जारी रहेगा संक्रमण के बढ़ने-घटने का क्रम: वैक्सीन से भाग जाएगा कोरोना, ये उम्मीद अब टूट गई है
विशेषज्ञों के मुताबिक एक बड़ा खतरा यह है कि वायरस वैक्सीन को लेकर प्रतिरक्षण क्षमता विकसित कर लेगा। यानी उस पर वैक्सीन का असर खत्म हो जाएगा। अब जानकारों का कहना है कि बीते सवा सौ साल में इन्फ्लूएंजा का जो अनुभव रहा, उससे सबक लिया जाना चाहिए। उससे कोविड-19 से निपटने की राह निकल सकती है...
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अमेरिकी वैज्ञानिकों ने कोरोना महामारी को लेकर चिंताजनक संभावनाएं जताई हैं। इनसे उन लोगों की उम्मीदें टूट सकती हैं, जो अगले छह महीनों में आम जिंदगी शुरू होने की योजना बना रहे हैं। वैज्ञानिकों के मुताबिक अगले छह महीनों तक यही सूरत बनी रहेगी कि स्कूल खुलते-बंद होते रहेंगे, नर्सिंग होम्स में मरीजों का आना जारी रहेगा, और कर्मचारी अपने दफ्तर जाकर काम करने को लेकर भयभीत बने रहेंगे।
विशेषज्ञों का कहना है कि महामारी तभी खत्म होगी, जब या तो सभी लोगों का टीकाकरण हो जाएगा या सभी लोग कोरोना वायरस से संक्रमित हो जाएंगे। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मिनीसोटा में संक्राकम रोग अनुसंधान और नीति विभाग के निदेशक माइकल ओस्टरहोल्म ने ब्लूमबर्ग से कहा- ‘मेरी राय में दुनिया भर में संक्रमण के बढ़ने-घटने का क्रम अभी जारी रहेगा।’
अभी दुनिया में अरबों लोग ऐसे हैं, जिन्हें कोरोना वैक्सीन नहीं लगी है। निकट भविष्य में सबका टीकाकरण हो जाने की कोई उम्मीद भी नहीं दिखती। ऐसे में क्लासरूम, सार्वजनिक परिवहन और कार्य-स्थलों पर संक्रमण फैलने की आशंका बनी हुई है। विशेषज्ञों के मुताबिक सबका टीकाकरण होने के बाद भी आबादी के कुछ हिस्सों के संक्रमित होने की आशंका बनी रहेगी। उनमें नवजात शिशु, ऐसे लोग जिन्हें किसी दूसरी बीमारी के कारण कोरोना का वैक्सीन नहीं लगाया जा सकता, और ऐसे लोग जो टीका लगने के बावजूद संक्रमित हो गए हों, संक्रमण फैलने की वजह बने रहेंगे।
अमेरिका में माना जा रहा है कि अगले कुछ महीने कठिन होंगे। विशेषज्ञों के मुताबिक एक बड़ा खतरा यह है कि वायरस वैक्सीन को लेकर प्रतिरक्षण क्षमता विकसित कर लेगा। यानी उस पर वैक्सीन का असर खत्म हो जाएगा। अब जानकारों का कहना है कि बीते सवा सौ साल में इन्फ्लूएंजा का जो अनुभव रहा, उससे सबक लिया जाना चाहिए। उससे कोविड-19 से निपटने की राह निकल सकती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ डेनमार्क में जन स्वास्थ्य विज्ञान की प्रोफेसर लोन सिमॉनसेन के मुताबिक इन्फ्लूएंजा की सबसे लंबी समय तक चली लहर पांच वर्ष जारी रही थी। उसके बाद हर दो या तीन साल पर उसकी लहर आती रही है। कोविड-19 अब दो वर्ष पूरा कर अपने तीसरे वर्ष में प्रवेश करने वाला है और अभी इसका कोई अंत नजर नहीं आता। इससे अब तक दुनिया में 46 लाख लोग मर चुके हैं। 1918 में आई स्पेनिश फ्लू महामारी के बाद इतने लोग किसी महामारी से नहीं मरे।
अभी हाल यह है कि अमेरिका, रूस, ब्रिटेन और इजराइल जैसे देशों में भी कोरोना संक्रमण की लहरें आ रही हैं, जबकि वहां टीकाकरण की दर काफी ऊंची है। टीके का यह असर हुआ है कि बाद में आई लहरें पहली लहर जितनी घातक साबित नहीं हुईं। लेकिन चिंता की बात यह है कि नौजवानों और नाबालिक बच्चों को ये संक्रमण लगने लगा है, जिनका अभी टीकाकरण नहीं हुआ है।
मलेशिया, मेक्सिको, ईरान और ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में टीकाकरण की दर कम है। वहां कोरोना वायरस के डेल्टा वैरिएंट ने ज्यादा कहर ढाया है। जानकारों के मुताबिक पिछले साल जब कोरोना महामारी आई, तब उम्मीद थी कि टीका बनते ही इस महामारी पर उसी तरह काबू पा लिया जाएगा, जैसा पोलियो पर पाया गया था। लेकिन ये उम्मीद अब टूट चुकी है। इसका साफ संकेत यह है कि कोरोना वायरस संक्रमण से निकट भविष्य में मुक्ति नहीं मिलने वाली है।