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एक्सप्लेनर: कोई खरीद रहा जमीन, किसी ने भेजा यान, अब ट्रंप बोले- मेरा है चांद; किसके दावे में दम, क्या है नियम?

Tue, 08 Sep 2026 06:07 AM IST
रिया दुबे स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: रिया दुबे Updated Tue, 08 Sep 2026 06:07 AM IST
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सार
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप के चांद वाले बयान और चांद पर जमीन खरीदने के दावों ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर चांद पर किसका अधिकार है। क्या कोई देश या व्यक्ति चांद की जमीन को अपना बता सकता है, या अंतरराष्ट्रीय कानून इसके आड़े आता है? आइए जानते हैं।
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Explainer, Buying Moon Land, Sending Missions, Now Trump Says ‘Moon Is Mine’: Who Has a Valid Claim?
चांद को लेकर क्या बोले ट्रंप? - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार को चांद को लेकर बड़ा दावा किया। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच ट्रूथ सोशल पर चांद की एक तस्वीर पोस्ट की, जिस पर लिखा था- 'चंद्रमा हमारा है।' तस्वीर में अमेरिकी झंडा भी लगाया गया था। ट्रंप के इस दावे के बीच चांद पर जमीन खरीदने की बात भी सामने आती है। लोग एक-दूसरे को चांद की जमीन जन्मदिन, शादी या दूसरे मौकों पर तोहफे में देने का दावा करते हैं। कई कंपनियां चांद की जमीन के नाम पर प्रमाण पत्र और जमीन के दस्तावेज भी बेचती हैं।


ऐसे में सवाल उठता है कि अगर कोई व्यक्ति चांद पर जमीन खरीद रहा है और अमेरिकी राष्ट्रपति चांद को अमेरिका का बता रहे हैं, तो क्या वास्तव में चांद पर किसी देश, व्यक्ति या कंपनी का अधिकार है? आइए जानते हैं। 

अंतरिक्ष संधि
अंतरिक्ष संधि - फोटो : Amar Ujala

अंतरराष्ट्रीय कानून क्या कहता है?

चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों को लेकर अंतरराष्ट्रीय कानून का बुनियादी ढांचा 1967 की अंतरिक्ष संधि से तय होता है। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, इस संधि पर 1966 में कानूनी उपसमिति में विचार हुआ और उसी साल महासभा में इस पर सहमति बनी। जनवरी 1967 में इसे हस्ताक्षर के लिए खोला गया और अक्तूबर 1967 में यह लागू हुई। इस संधि में भारत, अमेरिका समेत 114 देश शामिल हैं।

संधि में कहा गया है कि अंतरिक्ष की खोज और उसका इस्तेमाल सभी देशों के लाभ और हित में होना चाहिए। इसमें देशों के आर्थिक या वैज्ञानिक विकास के स्तर के आधार पर कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। अंतरिक्ष को पूरी मानवता का क्षेत्र माना गया है।

बाहरी अंतरिक्ष सभी देशों के लिए खोज और इस्तेमाल के लिए खुला है। चांद और दूसरे खगोलीय पिंड भी इसी दायरे में आते हैं। सभी देशों को बराबरी के आधार पर वहां खोज और इस्तेमाल की आजादी है और खगोलीय पिंडों के सभी क्षेत्रों तक स्वतंत्र पहुंच की बात कही गई है। चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों पर वैज्ञानिक अनुसंधान की भी स्वतंत्रता है।

चांद पर क्या किसी देश का कब्जा हो सकता है?

संधि का सबसे अहम नियम अनुच्छेद 2 में दिया गया है। इसमें कहा गया है कि बाहरी अंतरिक्ष, जिसमें चांद और दूसरे खगोलीय पिंड भी शामिल हैं, किसी देश के राष्ट्रीय अधिकार में नहीं आ सकते।

किसी देश के लिए यह संभव नहीं है कि वह संप्रभुता का दावा करके, इस्तेमाल या कब्जे के जरिए या किसी अन्य तरीके से बाहरी अंतरिक्ष या चांद को अपना राष्ट्रीय क्षेत्र बना ले। यानी किसी देश की सरकार यह दावा नहीं कर सकती कि चांद का कोई खास हिस्सा उसके देश का हिस्सा है।

इसी नियम की वजह से ट्रंप का ‘चंद्रमा हमारा है’ वाला दावा अंतरराष्ट्रीय संधि के नियमों के संदर्भ में सवाल खड़ा करता है। संधि किसी देश को चांद के किसी हिस्से पर राष्ट्रीय संप्रभुता या अधिकार स्थापित करने की अनुमति नहीं देती।

फिर चांद पर जाना और वहां काम करना कैसे संभव है?

चांद पर किसी देश का अधिकार नहीं हो सकता, लेकिन वहां जाना या वैज्ञानिक काम करना प्रतिबंधित नहीं है। संधि के अनुसार, चांद समेत अंतरिक्ष सभी देशों के लिए खोज और इस्तेमाल के लिए खुला है। सभी देशों को खगोलीय पिंडों के सभी क्षेत्रों तक स्वतंत्र पहुंच की बात कही गई है।

हालांकि वहां होने वाली गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून के मुताबिक होनी चाहिए। संधि के अनुच्छेद 3 के अनुसार, ऐसी गतिविधियों का उद्देश्य अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखना और देशों के बीच सहयोग व समझ को बढ़ावा देना होना चाहिए।

चांद पर भेजी गई चीज किसकी होती है?

अंतरिक्ष संधि के अनुच्छेद 8 के मुताबिक, किसी देश के पंजीकरण में दर्ज अंतरिक्ष वस्तु पर उस देश का अधिकार और नियंत्रण बना रहता है, जब वह अंतरिक्ष या किसी खगोलीय पिंड पर मौजूद हो।

अंतरिक्ष में भेजी गई वस्तुओं, चांद या किसी दूसरे खगोलीय पिंड पर उतारी या बनाई गई वस्तुओं और उनके हिस्सों का स्वामित्व केवल इसलिए खत्म नहीं होता कि वे अंतरिक्ष या किसी खगोलीय पिंड पर मौजूद हैं।

यानी किसी देश का अंतरिक्ष यान या उपकरण चांद पर पहुंचने के बाद भी उसकी संपत्ति रह सकता है। लेकिन इससे चांद की जमीन पर उस देश का अधिकार स्थापित नहीं हो जाता।

क्या है नियम?
क्या है नियम? - फोटो : Amar Ujala

चांद पर नुकसान होने पर किसकी जिम्मेदारी?

अंतरिक्ष संधि के अनुच्छेद 7 में अंतरिक्ष वस्तुओं से होने वाले नुकसान की जिम्मेदारी की बात की गई है। अगर कोई देश किसी अंतरिक्ष वस्तु को लॉन्च करता है या उसके लॉन्च की व्यवस्था करता है, या किसी देश के क्षेत्र या सुविधा से वह वस्तु लॉन्च होती है, तो उस देश की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी बन सकती है, अगर उस वस्तु या उसके किसी हिस्से से दूसरे संधि-पक्षकार देश या उसके लोगों या कानूनी संस्थाओं को पृथ्वी, हवा, अंतरिक्ष या चांद समेत किसी खगोलीय पिंड पर नुकसान होता है।

दूसरे देशों के हितों का भी ध्यान रखना होगा

अनुच्छेद 9 के अनुसार, चांद समेत अंतरिक्ष और दूसरे खगोलीय पिंडों की खोज और इस्तेमाल में देशों को सहयोग और आपसी सहायता के सिद्धांत का पालन करना होगा।

देशों को ऐसी गतिविधियों से बचना होगा जिनसे अंतरिक्ष या खगोलीय पिंडों में हानिकारक प्रदूषण हो सकता है। अगर किसी देश को लगता है कि उसकी प्रस्तावित गतिविधि या प्रयोग दूसरे देशों की शांतिपूर्ण खोज और इस्तेमाल में संभावित रूप से नुकसान पहुंचा सकता है, तो उसे गतिविधि शुरू करने से पहले उचित अंतरराष्ट्रीय परामर्श करना होगा।

चांद पर मौजूद स्टेशन और उपकरण

अंतरिक्ष संधि का अनुच्छेद 12 चांद पर मौजूद स्टेशनों, प्रतिष्ठानों और उपकरणों को लेकर भी नियम तय करता है। इसके अनुसार, चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों पर मौजूद स्टेशन, प्रतिष्ठान, उपकरण और अंतरिक्ष यान संधि में शामिल दूसरे देशों के प्रतिनिधियों के लिए पारस्परिकता के आधार पर खुले होने चाहिए।

हालांकि किसी प्रतिनिधि की यात्रा से पहले उचित सूचना देनी होगी, ताकि सुरक्षा के लिए जरूरी इंतजाम किए जा सकें और वहां चल रहे सामान्य काम में कोई बाधा न आए।

क्या है नियम?
क्या है नियम? - फोटो : Amar Ujala

क्या निजी कंपनियां चांद पर अपना अधिकार जमा सकती हैं?

अंतरिक्ष संधि के अनुच्छेद 6 के अनुसार, अंतरिक्ष, चांद और दूसरे खगोलीय पिंडों में किसी देश की गतिविधियों की अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारी उस देश की होगी। यह जिम्मेदारी इस बात से नहीं बदलती कि गतिविधि सरकारी संस्था कर रही है या गैर-सरकारी संस्था।

गैर-सरकारी संस्थाओं की अंतरिक्ष गतिविधियों के लिए संबंधित देश की अनुमति और लगातार निगरानी जरूरी है। यानी निजी संस्थाओं की गतिविधियां भी संधि के नियमों के अनुरूप होनी चाहिए।

फिर लोग चांद की जमीन खरीद कैसे रहे हैं?

अंतरराष्ट्रीय कानून में चांद पर निजी जमीन खरीदने का कोई मान्य जमीन-पंजीकरण तंत्र मौजूद नहीं होने के बावजूद ऐसी जमीन बेचने के दावे लंबे समय से सामने आते रहे हैं।

जर्मनी के नागरिक मार्टिन जुर्गेंस ने दावा किया था कि चांद उनके परिवार का है। इसके लिए उन्होंने 18वीं सदी में राजा फ्रेडरिक द ग्रेट की ओर से दिए गए कथित उपहार का हवाला दिया था।

इसके बाद 1980 के दशक में अमेरिकी कारोबारी डेनिस होप ने लूनर एंबेसी नाम की संस्था शुरू की। उन्होंने चांद की जमीन करीब 25 डॉलर प्रति एकड़ में बेचने का दावा किया।

होप ने 1967 की संयुक्त राष्ट्र अंतरिक्ष संधि को पढ़ने के बाद यह माना कि इसमें निजी व्यक्ति के लिए चांद पर जमीन का दावा करने की गुंजाइश बची हुई है। इसके बाद उन्होंने चांद को अपनी संपत्ति घोषित किया, उसे अलग-अलग हिस्सों में बांटा और दुनिया भर के लोगों को प्रमाणपत्र बेचने शुरू किए। इसी तरह की कुछ दूसरी संस्थाएं भी चांद की जमीन के नाम पर दस्तावेज बेचती रही हैं।

हालांकि इन दावों के बावजूद अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत ऐसी बिक्री से चांद की जमीन पर कानूनी मालिकाना हक हासिल नहीं होता। व्यक्ति या कंपनियां चांद की जमीन पर ऐसे संपत्ति अधिकार का दावा नहीं कर सकतीं, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय कानून में मान्यता प्राप्त हो।

फिर लोग ये प्रमाणपत्र क्यों खरीदते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे अलग-अलग वजहें हो सकती हैं। कुछ लोग इसे मजाक या मनोरंजन के तौर पर खरीदते हैं, तो कुछ लोग इसे किसी खास व्यक्ति को तोहफे के रूप में देते हैं। वहीं, कई लोग अंतरराष्ट्रीय कानून को लेकर जागरूक नहीं हैं और इन कंपनियों के झांसे में आ जाते हैं। उन्हें चांद पर जमीन खरीदना निवेश की तरह लगता है जबकि यह केवल एक भ्रम है। 

चांद की जमीन के ऐसे प्रमाण पत्र लोगों की कल्पना को आकर्षित करते हैं, लेकिन इनसे चांद की जमीन पर लागू किया जा सकने वाला वास्तविक संपत्ति अधिकार हासिल नहीं होता।

दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत और अभिनेता शाहरुख खान के बारे में भी ऐसी खबरें सामने आई हैं कि उनके नाम पर इन रजिस्ट्रियों के जरिए चांद पर प्लॉट हैं। बताया गया है कि ऐसे प्लॉट अक्सर प्रशंसकों की ओर से प्रतीकात्मक तोहफे के रूप में खरीदे जाते हैं।

फिलहाल अलग-अलग कंपनियां चांद की जमीन का एक एकड़ करीब 37.50 अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 3,100 रुपये में बेच रही हैं। हालांकि ऐसे प्रमाणपत्र कानूनी मालिकाना हक नहीं देते।

नेशनल जियोग्राफिक की रिपोर्ट में अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष कानून संस्थान की तत्कालीन अध्यक्ष तंजा मैसन-ज़्वान ने भी इस मुद्दे पर टिप्पणी की थी। उनके अनुसार, संधि में लगाए गए प्रतिबंधों से बचने के लिए चांद पर जमीन के दावे को किसी निजी व्यक्ति के नाम पर कर देना पर्याप्त नहीं है।

भारत का मून मिशन
भारत का मून मिशन - फोटो : Amar Ujala

चांद तक पहुंचने का सफर कितना लंबा?

अलग-अलग देशों ने चांद पर पहुंचने और उसका अध्ययन करने में कई उपलब्धियां हासिल की हैं।
  • लूना-1 सोवियत संघ का मिशन था, जिसे 1959 में लॉन्च किया गया था और यह चांद के पास से गुजरने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
  • लूना-2 सोवियत संघ का मिशन था, जिसे 1959 में लॉन्च किया गया था और यह चांद की सतह तक पहुंचने वाला पहला मानव निर्मित अंतरिक्ष यान बना।
  • लूना-3 सोवियत संघ का मिशन था, जिसे 1959 में लॉन्च किया गया था और इसने चांद के उस हिस्से की पहली तस्वीरें भेजीं, जो पृथ्वी से दिखाई नहीं देता।
  • लूना-9 सोवियत संघ का मिशन था, जिसने 1966 में चांद पर पहली सफल सॉफ्ट लैंडिंग की।
  • लूना-10 सोवियत संघ का मिशन था, जो 1966 में चांद की कक्षा में पहुंचने वाला पहला अंतरिक्ष यान बना।
  • अपोलो-8 अमेरिका का मिशन था, जिसने 1968 में पहली बार इंसानों को चांद की कक्षा तक पहुंचाया।
  • अपोलो-11 अमेरिका का मिशन था, जिसने 1969 में पहली बार इंसानों को चांद की सतह पर उतारा और नील आर्मस्ट्रांग चांद पर कदम रखने वाले पहले इंसान बने।
  • लूना-16 सोवियत संघ का मिशन था, जिसने 1970 में रोबोट के जरिए चांद की मिट्टी के नमूने पृथ्वी पर वापस लाए।
  • लूनोखोद-1 सोवियत संघ का मिशन था, जिसने 1970 में चांद की सतह पर पहला सफल रोवर पहुंचाया।
  • अपोलो-15 अमेरिका का मिशन था, जिसमें 1971 में पहली बार मानव मिशन के दौरान चांद की सतह पर रोवर का इस्तेमाल किया गया।
  • अपोलो-17 अमेरिका का मिशन था, जिसने 1972 में अपोलो कार्यक्रम की आखिरी मानव चंद्र लैंडिंग कराई।
  • हितेन जापान का मिशन था, जिसे 1990 में लॉन्च किया गया और यह जापान का पहला चंद्र मिशन था।
  • स्मार्ट-1 यूरोप का मिशन था, जिसे 2003 में लॉन्च किया गया और यह यूरोप का पहला चंद्र मिशन था।
  • चंद्रयान-1 भारत का पहला चंद्र मिशन था, जिसे 2008 में लॉन्च किया गया।
  • चांग'ई-3 चीन का मिशन था, जिसने 2013 में चांद पर चीन की पहली सफल सॉफ्ट लैंडिंग की और रोवर तैनात किया।
  • चांग'ई-4 चीन का मिशन था, जिसने 2019 में चांद के दूर वाले हिस्से पर पहली सफल लैंडिंग की।
  • चंद्रयान-2 भारत का मिशन था, जिसका ऑर्बिटर सफल रहा और उसने चांद की कक्षा से वैज्ञानिक अध्ययन किया।
  • चांग'ई-5 चीन का मिशन था, जिसने 2020 में चांद की सतह से नमूने पृथ्वी पर वापस लाए।
  • आर्टेमिस-1 अमेरिका का मिशन था, जिसमें 2022 में नए रॉकेट और ओरियन अंतरिक्ष यान का बिना चालक दल के परीक्षण किया गया।
  • चंद्रयान-3 भारत का मिशन था, जिसने 2023 में चांद पर सफल सॉफ्ट लैंडिंग की और प्रज्ञान रोवर को चांद की सतह पर उतारा।
  • चांग'ई-6 चीन का मिशन था, जिसने 2024 में चांद के दूर वाले हिस्से से नमूने पृथ्वी पर वापस लाए।
  • ब्लू घोस्ट-1 अमेरिका की निजी कंपनी का मिशन था, जिसने 2025 में चांद पर सफल लैंडिंग की।
  • आर्टेमिस-2 अमेरिका का चालक दल वाला मिशन था, जिसने अप्रैल 2026 में इंसानों को चांद के आसपास पहुंचाया। मिशन करीब 10 दिन चला और चारों अंतरिक्ष यात्री सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे।
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