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दावोस: थोड़ी देर में PM मोदी करेंगे विश्व आर्थिक मंच का उद्घाटन, सुनेगी दुनिया

Tue, 23 Jan 2018 03:19 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 23 Jan 2018 03:19 PM IST
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in Davos from plate to billboard everybody can see the glimpse of India
दावोस

 विश्व आर्थिक मंच की बैठक में दुनिया भर के बड़े नेताओं, कारोबारियों, उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों का जमावड़ा होता है। लेकिन इस बार का सम्मेलन खास है। भारत वैश्विक निवेश के लिए दुनिया से सीधी बात करने जा रहा है। पीएम मोदी थोड़ी देर में सम्मेलन के उद्घाटन सत्र में अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ भारत के भविष्य संबंधों पर अपना नजरिया दुनिया के सामने रखेंगे। उनकी कोशिश यह बताने की होगी कि अब भारत का मतलब बिजनेस है। दुनिया की सबसे तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए बेकरार है। 

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स्विट्जरलैंड का बर्फ से ढंका रिसॉर्ट कस्बा दावोस, जिसे कभी स्वास्थ्य पर्यटन, स्किइंग, शीत कालीन अन्य खेलों और शून्य से नीचे के तापमान के लिए जाना जाता था, आज वहां हर ओर भारत की झलक मिल रही है। इमारतों की छत से लेकर बसों पर लगे बड़े-बड़े होर्डिंग (बिलबोर्ड) भारत और भारतीय कंपनियों का प्रचार कर रहे हैं। भारी बर्फ बारी से सड़कें बेहद संकरी हो गई हैं, लेकिन निजी और सरकारी कर्मियों की आवाजाही में कोई कमी नहीं आई है।
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भारत सरकार के आधिकारिक लाउंज में चाय, पकौड़ा, वड़ा पाव से लेकर डोसा की काफी मांग रही। यहां आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र सरकार ने भी अपने लाउंज बना रखे हैं। इसके अलावा कई भारतीय कंपनियों के भी काउंटर बने हुए हैं। पांच दिवसीय यह बैठक इस बार काफी बड़ी लग रही है और बर्फबारी भी खूब हो रही है, जिससे सोमवार सुबह से ही सारे रास्ते बंद हो गए थे। स्विस रिजॉर्ट में सामान्य से तीन गुना भीड़ है, लेकिन लोगों के उत्साह में कोई कमी नहीं नजर आई। कमी हो भी कैसे 70 देशों के राष्ट्राध्यक्ष सम्मेलन में हिस्सा लेने वाले हैं और बिजनेस क्षेत्र की भी 3000 से ज्यादा हस्तियां पहुंचने वाली हैं। सम्मेलन को कवर करने के लिए करीब दो हजार पत्रकार भी पहुंचेंगे। 

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दुनिया को बताएंगे मोदी, भारत मतलब बिजनेस

in Davos from plate to billboard everybody can see the glimpse of India
prime minister narendra modi
पीएम खुद कह चुके हैं कि दुनिया भारत की नीतियों और विकास की क्षमताओं की कहानी उसके मुखिया से सुनना चाहती है। दावोस में 125 करोड़ भारतीयों की सफलता की कहानी सुनाने में उन्हें बहुत गर्व होगा। हाल ही में मोदी ने कहा था कि भारत ने दुनिया भर में अपनी छाप छोड़ी है इसलिए अब उसका लाभ उठाने की जरूरत है। भारत की अर्थव्यवस्था तेजी से आगे बढ़ रही है। सभी वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने इसे मान्यता दी है। बड़े बाजार के तौर पर ताकत बढ़ाने के लिए दावोस एक बेहतरीन अवसर है।

पीएम मोदी 21 साल बाद दावोस जाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री हैं। 1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री एच डी देवगौड़ा दावोस बैठक में शामिल हुए थे। इसमें करीब 2500 लोग हिस्सा लेते हैं। इसे खास वर्ग के सम्मेलन के रूप में देखा जाता है। दावोस में सरकारी और गैर-सरकारी लोग और संगठन एक साथ मिलकर वैश्विक विकास के लिए फैसले लेते हैं। पांच दिन तक चलने वाली इस 48वीं बैठक में व्यापार, राजनीति, कला, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों से कई नामी हस्तियां शिरकत करेंगी। भारत की ओर से पीएम मोदी समेत 130 लोग इसमें शामिल होंगे।


क्या है विश्व आर्थिक मंच
विश्व आर्थिक मंच का मुख्यालय जिनेवा में है। यह एक गैर-लाभकारी संस्था है। इसका उद्देश्य विश्व में बिजनेस राजनीति, शिक्षा और अन्य क्षेत्रों में कार्य करने वाले प्रभावी लोगों को एक मंच पर लाकर वैश्विक, औद्योगिक दिशा तय करना है। इसकी स्थापना 1971 में जिनेवा विश्वविद्यालय में कार्यरत प्रोफेसर एम श्वाब ने की थी। तब इसका नाम यूरोपियन प्रबंधन था। 1971 में ही यूरोपीय आयोग और यूरोपीय प्रौद्योगिकी संगठन के सहयोग से इस संगठन की पहली बैठक हुई। 1976 में इस मंच ने दुनिया की 1000 प्रमुख कंपनियों को सदस्यता देना शुरू किया। वर्ष 1987 में इसका नाम विश्व आर्थिक मंच कर दिया गया। तब से अब तक, हर साल जनवरी में इसकी बैठक आयोजित होती है। साल 2015 में इस मंच को आर्थिक संस्थान के रूप में मान्यता मिली।

सिर्फ एक बार दावोस से बाहर हुई बैठक 
विश्व आर्थिक मंच की बैठक हमेशा दावोस में होती है। लेकिन एक बार ऐसा मौका आया जब यह न्यूयॉर्क में आयोजित की गई। अमेरिका पर 9/11 के आतंकी हमले के बाद 2002 में इसका आयोजन न्यूयॉर्क में हुआ। यह फैसला अमेरिका और उसे लोगों के साथ एकजुटता प्रदर्शित करने को लिया गया।


 
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