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भारत-मालदीव: विदेश मंत्री जयशंकर बोले- समय की कसौटी पर खरे उतरे संबंध क्षेत्र में 'स्थिरता की ताकत' 

Sun, 27 Mar 2022 02:41 AM IST
देव कश्यप पीटीआई, माले
पीटीआई, माले Published by: देव कश्यप Updated Sun, 27 Mar 2022 02:41 AM IST
सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि हम विकास में भागीदार हैं, हम शांति और सुरक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं। हमारे संबंध कई मायनों में इस क्षेत्र के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करते हैं। यह एक साझेदारी है जो अपने हितधारकों के लिए हमारे देशों के नागरिकों के अच्छे और बुरे समय दोनों में काम करती है।
 

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External Affairs Minister S Jaishankar said Time-tested India Maldives relationship is a force for stability in the region
विदेश मंत्री एस जयशंकर और अबदुल्ला शाहिद। - फोटो : Twitter@abdulla_shahid

विस्तार

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर मालदीव और श्रीलंका की अपनी पांच दिवसीय यात्रा के दौरान शनिवार को मालदीव पहुंचे। यहां उन्होंने भारत और मालदीव के बीच संबंधों को समय की कसौटी पर खरा उतरने वाला बताते हुए इसे क्षेत्र की 'स्थिरता की ताकत' कहा। उन्होंने कहा कि इसे बनाए रखना और मजबूत करना दोनों देशों की साझा जिम्मेदारी है।

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उन्होंने कहा, "हम विकास में भागीदार हैं, हम शांति और सुरक्षा को बढ़ावा दे रहे हैं। हमारे संबंध कई मायनों में इस क्षेत्र के लिए एक मॉडल के रूप में कार्य करते हैं। यह एक साझेदारी है जो अपने हितधारकों के लिए हमारे देशों के नागरिकों के अच्छे और बुरे समय दोनों में काम करती है।
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जयशंकर ने कहा, "यह एक साझेदारी है जो क्षेत्रीय विकास की आम चुनौतियों से निपटती है, जो व्यवधानों और आपदाओं को साझा करती है। यह साझेदारी क्षेत्र में स्थिरता के लिए एक ताकत है, इसे पोषित करने और मजबूत करने की हमारी साझा जिम्मेदारी है।"
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दोनों देश कोरोना वैक्सीन प्रमाणपत्रों को मान्यता देने पर सहमत
मालदीव हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के प्रमुख समुद्री पड़ोसियों में से एक है और पिछले कुछ वर्षों में द्विपक्षीय रक्षा और सुरक्षा संबंध आगे की ओर बढ़े हैं। भारत और मालदीव एक-दूसरे द्वारा जारी किए गए कोविड-19 वैक्सीन प्रमाणपत्रों को पारस्परिक रूप से मान्यता देने पर भी सहमत हुए हैं। यह एक ऐसा कदम है जो दोनों देशों के बीच आसान यात्रा की सुविधा प्रदान करेगा और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा देगा।

जयशंकर ने मालदीव को कोविड-19 महामारी पर सफलता पाने के लिए बधाई दी और कहा कि दोनों पक्षों के बीच सहयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मालदीव के राष्ट्रपति इब्राहिम मोहम्मद सोलिह के मार्गदर्शन में महामारी के कहर और पीड़ा को एक साथ देखा और झेला है। उन्होंने कहा, "कोविड-19 प्रमाणपत्रों की पारस्परिक मान्यता पर आज का समझौता उसी दिशा में आगे की ओर बढ़ाया गया एक कदम है और यह निश्चित रूप से हमारे बीच यात्रा को आसान बनाने में योगदान देगा।"

दुनिया के सबसे बड़े दवा निर्माताओं में से एक, भारत के सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) द्वारा निर्मित कोविशील्ड वैक्सीन की दो लाख से अधिक खुराक पिछले साल मालदीव को अनुदान सहायता के हिस्से के रूप में प्रदान की गई थी।

जयशंकर ने विकास साझेदारी को द्विपक्षीय संबंधों का केंद्रीय स्तंभ बताते हुए कहा कि "यह बहुत पारदर्शी साझेदारी है, जो सीधे मालदीव की जरूरतों और प्राथमिकताओं से प्रेरित है, जो आज अनुदान, रियायती ऋण, बजटीय सहायता और क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण सहायता के मामले में 2.6 अरब अमेरिकी डॉलर से ऊपर है।"

जयशंकर ने कहा कि मालदीव के समकक्ष के साथ बातचीत के दौरान उन्होंने द्विपक्षीय साझेदारी पर व्यापक चर्चा की। हमने विभिन्न क्षेत्रों में चल रही परियोजनाओं और पहलों का जायजा लिया। हमने सामाजिक-आर्थिक विकास, व्यापार और निवेश और पर्यटन पर ध्यान दिया। उन्होंने कहा कि भारत अड्डू में बुनियादी ढांचे, पर्यटन, मछली प्रसंस्करण और स्वास्थ्य जैसे कई क्षेत्रों में परियोजनाओं का समर्थन कर रहा है।

उन्होंने कहा कि "मुझे यह जानकर प्रसन्नता हो रही है कि पिछले साल फरवरी में जब मैं यहां आया था, तब चार करोड़ डॉलर की स्पोर्ट्स लाइन ऑफ क्रेडिट (एलओसी) की डीपीआर की घोषणा की गई थी। इस एलओसी के तहत, नेशनल स्टेडियम का नवीनीकरण किया जाएगा और मालदीव में खेल के बुनियादी ढांचे का निर्माण किया जाएगा।" 

भारत-मालदीव ने शिक्षा के क्षेत्र में सहयोग के लिए अहम समझौते पर हस्ताक्षर किए
जयशंकर और मालदीव के उनके समकक्ष अब्दुल्ला शाहिद ने माना कि क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में प्रगति हुई है। दोनों देशों ने एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के साथ ही भारत के राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क (एनकेएन) और मालदीव के हायर एजुकेशन नेटवर्क के बीच संपर्क के लिए मार्ग प्रशस्त किया।

राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क बहु-गीगाबाइट राष्ट्रीय अनुसंधान और शिक्षा नेटवर्क है, जिसका उद्देश्य भारत में शिक्षा तथा अनुसंधान संस्थानों के लिए एकीकृत उच्च गति वाला नेटवर्क मुहैया कराना है। इस नेटवर्क की देखरेख राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र (एनआईसी) करता है।

जयशंकर ने यहां वार्ता के बाद मालदीव के विदेश मंत्री शाहिद के साथ संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘विदेश मंत्री शाहिद और मैंने क्षमता निर्माण और प्रशिक्षण के क्षेत्रों में की गयी प्रगति को स्वीकार किया। समझौते पर हस्ताक्षर के साथ ही सिंगापुर, यूरोप और अमेरिका से 1500 से अधिक भारतीय संस्थान, विश्वविद्यालय और केंद्र भारत के राष्ट्रीय ज्ञान नेटवर्क के जरिए मालदीव से जुड़ गए हैं।’’

जयशंकर ने जलवायु परिवर्तन संबंधी प्रयासों के लिए मालदीव की प्रशंसा की
जयशंकर ने 10 करोड़ डॉलर की ‘जलवायु अनुकूलन’ परियोजन लागू करने के लिए मालदीव सरकार की प्रशंसा की और मालदीव के अपने समकक्ष अब्दुल्ला शाहिद को पड़ोसी देश को ऋण, अनुदान और विकास परियोजनाओं के जरिए भारत की ओर से सहयोग देने का वादा किया।


उन्होंने कहा, "हम पहले ही 34 द्वीप समूहों पर पानी और सफाई की सुविधाओं के विकास में लगे हुए हैं। लेकिन द्वीपीय समुदायों को मूल नागरिक सुविधाएं देने के अलावा मालदीव में 10 करोड़ डॉलर की लागत से चल रहे सबसे बड़े जलवायु अनुकूलन उपायों में से एक परियोजना है। मुझे लगता है कि यह बहुत उल्लेखनीय है।" ‘जलवायु अनुकूलन’ परियोजना का उद्देश्य मालदीव के बाहरी द्वीपों के 1,05,000 लोगों को सुरक्षित एवं स्वच्छ पानी मुहैया कराना है।

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