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दुनिया में 3.6 अरब लोग पानी को तरस रहे, संयुक्त राष्ट्र की 2018 की रिपोर्ट में भयावह तस्वीर

Tue, 20 Mar 2018 07:15 AM IST
एजेंसी, पेरिस
एजेंसी, पेरिस Updated Tue, 20 Mar 2018 07:15 AM IST
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3.6 billion people in the world are facing water scarcity, UN 2018 report depicts horrifying picture
पानी का संकट
दुनिया भर की सरकारों को पानी की आपूर्ति और गुणवत्ता बेहतर करने के लिए हरित नीति पर जोर देना चाहिए क्योंकि जलवायु परिवर्तन और बढ़ती वैश्विक जनसंख्या के चलते अरबों लोगों के समक्ष पानी का संकट उत्पन्न हो गया है। संयुक्त राष्ट्र ने सोमवार को विश्व जल विकास रिपोर्ट 2018 पेश करते हुए यह बात कही। रिपोर्ट में बताया गया है कि दुनिया में 3.6 अरब लोग यानी आधी वैश्विक आबादी ऐसी है, जो हर साल कम से कम एक महीने पानी के लिए तरस जाती है। 22 मार्च को होने वाले विश्व जल दिवस से पहले यह रिपोर्ट पेश की गई है।
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रिपोट में चेतावनी दी गई है कि पानी की किल्लत झेल रहे लोगों की संख्या 2050 तक 5.7 अरब तक पहुंच सकती है। यूनेस्को की महानिदेशक आद्रे अजोले ने ब्राजिलिया में रिपोर्ट पेश करते हुए कहा कि अगर हमने कुछ नहीं किया तो 2050 तक पांच अरब से ज्यादा लोग ऐसे क्षेत्र में रह रहे होंगे, जहां पानी की आपूर्ति बेहद खराब होगी। 
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एक फीसदी हर साल बढ़ रही पानी की खपत 

रिपोर्ट के मुताबिक पिछली एक सदी में पानी की खपत छह गुना बढ़ी है। वहीं हर साल एक प्रतिशत पानी का इस्तेमाल बढ़ जाती है। जाहिर तौर पर जनसंख्या वृद्धि, आर्थिक विकास, उपभोग के तरीके में बदलाव से जरूरत ज्यादा बढ़ जाएगी। विकासशील और उभरती अर्थव्यवस्था वाले देशों में यह मांग ज्यादा होगी। 
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अमेरिका और चीन से लें सीख 

3.6 billion people in the world are facing water scarcity, UN 2018 report depicts horrifying picture
जलवायु परिवर्तन बढ़ाएगा मुश्किलें

जलवायु परिवर्तन से पानी के वैश्विक चक्र पर भी असर पड़ेगा। इससे बारिश वाले इलाकों में ज्यादा पानी बरसेगा व सूखाग्रस्त इलाकों में और सूखा पड़ेगा। जलाशय, नहर, ट्रीटमेंट प्लांट इस नई चुनौतियों का मुकाबला नहीं कर पाएंगे। ज्यादा कीमत, जगह न मिलने, गाद की समस्या और पाबंदियों के चलते नए जलाशय का निर्माण भी मुश्किल है। 

प्रकृति से सीखना होगा जल संरक्षण 

सुझाव दिया गया है कि पानी के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रकृति आधारिक उपायों पर जोर देना चाहिए। जैसे पानी संग्रहण, भूमि की नमी बढ़ाने, झीलों और भूजल स्तर बढ़ाने संबंधी प्रयासों पर जोर देना चाहिए। बांध बनाने की अपेक्षा यह बेहतर विकल्प है। पानी संबंधी टकराव से भी बचाना चाहिए। शोधकर्ताओं के मुताबिक ये प्राकृतिक विकल्प पानी को साफ भी कर करेंगे और उनकी आपूर्ति भी करेंगे। 

अमेरिका और चीन से लें सीख 

अमेरिका का न्यूयॉर्क शहर पानी की समस्या से निपटने के लिए जलाशय की रक्षा, वन संरक्षण और वातावरण के अनुकूल खेती पर जोर दे रहा है। वहीं चीन स्पंज सिटी प्रोजेक्ट को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें ज्यादा से ज्यादा बारिश का पानी जमीन के भीतर पहुंचाने की कोशिश की जाती है। ताकि भूजल स्तर में इजाफा हो। अगर दुनिया इससे सीख कर हरित जल नीति को बढ़ावा देन तो कृषि उत्पादन भी 20 प्रतिशत बढ़ जाएगा। 
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