पश्चिमी धमकियों का नतीजा: अब और भी तेजी से चीन के पाले में जा रहा है रूस
विश्लेषकों का कहना है कि बीते एक दशक से रूस और चीन ने अपने राजनीतिक संबंधों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग को भी मजबूत बनाया है। दोनों देशों ने साल 2024 तक अपने आपसी कारोबार को 200 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है...
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यूक्रेन के मसले पर रूस पर पश्चिमी देशों के बढ़ रहे दबाव के बीच चीन उसका एक बड़ा सहारा बना हुआ है। रूसी विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में बताया कि बीते साल रूस और चीन के बीच व्यापार बढ़ कर 150 बिलियन डॉलर से ज्यादा हो गया। मंत्रालय ने फिर से पुष्टि की कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन बीजिंग विंटर ओलिंपिक खेलों के उद्घाटन समारोह में भाग लेने के लिए चीन जाएंगे। प्रवक्ता ने कहा कि ‘पुतिन की यात्रा सिर्फ रूस और चीन के संबंधों के लिए नहीं, बल्कि वैश्विक घटनाक्रम के लिहाज’ से भी काफी अहम होगी।
चीन से बढ़ता व्यापार रूस के लिए सहारा
पर्यवेक्षकों का कहना है कि जिस समय पश्चिमी देशों से रूस के आर्थिक रिश्तों में और पेचीदगी आ रही है, तब चीन से बढ़ता व्यापार रूस के लिए बड़ा सहारा है। रूस और चीन के बीच आपसी कारोबार में पिछले साल 35 फीसदी से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। इसे देखते हुए रूसी राष्ट्रपति पुतिन की रणनीति में चीन का महत्व और बढ़ गया है। बताया जाता है कि पुतिन चीन यात्रा के दौरान कई खास राजनीतिक और आर्थिक समझौतों पर दस्तखत होंगे। उनमें पॉवर ऑफ साइबेरिया-2 प्राकृतिक गैस पाइपलाइन के निर्माण का करार भी शामिल है।
विश्लेषकों का कहना है कि अगर यूक्रेन को लेकर पश्चिमी देशों के साथ रूस का तनाव बढ़ता रहा, तो रूस और चीन की निकटता और बढ़ेगी। रूस की फार ईस्टर्न फेडरल यूनिवर्सिटी में अंतरराष्ट्रीय संबंध विषय के प्रोफेसर आर्तियोम लुकिन ने वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से कहा कि रूस अब अपने मामलों में चीनी नेताओं से अधिक राय-मशविरा करेगा। मसलन, अगर पश्चिमी देश उस पर और अधिक आर्थिक प्रतिबंध लगाते हैं, तो उनसे निपटने की योजना वह चीन के साथ मिल कर बना सकता है। लुकिन ने कहा- ‘मुझे लगता है कि चीन यात्रा के दौरान पुतिन को चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से कुछ ठोस आश्वासन मिलेंगे। शी यह भरोसा दिला सकते हैं कि अगर रूस पर और सख्त प्रतिबंध लगाए गए, तो चीन उसके साथ कंधा से कंधा मिला कर खड़ा होगा।’
कारोबार 200 बिलियन डॉलर तक पहुंचाने का लक्ष्य
विश्लेषकों का कहना है कि बीते एक दशक से रूस और चीन ने अपने राजनीतिक संबंधों के साथ-साथ आर्थिक सहयोग को भी मजबूत बनाया है। दोनों देशों ने साल 2024 तक अपने आपसी कारोबार को 200 बिलियन डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। बिजनेस एडवाइजरी फर्म डेजेन शिरा एंड एसोसिएट्स के संस्थापक क्रिस डेनोशिर-एलिस का कहना है कि पश्चिम से तनाव बढ़ने का नतीजा यह होगा कि रूस और चीन के रिश्तों को मजबूत करने की प्रक्रिया और तेज हो जाएगी।
हाल के हफ्तों में रूस और पश्चिमी देशों के बीच तनाव बहुत तेजी से बढ़ा है। अमेरिका और यूरोपीय देशों ने रूस के आसपास अपनी सैन्य इकाइयां भेज दी हैं। उन्होंने यूक्रेन पर हमले की स्थिति में रूस पर और भी ज्यादा प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है। लुकिन ने कहा- ‘अगर नए प्रतिबंध लगाए गए, तो साफ है कि रूस के पास चीन से व्यापार बढ़ाने के अलावा कोई और चारा नहीं बचेगा। भले कुछ चीनी उत्पाद अधिक महंगे पड़ें, लेकिन रूस के सामने उनको ही खरीदने की मजबूरी होगी।’