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सेक्स की पूर्ण आजा़दी: मंज़िल अभी दूर है

Sat, 18 May 2013 07:43 AM IST
Updated Sat, 18 May 2013 07:43 AM IST
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homophobia survey in europe

यूरोप में समलैंगिकों को अपने यौन चयन के कारण हिंसा या नफ़रत का सामना करना पड़ रहा है।

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यूरोपीय संघ द्वारा करवाए गए एक सर्वेक्षण में शामिल एक चौथाई समलैंगिकों ने माना कि पिछले पांच साल में उन पर या तो हमला किया गया है या फिर हिंसा की धमकियां दी गई हैं।

सर्वे के अनुसार गरीब और युवा समलैंगिकों को अपनी यौन पसंद के कारण भेदभाव का ज़्यादा सामना करना पड़ रहा है।

चुनौतियां

यूरोपीय संघ की मूलभूत अधिकार संस्था (एफ़आरए) ने यूरोप और क्रोएशिया में 93,000 लोगों को सर्वे में शामिल किया। इसे अपनी तरह का सबसे विस्तृत सर्वे मानाया गया।
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होमोफ़ोबिया (समलैंगिकों के प्रति नकारात्मक दृष्टि) और ट्रांसफ़ोबिया (लिंग परिवर्तन करवाने वालों के प्रति नकारात्मक दृष्टि) के विरुद्ध शुक्रवार को अंतरराष्ट्रीय दिवस मनाया गया।
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हेग से बीबीसी संवाददाता एन्ना होलिगन कहती हैं कि ईयू एलजीबीटी या क्लिक करें लेस्बियन गे बायसकेक्सुअल ट्रांसजेंडर सर्वेक्षण में कुछ चिंताजनक बातें सामने आई हैं।

हेग में करीब 300 राजनेता और विशेषज्ञ होमोफ़ोबिया को दूर करने के लिए यूरोपियन यूनियन की नई नीतियों पर चर्चा के लिए एकत्र हो रहे हैं।

एफ़आरए के निदेशक मॉर्टेन कियारम कहते हैं, यूरोपीय संघ से एलजीबीटी के प्रति भेदभाव ख़त्म करने की कोशिशों के सामने “बड़ी चुनौतियां” हैं।

एफ़आरए को यकीन है कि सर्वे से मिली जानकारियां एलजीबीटी लोगों के हकों के लिए काम करने में नीति निर्माताओं की मदद करेगी।

नीदरलैंड्स के एक होमोसेक्सुअल जॉन वान ब्रीउगेल ने बीबीसी को बताया कि वह समस्या के इतने बड़े पैमाने पर मौजूद रहने से हैरान रह गए थे।

'मुंह पर थूका'

उन्होंने कहा कि अपनी ज़िंदगी में वह सिर्फ़ दो बार होमोफ़ोबिक दुर्व्यवहार के शिकार हुए हैं।

उन्होंने बताया, “पहली बार जब मैं जर्मनी में अपने बॉयफ्रेंड के साथ था एक युगल हमारे पास आया और हमें ‘गंदे गे’ कहा।”

दूसरी बार जब वह लंदन में थे और दुकानों की तरफ़ बढ़ रहे थे तब किसी आकर उनके मुंह पर थूक दिया।

हमलावर को गे नाइट क्लब के पास देखकर जॉन ने क्लब के बाउंसरों को इसकी जानकारी दी। फिर वहां कुछ विवाद हुआ और उस व्यक्ति को गिरफ़्तार कर लिया गया।

जॉन कहते हैं, “17 साल की उम्र में मैंने लोगों को बताया कि मैं गे हूं। इसके बाद मेरे सबसे अच्छे दोस्त ने मुझसे कभी बात नहीं की लेकिन बाकी सभी ठीक थे। मेरे परिवार और दोस्तों को कोई दिक्कत नहीं थी।”


वह कहते हैं कि यूरोपीय यूनियन को गे लोगों पर नफ़रत भरे हमले रोकने के लिए जो हो सके वह करना चाहिए। ज़रूरत पड़े तो उन देशों पर प्रतिबंध भी लगा देने चाहिए जहां ऐसे हमलों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

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