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फेंकों मत गरीबों को खिलाओ:जर्मन मंत्री

Sun, 24 Feb 2013 01:21 PM IST
Updated Sun, 24 Feb 2013 01:21 PM IST
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german minister suggested to distribute horse meat affacted food among poors

जर्मनी के विकास मंत्री ने यह सुझाव दिया है कि खाने की जिन चीजों में गाय के मांस के नाम पर घोड़े के मांस इस्तेमाल किया गया है उसे गरीबों में बांट देना चाहिए।

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सत्तासीन दल सीडीयू पार्टी के एक सदस्य के प्रस्ताव का समर्थन करते हुए डर्क निबेल ने कहा है, “हम खाने के अच्छे सामान को नहीं फेंक सकते हैं।” हालांकि विपक्ष ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया है लेकिन एक पादरी ने कहा कि इस पर विचार किया जाना चाहिए।
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इटली की एक कंपनी से जब्त किए गए करीब छह टन गाय के मांस के टुकड़े और लजानिया बोलोनिज के 2,400 पैकेटों में घोड़े के मांस के अंश पाए गए। इन उत्पादों को बलोनी के नजदीक मौजूद इटली के समूह प्रिमिया में पैक किया गया था।
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स्वास्थ्य मंत्री का कहना है कि प्रिमिया ने ब्रेशा में दूसरी कंपनी के मांस का इस्तेमाल किया था और इसकी आपूर्ति मूलतः दो अन्य कंपनियों ने की थी जो यहीं की हैं।

क्या है मामला

पिछले महीने से ही घोड़े के मांस का विवाद उभरा है और उसके बाद से इटली में यह पहला सकरात्मक परीक्षण है।

शनिवार को इटली के अधिकारियों ने कहा कि उन्हें स्विट्जरलैंड की खाद्य उत्पाद बनाने वाली दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी नेस्ले से जब़्त किए गए गाय के मांस से बने उत्पादों में घोड़े के मांस का कोई अंश नहीं था।

खाद्य उत्पादों में घोड़े के डीएनए होने का खुलासा होने पर सोमवार को नेस्ले ने यह घोषणा की थी कि वह इटली और स्पेन के सुपरमार्केट से दो तरह के गाय के मांस वाले पास्ता को हटा लेगा।

कंपनी ने कहा कि जर्मनी के आपूर्तिकर्ता एच जे स्काईपके के साथ भी इस तरह की दिक्कत आई।

दो अन्य जर्मनी की कंपनियां द्रिस्तेम कंजरवन और वोस्को पर भी यह आरोप लगा है कि उन्होंने जिन खाद्य उत्पादों को तैयार कराया उसमें घोड़े के मांस के अंश थे। दोनों कंपनियों ने इसके लिए अपने आपूर्तिकर्ताओं को दोषी ठहराया है।

शुक्रवार को जर्मनी के उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय ने यह घोषणा की कि उसे 830 खाद्य पदार्थों के परीक्षण के दौरान 67 उत्पादों में घोड़े का डीएनए मिला।

प्रस्ताव पर विवाद

शनिवार को जर्मनी की सत्तासीन सीडीयू पार्टी के एक अहम सदस्य हार्टविग फिशर ने बिल्ड अखबार से कहा है कि घोड़े के मांस वाले उत्पाद को गरीबों में बांट दिया जाना चाहिए।

बर्लिन में मौजूद बीबीसी संवाददाता स्टीव इवांस का कहना है कि सभी ने ऐसे विचार व्यक्त किए जिनमें निबेल भी शामिल हैं जिन्होंने यह कहा कि दुनिया में 80 करोड़ लोग भूखे हैं।


उनका कहना था, “दुर्भाग्य से जर्मनी में ऐसे लोग हैं जो खाने में ज्यादा पैसे खर्च नहीं कर सकते है। हम जर्मनी में यूं ही अच्छा खाना नहीं फेंक सकते हैं।”

विपक्ष ने भले ही घोड़े के मांस से बने सामान को गरीबों को बांटने के विचार को खारिज कर दिया हो लेकिन पादरी का कहना है, “आमतौर पर हम यह देख रहे हैं कि सामान को फेंकने की प्रवृति चिंताजनक तरीके से बढ़ रही है। अभी इस सवाल पर विचार करना बाकी है कि उत्पादों का वितरण कैसे किया जाए।”

फ्रांस के राष्ट्रपति फ्रांसवा होलांडे ने पेरिस में सालाना फार्म शो में शिरकत की और देश के खाद्य उद्योग में भरोसा बनाए रखने की बात भी की।

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