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Europe Heatwave: ऊफ, ये गर्मी! यूरोप पर टूट पड़ा है मौसम का कहर, हजारों जान जाने का का अंदेशा

Wed, 20 Jul 2022 06:59 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, पेरिस Published by: Harendra Chaudhary Updated Wed, 20 Jul 2022 06:59 PM IST
सार

विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक गर्मी बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। ब्रिटेन के लिए ये गर्मी खास चिंता की बात है, क्योंकि यहां सिर्फ तीन फीसदी घरों में एयरकंडीशनिंग की सुविधा है...

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Europe heat wave: Europe facing hot weather, in France on Monday, mercury reached above 42 degree Celsius
यूरोप में हीटवेव - फोटो : Agency

विस्तार

यूरोप में इस समय असाधारण गर्मी पड़ रही है। सोमवार को फ्रांस में तापमान का नया रिकॉर्ड बना, जब पारा 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर जा पहुंचा। वैज्ञानिकों ने कहा है कि ब्रिटेन में भी ऐसा रिकॉर्ड बनने वाला है। उन्होंने चेतावनी दी है कि इस असामान्य गर्मी से हजारों लोगों की जान जा सकती है। स्पेन और पुर्तगाल में ऐसा होने का ज्यादा अंदेशा है।

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लगभग तमाम वैज्ञानिक इस बात पर सहमत हैं कि ये गर्मी जलवायु परिवर्तन का नतीजा है। उन्होंने कहा है कि जलवायु परिवर्तन के कारण अब सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी आपातकाल सामने आ गया है। पुर्तगाल और स्पेन में गर्मी ना झेल पाने के कारण सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है। ये संख्या अभी और बढ़ने की आशंका है।

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सोमवार को लंदन में तापमान 36 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा दर्ज हुआ। उसके बाद ब्रिटिश मौसम विभाग ने चेतावनी जारी की, जिसमें कहा गया कि इस सीजन में देश में तापमान 40 डिग्री को पार कर जाएगा। यह एक रिकॉर्ड होगा। इसके पहले देश में सबसे ज्यादा तापमान 2019 में दर्ज हुआ था, जब पारा 38.7 डिग्री तक चढ़ गया था। ब्रिटिश मीडिया में इस गर्मी को लेकर हाय-तौबा मची हुई है। अखबार द गार्जियन में छपी एक टिप्पणी में कहा है कि ब्रिटेन अब ठंडा मुल्क नहीं रह गया। अब सरकारों को इस हकीकत को ध्यान में रखते हुए नीति बनानी चाहिए।

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फ्रांस में सोमवार को उच्चतम तापमान बिस्कारोसे शहर में दर्ज हुआ। वहां पारा 42.6 डिग्री तक चढ़ गया। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक इस गर्मी का कारण अफ्रीका से आ रही गर्म हवाएं हैं। मौसम वैज्ञानिकों ने ध्यान दिलाया है कि धरती लगातार गर्म होती जा रही है। पिछली एक सदी में जलवायु परिवर्तन के कारण धरती की सतह का औसत तापमान 1.2 डिग्री सेल्सियस बढ़ चुका है। अब ये तापमान आम मौसम को प्रभावित कर रहा है। इसकी वजह से रिकॉर्ड गर्मी पड़ रही है। गर्मी पड़ने की अवधि भी पहले की तुलना में लंबी हो चुकी है। कई अनुसंधानों से यह साबित हुआ है कि मानव क्रिया के कारण हुए जलवायु परिवर्तन के बिना ऐसी गर्मी पड़ना संभव नहीं था।

 

 

एक हालिया शोध से सामने आया कि उत्तरी गोलार्द्ध की तुलना में यूरोप में गर्म हवाओं का जोर तीन से चार गुना ज्यादा हो गया है। ब्रिटिश मौसम विभाग से जुड़े वैज्ञानिक निकोस क्रिस्टिडिस ने एक बयान में कहा- ‘अगर प्राकृतिक जलवायु बनी रहती, तो ब्रिटेन में तापमान के 40 डिग्री पार करने की संभावना दस गुना कम रहती।’ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अत्यधिक गर्मी बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। ब्रिटेन के लिए ये गर्मी खास चिंता की बात है, क्योंकि यहां सिर्फ तीन फीसदी घरों में एयरकंडीशनिंग की सुविधा है।

 

स्पेन में लगातार पांच रातें ऐसी गुजरी हैं, जब तापमान 25.8 डिग्री सेल्सियस से नीचे नहीं गिरा। फ्रांस, स्पेन और पुर्तगाल के कई इलाकों में तेज गर्मी के कारण जंगलों में आग लग चुकी है। ट्रांसपोर्ट नेटवर्क के लिए भी ये गर्मी मुश्किलें पैदा कर रही है। ब्रिटेन में अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि गर्मी के कारण यह संभव है कि रेल पटरियां पिघल जाएं। विमानों के टायरों के भी गर्म होकर क्षतिग्रस्त होने की चेतावनी दी गई है।

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