कुछ साल इंतजार, थ्री डी प्रिंटर से बनेगी इंसान की त्वचा
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कुछ बड़ी कॉस्मेटिक कंपनियां इंसानी कोशिकाओं और स्पेशलाइज्ड थ्री डी मशीन के जरिय मानव त्वचा बनाने का प्रयास कर रही हैं। इसे बायोप्रिटिंग का नाम दिया गया है और अगले कुछ सालों में इसके जरिए इंसान की त्वचा को विशेष प्रिंटर द्वारा बनाया जा सकेगा।
फिलहाल ओ लौरेल जैसी बड़ी कॉस्मेटिक कंपनी ने इस तरफ पहला कदम बढ़ाया है। लोरेल ने यूएस बायोटेक ओरगेनोवो के साथ मिलकर इस थ्री डी प्रिंटर पर काम शुरु किया है।
लौरेल पहले भी कई सालों से मानव त्वचा का विकल्प बनाने की दिशा में काम कर रहा था लेकिन इस प्रिंटर से वो ज्यादा तादाद में मानव त्वचा उपलब्ध करा पाएगा।
लौरेल ने शोध पर लगभग एक बिलियन तक खर्च किया
ये मानव त्वचा फ्रेंच कंपनी प्रयोगशालाओं में पिंगमेंट की मदद से बनाई जाती है। कुछ समय पहले यूरोप में जानवरों पर टेस्टिंग के बाद बाजार में लाए गए कुछ प्रोडक्ट को बैन कर दिया गया था इसके चलते इन कंपनियों को शोध जारी रखने में परेशानी उठानी पड़ी।
इस तरह से ये प्रिंटर, प्रयोगशाला में बनने वाली त्वचा से चार गुना जल्दी मानव त्वचा को बनाएगा। इससे कंपनियों को इंसानी स्किन बनने का इंतजार नहीं करना होगा बल्कि खुद से ही बायोप्रिंटर की मदद से बेहतर प्रोटोटाइप बना लेगीं।
इस पूरी प्रक्रिया में 2013 में लौरेल ने शोध पर लगभग एक बिलियन तक खर्च किया। लेकिन अभी भी इसकी कॉस्मेटिक टेस्टिंग के लिए 5 साल का समय ओर लगेगा।