के मुताबिक, पतली हवा और ऑक्सीजन की कमी के कारण 90 मिनट तक लगातार विपक्षी टीम पर आक्रामक दबाव डालना असंभव होगा। इस समस्या से निपटने के लिए इंग्लैंड अपनी खेल शैली को धीमा करने और गेंद पर अपना कब्जा बनाए रखने की कोशिश कर सकता है। वे ऊर्जा बचाने के लिए लगातार दौड़ने के बजाय सही मौकों का इंतजार करके ही हमले करेंगे।
4. सब्स्टीट्यूट्स का रणनीतिक इस्तेमाल
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्राइटन में विशेषज्ञ नील मैक्सवेल के मुताबिक, मैच के पहले 45-55 मिनट के बाद थकान और मांसपेशियों में लैक्टेट बनने के कारण खिलाड़ियों की दौड़ने की क्षमता में गिरावट आनी तय है। इस स्थिति से निपटने के लिए दूसरे हाफ में ताजा सब्सटीट्यूट खिलाड़ियों का भारी इस्तेमाल इंग्लैंड की रणनीति का एक बेहद अहम हिस्सा हो सकता है।
5. गर्मी के माहौल में ढलने की कोशिश
मैक्सवेल के मुताबिक, चूंकि इंग्लैंड के पास ऊंचाई का अभ्यास करने का समय नहीं था, इसलिए उन्होंने उन चीजों पर ध्यान केंद्रित किया है जो उनके नियंत्रण में हैं। टीम ने गर्मी के प्रभाव को कम करने और खिलाड़ियों को हाइड्रेटेड रखने पर विशेष फोकस किया है। गर्मी के अनुकूल होने से ऊंचाई पर भी खिलाड़ियों को थोड़ा क्रॉस-एडेप्टिव लाभ मिल सकता है।
यूनिवर्सिटी ऑफ ब्राइटन में विशेषज्ञ नील मैक्सवेल के मुताबिक, मैच के पहले 45-55 मिनट के बाद थकान और मांसपेशियों में लैक्टेट बनने के कारण खिलाड़ियों की दौड़ने की क्षमता में गिरावट आनी तय है। इस स्थिति से निपटने के लिए दूसरे हाफ में ताजा सब्सटीट्यूट खिलाड़ियों का भारी इस्तेमाल इंग्लैंड की रणनीति का एक बेहद अहम हिस्सा हो सकता है।
5. गर्मी के माहौल में ढलने की कोशिश
मैक्सवेल के मुताबिक, चूंकि इंग्लैंड के पास ऊंचाई का अभ्यास करने का समय नहीं था, इसलिए उन्होंने उन चीजों पर ध्यान केंद्रित किया है जो उनके नियंत्रण में हैं। टीम ने गर्मी के प्रभाव को कम करने और खिलाड़ियों को हाइड्रेटेड रखने पर विशेष फोकस किया है। गर्मी के अनुकूल होने से ऊंचाई पर भी खिलाड़ियों को थोड़ा क्रॉस-एडेप्टिव लाभ मिल सकता है।