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लगता है 2019 में भी नहीं दिया जाएगा साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार, ये है वजह

Tue, 29 May 2018 01:03 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 29 May 2018 01:03 PM IST
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not sure that Swedish Academy will give Nobel prize for literature in 2019

साहित्य के क्षेत्र में सबसे सम्मानजनक पुरस्कार देने वाली संस्था स्वीडिश अकादमी कुछ समय पहले यौन दुराचार मामले के कारण विवादों में आ गई थी। जिसके बाद इस्तीफों का दौर शुरु हुआ जिसमें फ्रोस्टेंशन और अकादमी की प्रमुख प्रोफेसर सारा डेनियस का नाम भी शामिल था। 

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संस्था ने इसी महीने दिए एक बयान में कहा था कि वह बुरे दौर से गुजर रही है और अपने 69 वर्षों के इतिहास में पहली बार साहित्य के लिए दिए जाने वाले नोबेल पुरस्कार को इस साल नहीं देगी। संस्था ने यह फैसला किया था कि वह 2018 के विजेताओं की घोषणा भी 2019 के विजेताओं के साथ ही करेगी। 
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लेकिन अब खबरें आ रही हैं कि इस नोबल संस्था के निदेशक लार्स हीकेंस्टन ने रेडियो पर दिए साक्षात्कार में कहा है कि शायद 2019 में भी साहित्य के लिए नोबेल पुरस्कार नहीं दिया जाएगा। इससे 232 साल पुराने सांस्कृतिक संगठन में संकट और भी ज्यादा गहराता जा रहा है।
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उन्होंने कहा कि यह पुरस्कार तभी दिए जाएंगे जब स्वीडिश अकादमी लोगों का विश्वास जीत लेगी। इसके लिए 2019 तक कोई समय सीमा नहीं है। उन्होंने कहा कि अकादमी यदि अपनी समस्याएं सुलझा नहीं पाई तो नोबेल संस्था इसकी देख रेख के लिए एक नई संस्था को भी नियुक्त कर सकती है। इसके बाद यदि इसके कानून में किसी प्रकार के संशोधन की आवश्यकता हुई तो वह संस्था ऐसे संशोधन भी करेगी। 

इन कारणों से अकादमी के प्रति विश्वास में आई कमी

not sure that Swedish Academy will give Nobel prize for literature in 2019

बता दें स्वीडिश अकादमी इस वक्त आलोचनाओं का सामना कर रही है। संस्था की एक पूर्व सदस्य के पति फ्रांसीसी फोटोग्राफर ज्यां क्लाउड अर्नाल्ट पर कथित तौर पर यौन दुराचार का आरोप लगा था। 

यह पुरस्कार साल 1901 से दिए जा रहे हैं, लेकिन ये मामला अभी तक का सबसे बड़ा मामला है। जहां अकादमी के कुछ लोगों का कहना है कि परंपरा को बनाए रखने के लिए ये पुरस्कार दिए जाने चाहिए तो वहीं कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि संस्था उस स्थिति में नहीं है कि वह पुरस्कार दे पाए। बता दें पिछले साल नवंबर में #मीटू कैंपेन से प्रेरित होकर 18 महिलाओं ने अर्नाल्ट के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इन सभी आरोपों से अर्नाल्ट ने साफ तौर पर इंकार कर दिया था। 

इसके बाद उसकी पत्नी लेखिका कटरीना प्रोसटेंशन को संस्था ने निकाले जाने के खिलाफ वोट किया था। जिसके बाद ऐसी खबरें भी आईं कि लाभ के पद पर रहते हुए कुछ सदस्यों ने नोबेल पुरस्कार के विजेताओं का नाम लीक किया है। इन्हीं सब कारणों से अकादमी के प्रति लोगों के विश्वास में भी कमी आई है।

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