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ब्रिटेन दौरे पर मोदी को वापस मिल सकता है कोहिनूर हीरा
Updated Wed, 29 Jul 2015 04:15 PM IST
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ब्रिटिश भारतीय सांसद कीथ वाज ने विश्व प्रसिद्ध कोहिनूर हीरा भारत को लौटाने की मांग की है। उनकी मांग है कि नवंबर में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ब्रिटेन दौरे के समय इसकी घोषणा की जाए।
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कीथ ने यह मांग कांग्रेस सांसद शशि थरूर के ऑक्सफोर्ड यूनियन में दिए गए हालिया भाषण की प्रतिक्रिया में की है, जिसमें उन्होंने ब्रिटेन से 200 वर्षों तक भारत पर बर्बर शासन के लिए हरजाने की मांग की थी।
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कीथ ने कहा, ‘मैं डॉ. थरूर के बयान और प्रधानमंत्री मोदी द्वारा उनके संदेश का समर्थन किये जाने का स्वागत करता हूं। मैं उनके दृष्टिकोण से सहमत हूं। ये जायज आपत्ति है जिसका समाधान होना चाहिए।’
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एशियाई मूल के सबसे लंबे समय तक ब्रिटिश सांसद रहने वाले कीथ ने कहा कि वित्तीय हरजाना देना एक जटिल, समय लेने वाली और संभावित रूप से निर्थक प्रक्रिया है। लेकिन कोहिनूर हीरे जैसी अमूल्य वस्तुओं को न लौटाने के लिए कोई बहाना नहीं हो सकता।‘मैंने कई साल तक इस मुहिम का समर्थन किया है।’
द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने के पक्ष में कैमरन
उन्होंने कहा मोदी का नवंबर में ब्रिटेन का दौरा होना है और ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन मजबूत द्विपक्षीय संबंध बरकरार रखने के लिए असाधारण प्रयास कर रहे हैं।
कीथ ने कहा, ‘वह कितना शानदार क्षण होगा जब यदि प्रधानमंत्री मोदी अपनी बहुत दिनों से प्रतीक्षित यात्रा को संपन्न करते हैं तथा वह हीरे को लौटाये जाने के वादे के साथ भारत लौटते हैं।’
मध्यकाल में आंध्रप्रदेश के गुंटुर जिले में कोल्लूर खान से कोहिनूर निकाला गया। एक समय इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा माना जाता था। मूल रूप से इस पर काकतीय राजवंश का मालिकाना हक रहा और उसने इसे एक मंदिर में देवी की आंख के तौर पर इसे स्थापित किया। इसके बाद यह कई आक्रमणकारियों के हाथों गुजरा और आखिरकार ब्रिटिश शासन में वहां पहुंचा।
अब यह हीरा महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताज का हिस्सा है। अभी तक ब्रिटेन इस हीरे को उसके मूल देश को लौटाने से मना करता रहा है।
कीथ ने कहा, ‘वह कितना शानदार क्षण होगा जब यदि प्रधानमंत्री मोदी अपनी बहुत दिनों से प्रतीक्षित यात्रा को संपन्न करते हैं तथा वह हीरे को लौटाये जाने के वादे के साथ भारत लौटते हैं।’
मध्यकाल में आंध्रप्रदेश के गुंटुर जिले में कोल्लूर खान से कोहिनूर निकाला गया। एक समय इसे दुनिया का सबसे बड़ा हीरा माना जाता था। मूल रूप से इस पर काकतीय राजवंश का मालिकाना हक रहा और उसने इसे एक मंदिर में देवी की आंख के तौर पर इसे स्थापित किया। इसके बाद यह कई आक्रमणकारियों के हाथों गुजरा और आखिरकार ब्रिटिश शासन में वहां पहुंचा।
अब यह हीरा महारानी एलिजाबेथ द्वितीय के ताज का हिस्सा है। अभी तक ब्रिटेन इस हीरे को उसके मूल देश को लौटाने से मना करता रहा है।