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यूरोपियन यूनियन ने माना, मनी लॉन्ड्रिंग है बड़ी समस्या, काबू पाने के लिए बनेगी खास अथॉरिटी

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स Published by: Harendra Chaudhary Updated Fri, 09 Jul 2021 04:37 PM IST

सार

विश्लेषकों का कहना है कि यूरोप में वित्तीय उद्योग को स्वच्छ बनाने की दिशा में नए प्राधिकरण का गठन एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। जानकारों के मुताबिक यूरोप में लगभग 160 अरब यूरो की रकम ऐसी गतिविधियों में लगाई गई है...
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यूरोपीय संघ
यूरोपीय संघ - फोटो : pixabay
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विस्तार

यूरोपियन यूनियन ने शायद पहली बार इतने साफ तौर पर मंजूर किया है कि वह मनी लॉन्ड्रिंग (अवैध ढंग से काले धन को सफेद बनाने) की समस्या से जूझ रहा है। अब ईयू ने इस समस्या से निपटने का फैसला किया है। उसने ईयू क्षेत्र में मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए एक खास संस्था के गठन का फैसला किया है। इस बारे में एक ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिसे इसी महीने जारी किया जाएगा। इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि मनी लॉन्ड्रिंग की समस्या के कारण ईयू की छवि खराब हुई है। इसकी वजह से कई घोटाले हुए हैं।
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वेबसाइट पॉलिटिको.ईयू के मुताबिक उसके पत्रकारों ने ड्राफ्ट का अध्ययन किया है। इसमें ये बात मंजूर की गई है कि मौजूदा संस्था- यूरोपियन बैंकिंग अथॉरिटी (ईबीए)- मनी लॉन्ड्रिंग रोकने में नाकाम रही है। इसलिए अब एक नई संस्था के तौर पर एंटी-मनी लॉन्ड्रिंग अथॉरिटी (एएमएलए) के गठन की सिफारिश की गई है। इस प्राधिकरण को वित्तीय कंपनियों की निगरानी का अधिकार दिया जाएगा। ये संस्था पूरे ईयू क्षेत्र पर नजर रखेगी। जहां नियमों का उल्लंघन होगा, उसमें वह भारी जुर्माना लगा सकेगी। उन कंपनियों पर इस संस्था की खास नजर होगी, जो कई देशों में कारोबार करती हैं, और जिनके काला धन के कारोबार में शामिल होने की संभावना ज्यादा रहती है।


विश्लेषकों का कहना है कि यूरोप में वित्तीय उद्योग को स्वच्छ बनाने की दिशा में नए प्राधिकरण का गठन एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है। जानकारों के मुताबिक यूरोप के कुल धन का एक फीसदी हिस्सा संदिग्ध गतिविधियों में लगा हुआ है। यानी लगभग 160 अरब यूरो की रकम ऐसी गतिविधियों में लगाई गई है।

फिनलैंड से विजयी यूरोपीय संसद की सदस्य इरो हेनालुमा ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा- ‘अभी तक मनी लॉन्ड्रिंग से निपटने के लिए ईयू ईबीए पर निर्भर रहा है, जबकि इस संस्था के पास पर्याप्त अधिकार नहीं हैं। ये बात गुजरे वर्षों में डानस्के बैंक और आईएनजी घोटालों से जाहिर हो चुकी है।’ उन्होंने कहा कि स्पष्ट अधिकारों और संसाधनों के साथ एक खास एजेंसी का गठन इस समस्या को रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।

तैयार ड्राफ्ट में कहा गया है कि नई निगरानी संस्था एक नियमावली से चलेगी, जो पूरे ईयू में लागू होगा। वह कस्टमर चेक की निगरानी करेगी और नकदी कारोबार संबंधी गतिविधियों की सीमा तय करेगी। वित्तीय खुफिया एजेंसियों के बीच समन्वय बनाने की पहल भी इसके साथ ही की जाएगी। बैंकों और कंपनियों ने संदिग्ध गतिविधियों को रोकने के लिए क्या कदम उठाए हैं, नई संस्था उसका विश्लेषण करेगी।

लेकिन पर्यवेक्षकों का कहना है कि इस प्राधिकरण के गठन के लिए अभी लंबी दूरी तय करनी होगी। इस बीच उसे यूरोपीय संसद और ईयू परिषद के बीच बातचीत के जरिए सहमति बनाने की कठिन चुनौती का सामना करना होगा। अगर सारी प्रक्रिया अपने ढंग से आगे बढ़ी, तब भी इस प्राधिकरण का गठन 2026 में जाकर हो पाएगा। ब्रसेल्स स्थित थिंक टैंक सेंटर फॉर यूरोपियन पॉलिसी स्टडीज के मुख्य कार्यकारी करेल लानू ने वेबसाइट पॉलिटिको से कहा कि बेहतर तरीका यह होता कि ईबीए के भीतर एक स्वतंत्र टीम का गठन किया जाता। लेकिन जो रास्ता पकड़ा गया है, उसे पूरा करने में वर्षों लगेंगे।

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