{"_id":"59ec783a4f1c1b9f678b6bef","slug":"british-indian-couple-launch-awareness-drive-in-memory-of-daughter","type":"story","status":"publish","title_hn":"बेटी की याद में भारतीय दंपति ने चलाया एलर्जी पर अनोखा अभियान","category":{"title":"Europe","title_hn":"यूरोप","slug":"europe"}}
बेटी की याद में भारतीय दंपति ने चलाया एलर्जी पर अनोखा अभियान
टीम डिजिटल/अमर उजाला
Updated Sun, 22 Oct 2017 05:32 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
ब्लैकबेरी और दुग्ध उत्पादों के गंभीर रिऐक्शन के कारण अपनी नौ वर्षीय बेटी खो चुके भारतीय मूल के एक दंपति ने एलर्जी को लेकर एक अनोखा अभियान शुरू किया है। यह दंपति पूरी दुनिया में एलर्जी के खतरों के प्रति लोगों को जागरूक करेगा।
दंपति की बेटी नयनिका के नाम पर बकायदा नयनिका टिक्कू मेमोरियल ट्रस्ट (एनटीएमटी) फॉर एलर्जी केयर ऐंड ब्रेन रिसर्च नामक गैर-लाभकारी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की गई है।
इसका मकसद एलर्जी से बचने का प्रशिक्षण और उसके इलाज में अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह ट्रस्ट ब्रिटेन में काम शुरू करेगा लेकिन इसे भारत सहित पूरी दुनिया में ले जाने की योजना है।
विज्ञापन
अपनी बेटी खो चुकीं लक्ष्मी कौल इस ट्रस्ट की स्थापना के लिए लगातार मेहनत की हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान को बढ़ावा देने की कोशिश के तहत हम दुनिया के अलग-अलग देशों की घटनाओं को भी दर्ज करना चाहते हैं।
लक्ष्मी कहती हैं कि प्राथमिक तौर पर ऐसा कहा जाता है कि यह पश्चिम की समस्या है और भारत सहित पूर्वी देशों में इसका अस्तित्व नहीं है। लेकिन, हम विभिन्न देशों में इस समस्या के प्रकार और उसके आकार की तुलना करना चाहते हैं।
विज्ञापन
दंपति की बेटी नयनिका के नाम पर बकायदा नयनिका टिक्कू मेमोरियल ट्रस्ट (एनटीएमटी) फॉर एलर्जी केयर ऐंड ब्रेन रिसर्च नामक गैर-लाभकारी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की गई है।
विज्ञापन
इसका मकसद एलर्जी से बचने का प्रशिक्षण और उसके इलाज में अनुसंधान को बढ़ावा देना है। यह ट्रस्ट ब्रिटेन में काम शुरू करेगा लेकिन इसे भारत सहित पूरी दुनिया में ले जाने की योजना है।
विज्ञापन
अपनी बेटी खो चुकीं लक्ष्मी कौल इस ट्रस्ट की स्थापना के लिए लगातार मेहनत की हैं। उन्होंने कहा कि अनुसंधान को बढ़ावा देने की कोशिश के तहत हम दुनिया के अलग-अलग देशों की घटनाओं को भी दर्ज करना चाहते हैं।
लक्ष्मी कहती हैं कि प्राथमिक तौर पर ऐसा कहा जाता है कि यह पश्चिम की समस्या है और भारत सहित पूर्वी देशों में इसका अस्तित्व नहीं है। लेकिन, हम विभिन्न देशों में इस समस्या के प्रकार और उसके आकार की तुलना करना चाहते हैं।