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ICJ चुनाव में मजबूत भारतीय पक्ष से घबराया यूके, अब UN में अटकाएगा रोड़े

Sun, 19 Nov 2017 10:41 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला
टीम डिजिटल/अमर उजाला Updated Sun, 19 Nov 2017 10:41 AM IST
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 icj election: india denies talks with uk for judge dalveer bhandari's withdrawal
दलवीर भंडारी - फोटो : FILE PHOTO
भारत और यूनाइटेड किंगडम (यूके) के राजनियक रिश्ते अब तक के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है। दरअसल दोनों देशों के राजनयिक रिश्तों में यह दरार अंतरराष्ट्रीय कोर्ट ऑफ जस्टिस (आईसीजे) में हो रहे चुनाव में भारतीय उम्मीदवार दलवीर सिंह भंडारी के समर्थन में इजाफे की वजह से पड़ी है। अब यूएन भारतीय उम्मीदवार के रोड़े में संयुक्त राष्ट्र (यूएन) में अड़ंगा लगाना की प्लानिंग कर रहा है। 
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यूके आईसीजे में अपने उम्मीदवार को जीताने के लिए कुछ ऐसा प्लान कर रहा है जो पहले कभी नहीं हुआ है। यूके भारतीय उम्मीदवार को रोकने के लिए यूएन में होने वाली आखिरी वोटिंग में रोकने की कोशिश में लगा हुआ है। इसके लिए यूके ने ऐसे संकेत दिए हैं कि वो यूएन में अपनी स्थायी सदस्यता का इस्तेमाल भी कर सकता है। 
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बता दें कि नीदरलैंड के हेग में स्थित अंतरराष्ट्रीय अदालत (ICJ) में बतौर जज दूसरे कार्यकाल के लिए भारतीय जज दलवीर भंडारी का चुनाव अटक गया है। एक सीट पर चुनाव के लिए भारत के दलवीर भंडारी और ब्रिटेन के क्रिस्टफर ग्रीनवुड के बीच सोमवार को भी चुनाव बेनतीजा रहा। ऐसे में भारत की तरफ से भंडारी को चुने जाने के लिए फिर से अभियान चलाया गया। 
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ये भी पढ़ेंः ICJ में बने रहेंगे इंटरनेशनल कोर्ट में कुलभूषण मामले की सुनवाई करने वाले जज


इससे पहले यह अफवाह भी उड़ी थी कि भारत ने ब्रिटिश उम्मीदवार क्रिस्टोफर ग्रीनवुड के पक्ष में अपने उम्मीदवार दलवीर सिंह भंडारी का नाम वापस लेने के लिए ब्रिटेन से बातचीत की है। भारत ने इस सभी अफवाहों का खंडन करते हुए संयुक्त राष्ट्र महासभा में भारत के स्थायी प्रतिनिधि सैयद अकबरुद्दीन ने कहा कि हम इस बात को समझते हैं कि कुछ ऐसा माहौल बनाने की कोशिश की जा रही है कि भारत और ब्रिटेन वार्ता कर रहे हैं और न्यायाधीश भंडारी अपना नाम वापस ले सकते हैं क्योंकि उन्हें शायद जीतने का मौका नहीं मिले। 

अकबरुद्दीन ने 160 से अधिक प्रतिनिधियों के साथ भंडारी के स्वागत समारोह की घोषणा करते हुए कहा कि जब तक बहुमत का नतीजा आ नहीं जाता, तब तक हम यहां चुनाव में बने रहने का इरादा रखते हैं। उम्मीदवार को महासभा और परिषद दोनों में स्पष्ट बहुमत हासिल करना होगा।  
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