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अमेरिका और ब्रिटेन के नक्शे-कदम पर ईयू, मानवाधिकारों के हनन के आरोपियों पर पाबंदी का बना नियम
Sat, 05 Dec 2020 06:05 PM IST
Harendra Chaudhary
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स
Published by: Harendra Chaudhary
Updated Sat, 05 Dec 2020 06:05 PM IST
सार
ईयू से पहले अमेरिका और ब्रिटेन इस तरह के प्रावधान कर चुके हैं। उनके तहत उन दोनों देशों की सरकारों को मानवाधिकार हनन के मामलों में विदेशी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिला हुआ है...
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यूरोपीय संघ
- फोटो : pixabay
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विस्तार
यूरोपियन यूनियन (ईयू) ने मानवाधिकारों के हनन के आरोपी व्यक्तियों पर प्रतिबंध लगाने का एक नया कायदा तैयार किया है। अभी तक इस आधार पर देशों पर ईयू प्रतिबंध लगाता रहा है। लेकिन अब व्यक्तियों पर अलग से ऐसी पाबंदियां लगाई जा सकेंगी। इस बारे में ईयू ने दो दस्तावेज तैयार किए हैं, जिन्हें औपचारिक रूप से अगले हफ्ते जारी किया जाएगा। लेकिन उसके पहले ये दस्तावेज लीक हो गए हैं। इस बारे में खबर न्यूज वेबसाइट पोलिटिको.ईयू पर छपी है।
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ये दस्तावेज यूरोपियन काउंसिल के फैसले और इसके तहत तैयार किए गए नियमों के हैं। पोलिटिको.ईयू के मुताबिक बीते बुधवार को ईयू देशों के राजदूतों ने इन दस्तावेजों को हरी झंडी दे दी। लेकिन इन्हें मानवाधिकार दिवस के मौके पर 10 दिसंबर को जारी किया जाएगा। इस मामले में ईयू के सदस्य देशों के बीच समझौता साल भर तक चले राय-मशविरे के बाद हो सका है। इससे ईयू कथित मानवाधिकार हनन के मामलों में अधिक लचीलेपन के साथ कदम उठा सकेगा। ईयू के एक अधिकारी ने वेबसाइट पोलिटिको से बातचीत में इसका यह उदाहरण दिया कि अब बिना ‘चीन पर प्रतिबंध लगाए किसी चीनी अधिकारी पर पाबंदियां लगाई जा सकेंगी।’ लेकिन ऐसा कदम उठाने के पहले यह जरूरी होगा कि ईयू के भीतर पूरी सहमति हो।
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ईयू से पहले अमेरिका और ब्रिटेन इस तरह के प्रावधान कर चुके हैं। उनके तहत उन दोनों देशों की सरकारों को मानवाधिकार हनन के मामलों में विदेशी नागरिकों पर प्रतिबंध लगाने का अधिकार मिला हुआ है। उन देशों में इन प्रावधानों को मैगनित्स्की कानून कहा जाता है। ये प्रावधान सर्गेई मैगनित्स्की के नाम से जुड़े हैं, जिनकी 2009 में मास्को में जेल में रहते हुए मृत्यु हो गई थी। लेकिन ईयू ने फैसला किया है कि वह अपने कानून के साथ मैगनित्स्की का नाम नहीं जोड़ेगा, क्योंकि इससे उन देशों को एतराज हो सकता है जो रूस समर्थक रुख रखते हैं।
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ईयू के नियमों के मुताबिक मानवाधिकार हनन के दोषियों पर यात्रा प्रतिबंध ले लेकर उनकी संपत्ति जब्त करने तक के कदम उठाए जा सकेंगे। ये कदम उन लोगों के खिलाफ उठाए जाएंगे, जिन पर जनसंहार, मानवता के खिलाफ अपराध करने, मनमानी गिरफ्तारियां करने या मनमाने ढंग से लोगों को हिरासत में रखने, यातना देने, गुलाम बनाने, और यौन या लिंग आधारित हिंसा करने के आरोप होंगे। इनके अलावा शांतिपूर्ण सभा करने और संघ बनाने के अधिकार का उल्लंघन करने वालों और मानव तस्करी में शामिल लोगों पर भी नए नियमों के तहत कार्रवाई हो सकेगी।
लेकिन ईयू के नए नियमों के तहत भ्रष्टाचार के आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हो सकेगी। ईयू अधिकारियों का कहना है कि ऐसा इसलिए तय हुआ, क्योंकि भ्रष्टाचार की कोई ऐसी परिभाषा नहीं है जो दुनिया भर में मान्य हो। नए नियमों के तहत कार्रवाई में देर ना हो, इसलिए नीदरलैंड्स ने प्रस्ताव रखा था कि फैसले बहुमत के आधार पर हों। लेकिन ये प्रस्ताव मंजूर नहीं हुआ। अंत में फैसला हुआ कि निर्णय सर्व-सम्मति से होगा, तभी प्रतिबंध लगेंगे। राजनयिकों ने पोलिटिको.ईयू से कहा कि सर्व-सम्मति से फैसला लेना मुश्किल जरूर होता है, फिर भी यही तय हुआ ताकि कार्रवाई के वक्त ईयू की मजबूत और एकजुट राजनीतिक इच्छाशक्ति का संदेश जा सके।