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UK: महाराजा रणजीत सिंह की विरासत पर शोध की मांग, सरदार तरलोचन सिंह ने की ब्रिटिश सिख नेताओं से अपील

Wed, 10 Sep 2025 01:24 PM IST
शुभम कुमार वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन Published by: शुभम कुमार Updated Wed, 10 Sep 2025 01:24 PM IST
सार

ब्रिटेन में पूर्व राज्यसभा सांसद सरदार तरलोचन सिंह को उनके काम के लिए सिख ज्वेल अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। इस दौरान उन्होंने ब्रिटिश सिख नेताओं से अपील की कि महाराजा रणजीत सिंह के बिखरे खजानों पर शोध कर उन्हें सूचीबद्ध किया जाए और एक संग्रहालय में संरक्षित किया जाए।

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Ex-MP Tarlochan Singh exhorts parliamentarians to preserve Sikh heritage in UK News In Hindi
ब्रिटिश सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने सरदार तरलोचन सिंह को सिख ज्वेल अवॉर्ड से सम्मानित किया - फोटो : Facebook/Tarlochan Singh MP India

विस्तार

पूर्व राज्यसभा सांसद और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के पूर्व अध्यक्ष सरदार तरलोचन सिंह ने ब्रिटन के सिख सांसदों और नेताओं से एक बड़ी अपील की है। उन्होंने महराजा रणजीत सिंह के बिखरे हुए खजानों पर प्रामाणिक शोध करने की बात पर जोर दिया। ताकि उन्हें सूचीबद्ध कर एक संग्रहालय में संरक्षित किया जा सके।

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पूर्व सांसद तरलोचन लंदन के हाउस ऑफ लॉर्ड्स परिसर में अपने सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। इस दौरान उन्होंने कहा कि महाराजा रणजीत सिंह के तोशाखाने (खजाने) से जुड़ी कई अमूल्य वस्तुएं अब भी ब्रिटेन के विभिन्न संग्रहालयों में बिखरी हुई हैं। बता दें कि इससे पहले ब्रिटिश सांसद तनमनजीत सिंह धेसी ने सरदार तरलोचन सिंह को उनके समाजसेवा और सिख समाज के उत्थान के लिए किए गए कार्यों के लिए सिख ज्वेल अवॉर्ड से सम्मानित किया। 

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महाराजा की धरोहर को एकजुट करने पर जोर
सरदार तरलोचन सिंह ने कहा कि ऐसी ऐतिहासिक रिपोर्टें सामने आई हैं जिनमें ब्रिटिश शासन के समय की एक फाइल में महाराजा के खजाने की सूची दी गई है। उन्होंने कहा कि हमारे बच्चों को अपनी विरासत पर गर्व हो, इसके लिए जरूरी है कि महाराजा रणजीत सिंह के खजानों की सूची जारी की जाए। 

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उन्होंने बताया कि गुरु गोबिंद सिंह जी की पवित्र कलगी, जिसे महाराजा रोज श्रद्धापूर्वक छूते थे, भी उस खजाने में थी। महाराजा की सोने की कुर्सी आज विक्टोरिया एंड अल्बर्ट म्यूजियम में प्रदर्शित है, लेकिन कई वस्तुएं संग्रहालयों में भंडारण में पड़ी हैं, जिन्हें एक छत के नीचे लाकर प्रदर्शित किया जा सकता है। इस दौरान सिंह ने ये भी साफ किया कि उनकी मांग इन वस्तुओं को भारत लाने की नहीं, बल्कि ब्रिटेन में ही उचित देखभाल और प्रदर्शन की है।


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सारागढ़ी युद्ध को लंदन में स्मृति देने की अपील
इसके साथ ही सरदार तरलोचन सिंह ने ब्रिटिश सिख एसोसिएशन से यह भी आग्रह किया कि वे 1897 के सारागढ़ी युद्ध को लंदन में यादगार बनाएं। यह वही युद्ध है जिसमें ब्रिटिश भारतीय सेना की 36वीं सिख रेजिमेंट के 21 सिख सैनिकों ने हज़ारों अफगान कबायलियों से मुकाबला किया था।

लॉर्ड रामी रेंजर ने किया समर्थन
ब्रिटिश सिख एसोसिएशन के अध्यक्ष लॉर्ड रामी रेंजर ने इस विचार का समर्थन करते हुए कहा कि एसोसिएशन इस कार्य के लिए एक "सारागढ़ी मेमोरियल सोसाइटी" बनाएगी। लॉर्ड कुलदीप सिंह साहोता ने वॉल्वरहैम्प्टन में स्थापित हवलदार ईशर सिंह की कांस्य प्रतिमा का ज़िक्र किया, जो सारागढ़ी युद्ध की याद में लगाई गई है।

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