दावोस से लौटे PM मोदी, दुनिया को आगाह कर दिया भारत में निवेश का न्यौता
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ग्लोबलाइजेशन के विपरीत दुनिया भर में सिर उठा रहे संरक्षणवाद के खिलाफ सख्त संदेश देते हुए कहा कि यह विश्व समुदाय के लिए आतंकवाद एवं जलवायु परिवर्तन की तरह खतरनाक साबित हो सकता है। अमेरिका का नाम लिए बगौर कहा कि कुछ देशों की आत्मकेंद्रित आर्थिक नीतियां इस प्रवृत्ति को बढ़ावा दे रही हैं।
भारत में निवेश का न्यौता
दुनिया भर के उद्योगपतियों को भारत में निवेश का न्यौता देते हुए मोदी ने कहा कि भारत अपनी आर्थिक एवं सामाजिक नीतियों में छोटे-मोटे नहीं बल्कि आमूल-चूल परिवर्तन कर रहा है। भारत को निवेश के लिए जिस तरह से सुगम बनाया जा रहा है, उसकी कोई मिसाल नहीं है। सुधार के एक दो नहीं सैकड़ों कदम उठाए गए हैं। विकास को समावेशी बनाने के लिए सबका साथ सबका विकास का लक्ष्य रखा गया है। मौजूदा सरकार ने साढ़े तीन साल में 1400 पुराने कानूनों को खत्म किया है। 90 फीसदी से ज्यादा विदेशी निवेश अब ऑटोमैटिक रूट खोल दिया गया यानी इसके लिए सरकार एवं उसकी एजेंसियों से अनुमति लेने की जरूरत नहीं है।
जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और संरक्षणवाद की चुनौती
पीएम ने कहा कि तेजी से बदलती दुनिया ने विकास के अवसर पैदा किए हैं तो ऐसी दरारें भी पैदा की हैं जिनकी वजह से साझा चुनौतियों से लड़ने में सहमति का अभाव नजर आ रहा है। उन्होंने पाकिस्तान, चीन और अमेरिका का नाम लिए बगैर कहा कि आज विश्व के सामने आतंकवाद, जलवायु परिवर्तन और संरक्षणवाद की तीन चुनौतियां हैं। आतंकवाद से बड़ा खतरा है अच्छे और बुरे आतंकियों में भेद करना।
पेरिस जलवायु समझौते से अलग हुए अमेरिका पर निशाना साधते हुए कहा कि जब तक इनसान लालच नहीं छोड़ेगा प्रकृति का विनाश नहीं रूकेगा। इसी तरह अमेरिका फर्स्ट की नीति को लेकर भी उन्होंने कहा कि ज्यादा से ज्यादा देश आत्मकेंद्रित होकर संरक्षणवाद के रास्ते पर चल पड़े हैं। चीन को आड़े हाथ लेते हुए कहा कि भारत ने कभी भी राजनीतिक और भौगोलिक विस्तारवाद की नीति नहीं अपनाई, लेकिन आज विश्व को इसकी वजह से बहुत बड़ा खतरा है।
चीन पर भी साधा निशाना
पड़ोसी चीन का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि भारत ने कभी राजनीतिक और भौगोलिक महात्वाकांक्षा नहीं पाली। वह किसी भी देश के प्राकृतिक संसाधनों का शोषण नहीं करता है बल्कि उस देश के लिए उसके साथ मिलकर उसका विकास करता है। यही वजह है कि भारतीय ऋषियों और मनीषियों ने ‘सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया’ यानी सब प्रसन्न हो और सब स्वस्थ हो का सपना देखा और उसे साकार करने का रास्ता भी दिखाया।
जीएसटी का भी जिक्र
उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत के 70 साल के इतिहास में पहली बार देश में एक एकीकृत टैक्स व्यवस्था के रूप में जीएसटी को लागू किया गया है। पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए टेक्नोलाजी का प्रयोग किया जा रहा है। पूरी दुनिया इसका स्वागत कर रही है। भारत में डेमोक्रेसी, डेमोग्राफी और डाइनामिज्म मिलकर डेवलपमेंट को जमीन पर उतार रहे हैं। ये बदलाव 125 करोड़ भारतीय की अपेक्षाओं और उनकी परिवर्तन को स्वीकर करने की क्षमता का यशोगान है।