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आईसीजे में दलवीर भंडारी की जीत ‘अपमानजनक झटका’: ब्रिटिश मीडिया

Wed, 22 Nov 2017 11:39 AM IST
एजेंसी, लंदन
एजेंसी, लंदन Updated Wed, 22 Nov 2017 11:39 AM IST
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Defeat at International Court of Justice is a humiliating blow says British Media
फाइल फोटो - फोटो : catch news

अंतरराष्ट्रीय अदालत (आईसीजे) में ब्रिटिश उम्मीदवार को भारत के जस्टिस दलवीर भंडारी के हाथों मिली शिकस्त को वहां का मीडिया पचा नहीं पा रहा है। उसने इसे ‘अपमानजनक झटका’ बताया है।

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समूची ब्रिटिश मीडिया ने एक स्वर में आईसीजे में ब्रिटेन की हार को बड़ा राजनयिक झटका मानते हुए इसे वैश्विक मंच पर घटती साख का प्रतीक बताया है। हालांकि भारत ने कहा है कि इसे कड़े मुकाबले का दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
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ब्रिटेन में भारत के कार्यकारी उच्चायुक्त दिनेश पटनायक ने दोहराया कि दोनों देशों के राजनयिक शुरुआत से ही एक-दूसरे के संपर्क में थे। यह भारत और ब्रिटेन के मजबूत संबंधों को दर्शाता है। उन्होंने कहा, ब्रिटिश विदेश विभाग के एक वरिष्ठ प्रतिनिधि से शुरुआत से संपर्क बना हुआ था। यह इस बात को दर्शाता है कि दोनों मित्र देशों में एक जैसी कानूनी प्रणाली चल रही है।
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पढ़ें- 1946 के बाद पहली बार ICJ में नहीं होगा ब्रिटेन, दलवीर की जीत को भारत ने बताया 'ऐतिहासिक'

यह पूरी प्रक्रिया सौहार्दपूर्ण रही और ये किसी भी तरह से दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों को प्रभावित नहीं करेगी। दरअसल, न्यूयार्क में 11वें दौर की वोटिंग शुरू होने से कुछ मिनट पहले ही ब्रिटिश दूतावास की ओर से संयुक्त राष्ट्र को एक पत्र जारी किया गया। इसमें यह घोषणा की गई कि सर क्रिस्टोफर ग्रीनवुड ने हार स्वीकार कर ली है और वह संयुक्त राष्ट्र की हेग स्थित मुख्य कानूनी संस्था में खाली पद को अपने भारतीय प्रतिद्वंद्वी द्वारा भरे जाने को स्वीकार करते हैं।

71 साल के इतिहास में अंतरराष्ट्रीय अदालत की पीठ में ब्रिटेन का कोई जज नहीं होगा। संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने प्रतिद्वंद्वी के आगे झुकने का फैसला ब्रिटेन की अंतरराष्ट्रीय साख को लगा अपमानजनक झटका है। यह अंतरराष्ट्रीय मामलों में ब्रिटेन की कम होती प्रतिष्ठा को स्वीकार करने जैसा है।
- द गार्डियन

एक संगठन में जगह पाने में ब्रिटेन की नाकामी यह स्थापित करती है कि वैश्विक स्तर पर उसकी अप्रासंगिकता बढ़ती जा रही है। यह सब यूरोपीय संघ से अलग होने के फैसले के बाद शुरू हुआ है।
- इंडीपेंडेंट

ज्यादातर विकासशील देशों का प्रतिनिधित्व करने वाला तथाकथित ग्रुप 77 लगातार प्रभाव बढ़ाने का प्रयास कर रहा है। ब्रिटेन पर भारत की जीत को जी-77 की बड़ी सफलता के तौर पर देखा जाएगा। जिसमें सुरक्षा परिषद में पारंपरिक उत्तरी शक्तियों को उन्होंने पीछे धकेल दिया।
- बीबीसी

आईसीजे में ब्रिटेन को लगा बड़ा झटका

Defeat at International Court of Justice is a humiliating blow says British Media

राजनीतिक टिप्पणीकारों का मानना है कि ब्रिटेन के पास पीछे हटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। वह महत्वपूर्ण वैश्विक मामलों में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अपने कद का इस्तेमाल अपने पक्ष में करने में नाकाम रहा। पिछले कुछ समय में हुई घटनाओं को भी देखें तो शुरुआत ब्रेग्जिट के पक्ष में हुई वोटिंग से हुई। इससे लंदन ने यूरोपीय यूनियन के दो प्रतिष्ठित संस्थानों को गंवा दिया।

यूरोपीय बैंकिंग अथॉरिटी पेरिस और यूरोपीय मेडिसिन एजेंसी एम्सटर्डम के पास चली गई। आईसीजे में ब्रिटेन को बड़ा झटका लगा है, क्योंकि वह संयुक्त राष्ट्र के संस्थापक सदस्यों में से एक है। साथ वह आईसीजे की 1946 में शुरुआत के बाद से ही इसकी पीठ में शामिल रहा है।

...हम निराश हैं
ब्रिटेन का यह मानना था कि सुरक्षा परिषद और संयुक्त राष्ट्र महासभा के कीमती समय को आगे के राउंड की वोटिंग के लिए खराब करना गलत होगा। निश्चित तौर पर हम निराश हैं लेकिन यह ऐसा मुकाबला था, जहां छह मजबूत प्रत्याशी मैदान में थे।
- मैथ्यू रायक्रॉफ्ट, संयुक्त राष्ट्र में ब्रिटेन के राजदूत

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