कृषि जगत के लिए चुनौती: फर्टिलाइजर के अभाव से दुनिया में और गहराई भुखमरी की आशंका
विशेषज्ञों के मुताबिक उर्वरकों की महंगाई का एक कारण यूक्रेन युद्ध जरूर है, लेकिन इसके पीछे दूसरी वजहें भी हैं। उर्वरकों के दाम 2021 से ही बढ़ रहे हैं। उसके पीछे के कारणों में महामारी के दौरान पैदा हुई आपूर्ति समस्या, प्राकृतिक गैस की महंगाई, और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अमेरिका में फर्टिलाइजर उत्पादन में आई बाधा शामिल हैं...
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कई जरूरी वस्तुओं की कमी का पहले से ही सामना कर रही दुनिया के सामने अब उर्वरक के अभाव की समस्या भी खड़ी हो गई है। यह सीधे तौर पर यूक्रेन युद्ध का नतीजा है। निकिल, सिलिकॉन चिप और लकड़ी की कमी के कारण दुनिया भर में उद्योग जगत पहले से परेशान है। अब कृषि जगत के लिए नई चुनौती आ खड़ी हुई है।
दुनिया भर के बाजारों में उर्वरकों के भाव तेजी से चढ़ रहे हैं। इसका असर खाद्य पदार्थों की कीमत पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर ये रुझान जारी रहा, तो दुनिया को गहरे खाद्य संकट का सामना करना पड़ेगा।
महंगे हुए नाइट्रोजन, फॉस्फोरस और पोटैशियम
जो उर्वरक सबसे ज्यादा महंगे हुए हैं, उनमें नाइट्रोजन- फॉस्फोरस और पोटैशियम (एपीके) शामिल हैं। इस साल जनवरी में एक साल पहले की तुलना में एनपीके का दाम 125 फीसदी ऊंचा था। अंतरराष्ट्रीय संस्था- इंटरनेशनल फूड पॉलिसी रिसर्च इंस्टीट्यूट (आईएफपीआरआई) के आंकड़ों के मुताबिक जनवरी के बाद से इसमें 17 फीसदी की और वृद्धि हो चुकी है। आईएफपीआरआई ने आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ने की चेतावनी दी है।
इस संस्था के मुताबिक रूसी प्राकृतिक गैस पर यूरोपीय देशों में लगाए गए प्रतिबंध के कारण हालात बिगड़े हैं। कई उर्वरकों के उत्पादन में प्राकृतिक गैस का इस्तेमाल होता है। उर्वरक बनाने वाली कंपनियां भी इस राय से इत्तेफाक रखती हैं। फर्टिलाइजर उत्पादक कंपनी यारा इंटरनेशनल के सीईओ टोरे होल्सिथर ने इसी हफ्ते एक सेमीनार में कहा- ‘अब हम खतरनाक स्थिति में पहुंच गए हैं। अगर किसानों को कम मात्रा में उर्वरक उपलब्ध होंगे, तो वे कई फसलों की खेती नहीं कर पाएंगे। उससे कुपोषण, राजनीतिक अस्थिरता और अंततः मानव जीवन के लिए खतरा पैदा हो जाएगा।’
विशेषज्ञों के मुताबिक उर्वरकों की महंगाई का एक कारण यूक्रेन युद्ध जरूर है, लेकिन इसके पीछे दूसरी वजहें भी हैं। उर्वरकों के दाम 2021 से ही बढ़ रहे हैं। उसके पीछे के कारणों में महामारी के दौरान पैदा हुई आपूर्ति समस्या, प्राकृतिक गैस की महंगाई, और प्राकृतिक आपदाओं के कारण अमेरिका में फर्टिलाइजर उत्पादन में आई बाधा शामिल हैं। विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि चीन ने पिछली गर्मियों में ही उर्वरक निर्यात रोक दिया था। जबकि दुनिया को 24 फीसदी फॉस्फेट, 13 प्रतिशत नाइट्रोजन, और दो फीसदी पोटाश की सप्लाई चीन ही करता रहा है।
रूस-यूक्रेन युद्ध से हालात और बिगड़े
यूक्रेन युद्ध के कारण हालात ज्यादा बिगड़ गए हैं। इससे काला सागर के रास्ते कारोबार में रुकावट आई है। फिर पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण रूस और उसके सहयोगी देश बेलारूस से उर्वरकों का निर्यात प्रभावित हुआ है। 2020 में रूस ने दुनिया को नाइट्रोजन से बनने वाले उर्वरक यूरिया की 14 फीसदी की आपूर्ति की थी। बेलारूस ने 41 फीसदी पोटाश की सप्लाई की थी। यह पोटैशियम से बनने वाला उर्वरक है।
विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया है कि मौजूदा हालात के बीच धनी देशों को भी खाद्य पदार्थों की महंगाई का सामना करना पड़ेगा। गरीब देशों में तो भुखमरी की स्थिति पैदा हो सकती है। किसानों के संगठन वर्ल्ड फार्मर्स ऑर्गेनाइजेशन के अध्यक्ष थियो डि जैगर ने गुरुवार को कहा था- बहुत-सी जगहों पर खेतों में फसल नहीं उगाई जा सकी हैं। ऐसे में खाद्य संकट को टालना संभव होगा, ये कहना मेरे लिए संभव नहीं है।